{"_id":"5fc7e9c58ebc3e5be450b478","slug":"the-economic-offenses-branch-will-investigate-the-rs-10-lakh-ration-scam-raibaraily-news-lko55289490","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्थिक अपराध शाखा करेगी 10 लाख रुपये के राशन घोटाले की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्थिक अपराध शाखा करेगी 10 लाख रुपये के राशन घोटाले की जांच
विज्ञापन
रायबरेली। आधार लिंक प्रणाली और एनआईसी के सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर जुलाई 2018 में करीब 10 लाख रुपये के राशन घोटाले की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई है। जिले में नौ आधार नंबरों का 927 बार प्रयोग कर 50 क्विंटल से अधिक राशन डकारा गया था।
घोटाले के खुलासे के बाद शहर कोतवाली और मिल एरिया थाने में सात कोटेदारों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। यह राशन घोटाला रायबरेली के साथ ही 20 जिलों में पकड़ा गया था।
जुलाई 2018 में 50 क्विंटल से अधिक राशन शहर के कोटेदारों ने डकार लिया था। मामले का खुलासा होने के बाद 27 अगस्त 2018 की रात तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने क्रय विक्रय सहकारी समिति दूरभाष नगर के कोटेदार चंद्र किशोर पांडेय, आईटीआई पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के कोटेदार शैलेंद्र मिश्रा व कंप्यूटर ऑपरेटर सुशील कुमार के खिलाफ मिलएरिया थाने में एफआईआर की थी।
विज्ञापन
जबकि तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक पूजा सिंह ने सत्य नगर के कोटेदार संतोष कुमार सोनकर, कप्तान का पुरवा के कोटेदार राज कुमार, सत्य नगर के कोटेदार विष्णु कुमार शर्मा, झूलेलाल मंदिर के कोटेदार जयदीप राजपाल के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर की थी।
एफआईआर के बाद मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। आरोपी कोटेदार चंद्र किशोर पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस संजय हलकौली ने मामले में कोटेदार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
जस्टिस ने सीओ स्तर के अधिकारी से जांच एसपी के पर्यवेक्षण में कराने के आदेश दिए थे। अब शासन ने राशन घोटाले की जांच को आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी है।
राशन घोटालेे के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को दिए जाने के संबद्ध में आदेश नहीं आया है। हालांकि स्तर से जांच के संबंध में आदेश के संबंध में मामला संज्ञान में जरूर आया है। मामले से संबंधित जो भी रिपोर्ट मांगी जाएगी, उसे जांच टीम को उपलब्ध कराई जाएगी।- केएन सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी
विज्ञापन
घोटाले के खुलासे के बाद शहर कोतवाली और मिल एरिया थाने में सात कोटेदारों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। यह राशन घोटाला रायबरेली के साथ ही 20 जिलों में पकड़ा गया था।
विज्ञापन
जुलाई 2018 में 50 क्विंटल से अधिक राशन शहर के कोटेदारों ने डकार लिया था। मामले का खुलासा होने के बाद 27 अगस्त 2018 की रात तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने क्रय विक्रय सहकारी समिति दूरभाष नगर के कोटेदार चंद्र किशोर पांडेय, आईटीआई पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के कोटेदार शैलेंद्र मिश्रा व कंप्यूटर ऑपरेटर सुशील कुमार के खिलाफ मिलएरिया थाने में एफआईआर की थी।
विज्ञापन
जबकि तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक पूजा सिंह ने सत्य नगर के कोटेदार संतोष कुमार सोनकर, कप्तान का पुरवा के कोटेदार राज कुमार, सत्य नगर के कोटेदार विष्णु कुमार शर्मा, झूलेलाल मंदिर के कोटेदार जयदीप राजपाल के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर की थी।
एफआईआर के बाद मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। आरोपी कोटेदार चंद्र किशोर पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस संजय हलकौली ने मामले में कोटेदार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
जस्टिस ने सीओ स्तर के अधिकारी से जांच एसपी के पर्यवेक्षण में कराने के आदेश दिए थे। अब शासन ने राशन घोटाले की जांच को आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी है।
राशन घोटालेे के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को दिए जाने के संबद्ध में आदेश नहीं आया है। हालांकि स्तर से जांच के संबंध में आदेश के संबंध में मामला संज्ञान में जरूर आया है। मामले से संबंधित जो भी रिपोर्ट मांगी जाएगी, उसे जांच टीम को उपलब्ध कराई जाएगी।- केएन सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी