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मवेशियों को ब्लॉक कार्यालय के अंदर खदेड़ा और लगाया ताला

Fri, 28 Jun 2019 01:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 01:03 AM IST
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The cattle pushed into the block office
रायबरेली में सतांव के ब्लॉक कार्यालय में किसानों को समझाते एसडीएम शशांक त्रिपाठी। - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। सतांव ब्लॉक क्षेत्र में छुट्टा जानवरों से तंग किसानों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा। आक्रोशित किसानों ने ब्लॉक कार्यालय के अंदर करीब 250 छुट्टा जानवरों को खदेड़ दिया और कार्यालय के बाहर का गेट बंद कर दिया। छुट्टा जानवरों की वजह से फसल नुकसान और गोशाला शुरू न किए जाने पर किसान भड़के थे। अधिकारी व कर्मचारी पहुंचे, लेकिन किसानों ने सभी को दफ्तर के अंदर जाने से रोक दिया।
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जानकारी पर एसडीएम सदर शशांक त्रिपाठी और सीओ लालगंज लक्ष्मीकांत गौतम पहुंचे और जल्द गोशाला शुरू कराने का आश्वासन देकर किसानों को शांत कराकर कार्यालय का खुलवाया। करीब दो घंटे तक कार्यालय में अफरातफरी रही। मलिकमऊ चौबारा के पास सतांव का ब्लॉक कार्यालय है।
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सुबह मलिकमऊ चौबारा गांव के किसानों ने करीब 250 छुट्टा जानवरों को ब्लॉक कार्यालय में खदेड़कर ताला बंद कर दिया। किसान दिनेश कुमार, सत्येंद्र कुमार, अमरनाथ आदि का कहना था कि आवारा जानवरों से हम सब परेशान हैं। समस्या का समाधान करने के लिए एक गोशाला बनी है, लेकिन उसका शुभारंभ नहीं हो सका है।
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जानवर खरीफ की फसल को चट कर रहे हैं, जिससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। ब्लॉक के अधिकारी व कर्मचारी पहुंचे तो उन्हें दफ्तर जाने से रोक दिया गया। इससे हड़कंप मच गया। सूचना पर एसडीएम और सीओ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को शांत कराने का प्रयास किया गया, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे।
बाद में एसडीएम शशांक त्रिपाठी ने गोशाला जल्द शुरू कराए जाने का आश्वासन देकर किसानों को शांत कराया और ब्लॉक कार्यालय का गेट खोला। इस पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। एसडीएम का कहना है कि किसानों की समस्या थी, उसे दूर कराने की बात कही गई है। जल्द गोशाला का शुभारंभ करा दिया जाएगा।

शासन का आदेश है कि पशुपालन विभाग के अफसर टीमें गठित करके छुट्टा जानवरों को पकड़े, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। टीमें जरूर गठित कर दी गई हैं, लेकिन अफसर कहीं पर पशुओं को पकड़वाने का कार्य नहीं कर रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी महज कागजों पर ही पशुओं को पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। इसी ढिलाई का नतीजा है कि किसानों का गुस्सा सड़क तक पहुंचा।
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