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सीमा लांघने की सजा, 16 साल पाक जेल में कैद

Thu, 11 Apr 2013 03:09 PM IST
हरदोई/ब्यूरो
हरदोई/ब्यूरो Updated Thu, 11 Apr 2013 03:09 PM IST
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ramkumar returned home after spending 16 years in pakistan prison

16 साल तक पाकिस्तान की जेल में बंद रहने के बाद रामकुमार बुधवार को घर लौट आया। वह 28 साल पहले अपने घर से गायब हुआ था। पंजाब मे साधू-संतों की टोली के साथ घूमते-घूमते गलती से वो पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया।

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वहां उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह 16 साल तक जेल में रहा।

पाक जेल से रिहा होने के बाद वह अमृतसर के मानसिक अस्पताल में भर्ती रहा। बुधवार को वह लौटा तो सबसे पहले गांव की सीमा पर मिट्टी को माथे लगाया। घर पहुंचते ही अपनों से लिपट कर फफक पड़ा।
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भाभी ने जलेबी से मुंह मीठा कराया। भतीजे-भतीजी लिपट गए। किसी ने कुशल-क्षेम पूछी, आशीष दिए तो किसी ने गुलाब का फूल थमाया। उसे देखने के लिए मानो पूरा गांव उमड़ पड़ा।
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गौरतलब है कि सांडी के गांव चौधकपुर निवासी अमर कुमार के दो बेटों में छोटा रामकुमार कुछ मानसिक रूप से बीमार रहता था। वर्ष 1985 में अचानक वह घर से लापता हो गया था। परिजनों ने काफी खोजबीन की लेकिन कोई पता नहीं चला।

उसके लौटने आस छोड़ दी गई। लापता बेटे की याद में बूढ़ी मां की आंखें पथरा गईं। पिता भी गुमशुदगी का सदमा का बर्दाश्त न कर सके। दोनों चल बसे।

कुछ ही दिन पहले घर वालों को सूचना मिली कि रामकुमार अमृतसर के अस्पताल में पड़ा है। उसके बड़े भाई शिवकुमार खुफिया टीम के साथ अमृतसर पहुंचे। रामकुमार ट्रेन से बुधवार को हरदोई लौटा। यहां सबसे पहले वह एएसपी अजय शंकर राय से मिला।

उसने एएसपी को बताया कि घर से गायब होने के बाद वह साधु-संतों के साथ निकल पड़ा था। उसी दौरान पंजाब पहुंचा। अकेला घूमने निकला तो गलती से पाकिस्तान के सीमाक्षेत्र में पहुंच गया।

वहां उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह 16 साल तक जेल में रहा। अचानक एक दिन रिहा कर उसे अमृतसर (पंजाब) के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। याद्दाश्त लौटने पर उसने अस्पताल प्रबंधन को अपने घर-परिवार के बारे में बताया।


एएसपी ने बताया कि 14 अगस्त 2007 को 19 बंदियों के साथ पाकिस्तान ने उसे पंजाब सरकार को सौंपा था। मानसिक संतुलन ठीक न होने के कारण इसे 15 अगस्त 2007 को अमृतसर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इसके संबंध में पंजाब पुलिस से उत्तर प्रदेश सरकार को सूचना मिली तो एलआईयू प्रभारी हारून रसीद खां को इसे ले आने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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