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नेताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ, मतदाताओं ने नहीं दिया साथ
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रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां के विरोध में कांग्रेस को समर्थन देने वाले उनके धुर विरोधी नेताओं का भी सपना लोकसभा के चुनाव में टूट गया। आजम के विरोध में जितने भी नेता एक मंच पर आए थे, उसमें किसी भी नेता के बूथ पर कांग्रेस के प्रत्याशी संजय कपूर बढ़त हासिल नहीं कर सके। खुद कांग्रेस प्रत्याशी अपने गांव गुजरैला का बूथ भी हार गए।
लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट से गठबंधन उम्मीदवार के रूप में आजम खां का टिकट तय होने के बाद से ही आजम विरोधी नेताओं ने विकल्प तलाशने शुरु कर दिए थे। कांग्रेस ने संजय कपूर को प्रत्याशी बनाया तो आजम विरोधी नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होने और समर्थन देने की होड़ सी लग गई। आजम खां के धुर विरोधी माने जाने वाले जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हाफिज अब्दुल सलाम भी कांग्रेस के समर्थन में आ गए, लेकिन वह भी कांग्रेस को वोट दिलाने में नाकाम रहे। उनके खुद के गांव से 55 नंबर बूथ पर 65 वोट भाजपा को तो 119 वोट कांग्रेस को मिले, जबकि आजम खां को इस बूथ से 279 वोट मिले । बूथ संख्या 56 पर भाजपा को 49 और कांग्रेस को 118 मत प्राप्त हो सके। वहीं आजम खां को इस बूथ पर 233 वोट मिले। इस तरह आजम खां 280 वोटों से दोनों बूथ जीत गए। यही नहीं स्वार नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष शफीक अहमद अंसारी ने भी कांग्रेस को समर्थन दिया। स्वार में उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह प्रभाव वोटों में तब्दील नहीं हो सका। उनके 119 नंबर बूथ से आजम खां को सर्वाधिक 617 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को महज 71 और भाजपा को 71 वोट मिले। बूथ संख्या 120 से आजम खां को 499, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 48 वोट मिले। भाजपा को इस बूथ पर 65 मत प्राप्त हुए। 121 नंबर बूथ पर भी साइकिल खूब दौड़ी। यहां आजम खां को 302, कांग्रेस को 17 जबकि भाजपा को 117 वोट मिले। पूर्व विधायक अली युसूफ अली के ग्राम बिजड़ा के बूथ नंबर 15 से कांग्रेेस को 196, जबकि आजम खां को 429 वोट मिले। भाजपा सिर्फ 31 पर सिमट गई। 16 नंबर बूथ पर आजम खां को 242 और कांग्रेस 172 वोट मिले। ऐसे में यहां से भी आजम खां विजयी रहे। कांग्रेस प्रत्याशी संजय कपूर के बेहद करीबी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य सचिन त्रिवेदी वैसे तो खुद अपने गांव के प्रधान हैं। लेकिन मिलक विधानसभा क्षेत्र के उनके गांव लखीमपुर विश्नू में 325 संख्या बूथ है, जहां से कांग्रेस को 38 और भाजपा को 595 वोट मिले, जबकि आजम खां को 166 वोट मिले। पूर्व विधायक अफरोज अली खां की बात की जाए तो उनके बूथ से भी आजम खां रिकार्ड वोटों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे।
लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट से गठबंधन उम्मीदवार के रूप में आजम खां का टिकट तय होने के बाद से ही आजम विरोधी नेताओं ने विकल्प तलाशने शुरु कर दिए थे। कांग्रेस ने संजय कपूर को प्रत्याशी बनाया तो आजम विरोधी नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होने और समर्थन देने की होड़ सी लग गई। आजम खां के धुर विरोधी माने जाने वाले जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हाफिज अब्दुल सलाम भी कांग्रेस के समर्थन में आ गए, लेकिन वह भी कांग्रेस को वोट दिलाने में नाकाम रहे। उनके खुद के गांव से 55 नंबर बूथ पर 65 वोट भाजपा को तो 119 वोट कांग्रेस को मिले, जबकि आजम खां को इस बूथ से 279 वोट मिले । बूथ संख्या 56 पर भाजपा को 49 और कांग्रेस को 118 मत प्राप्त हो सके। वहीं आजम खां को इस बूथ पर 233 वोट मिले। इस तरह आजम खां 280 वोटों से दोनों बूथ जीत गए। यही नहीं स्वार नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष शफीक अहमद अंसारी ने भी कांग्रेस को समर्थन दिया। स्वार में उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह प्रभाव वोटों में तब्दील नहीं हो सका। उनके 119 नंबर बूथ से आजम खां को सर्वाधिक 617 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को महज 71 और भाजपा को 71 वोट मिले। बूथ संख्या 120 से आजम खां को 499, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 48 वोट मिले। भाजपा को इस बूथ पर 65 मत प्राप्त हुए। 121 नंबर बूथ पर भी साइकिल खूब दौड़ी। यहां आजम खां को 302, कांग्रेस को 17 जबकि भाजपा को 117 वोट मिले। पूर्व विधायक अली युसूफ अली के ग्राम बिजड़ा के बूथ नंबर 15 से कांग्रेेस को 196, जबकि आजम खां को 429 वोट मिले। भाजपा सिर्फ 31 पर सिमट गई। 16 नंबर बूथ पर आजम खां को 242 और कांग्रेस 172 वोट मिले। ऐसे में यहां से भी आजम खां विजयी रहे। कांग्रेस प्रत्याशी संजय कपूर के बेहद करीबी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य सचिन त्रिवेदी वैसे तो खुद अपने गांव के प्रधान हैं। लेकिन मिलक विधानसभा क्षेत्र के उनके गांव लखीमपुर विश्नू में 325 संख्या बूथ है, जहां से कांग्रेस को 38 और भाजपा को 595 वोट मिले, जबकि आजम खां को 166 वोट मिले। पूर्व विधायक अफरोज अली खां की बात की जाए तो उनके बूथ से भी आजम खां रिकार्ड वोटों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे।
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