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बीजेपी ने नकारात्मक तरीके से पेश किया मुसलमानों का इतिहास
Updated Sun, 11 Nov 2018 12:09 AM IST
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रामपुर। स्वार-टांडा के विधायक अब्दुल्ला आजम खां ने कहा कि बीजेपी ने मुसलमानों के इतिहास को नकारात्मक तरीके से पेश किया है। मुसलमानों को लुटेरा और हिंसक बताया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वह टीपू सुल्तान की जयंती पर अपने विचार पेश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस देश में मुसलमानों की छवि किरायेदारों और गद्दारों की बना दी है। बीजेपी द्वारा मुसलमानों को बाहरी आक्रमणकारी बताया जाता है। कहा कि टीपू सुल्तान ने अपनी तमाम जिंदगी अंग्रेजों से लड़ते हुए गुजार दी। यहां तक की उनकी शाहदत भी अंग्रेजों से लड़ते हुए हुई। टीपू सुल्तान की बहादुरी और देशभक्ति का पता उनकी इस बात से चलता है कि उन्होंने अपने आखिरी लम्हों में अपने मुल्क के लिए कहा था कि गीदड़ की हजार साल की जिंदगी से शेर की एक रात की जिंदगी बेहतर है। लेकिन, बड़े दु:ख की बात है कि ऐसे बहादुर को गद्दार बताते हुए उनकी जयंती मनाने का बीजेपी कर्नाटक में विरोध कर रही है। अगर इतिहास इसी तरह सियासत के चश्मे से पढ़ाया जाता रहा, तो आने वाले समय में उन लोगों की पहचान खत्म कर दी जाएगी, जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी है। उन्होंने कहा कि इतिहास को बदलना आसान भी नहीं है, क्योंकि अगर सौ कलम देश के बादशाह के कहने से चलेंगी तो दस कलम सही इतिहास बताने वालो की भी चलेंगी। अगर हम उन लोगों की कद्र नहीं कर सकते, जिन लोगों ने हमारे लिए कुर्बानियां दीं, तो आने वाला वक्त हमारी भी कद्र नहीं करेगा।
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उन्होंने कहा कि इस देश में मुसलमानों की छवि किरायेदारों और गद्दारों की बना दी है। बीजेपी द्वारा मुसलमानों को बाहरी आक्रमणकारी बताया जाता है। कहा कि टीपू सुल्तान ने अपनी तमाम जिंदगी अंग्रेजों से लड़ते हुए गुजार दी। यहां तक की उनकी शाहदत भी अंग्रेजों से लड़ते हुए हुई। टीपू सुल्तान की बहादुरी और देशभक्ति का पता उनकी इस बात से चलता है कि उन्होंने अपने आखिरी लम्हों में अपने मुल्क के लिए कहा था कि गीदड़ की हजार साल की जिंदगी से शेर की एक रात की जिंदगी बेहतर है। लेकिन, बड़े दु:ख की बात है कि ऐसे बहादुर को गद्दार बताते हुए उनकी जयंती मनाने का बीजेपी कर्नाटक में विरोध कर रही है। अगर इतिहास इसी तरह सियासत के चश्मे से पढ़ाया जाता रहा, तो आने वाले समय में उन लोगों की पहचान खत्म कर दी जाएगी, जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी है। उन्होंने कहा कि इतिहास को बदलना आसान भी नहीं है, क्योंकि अगर सौ कलम देश के बादशाह के कहने से चलेंगी तो दस कलम सही इतिहास बताने वालो की भी चलेंगी। अगर हम उन लोगों की कद्र नहीं कर सकते, जिन लोगों ने हमारे लिए कुर्बानियां दीं, तो आने वाला वक्त हमारी भी कद्र नहीं करेगा।
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