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स्वामी के इस्तीफे ने बिगाड़े सियासी समीकरण
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रायबरेली। कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से इस्तीफा देने के बाद मंगलवार को जिले की सियासत गर्म हो गई। स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ने से न सिर्फ जिले के सियासी समीकरण बदलेंगे, बल्कि टिकट को लेकर प्रमुख दलों को नए सिरे से मंथन करना पड़ेगा।
सबसे ज्यादा उलटफेर ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में होने के कयास लगाए जा रहे हैं। वजह यहां से लगातार दो बार से मनोज कुमार पांडेय सपा से विधायक हैं, जबकि दोनों बार स्वामी प्रसाद मौर्या का बेटा उत्कर्ष मौर्य उर्फ अशोक उनके खिलाफ मैदान में उतारा लेकिन हार का सामना करना पड़ा। स्वामी की अब सपा से नजदीकी की बात सामने आ रही है। ऐसे में ऊंचाहार क्षेत्र की राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य की सियासी जमीन ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुई थी। पहले ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र डलमऊ विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी।
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इस सीट पर स्वामी का रुतबा ऐसा था कि वह आसानी से विरोधियों को मात देकर चुनाव में जीत हासिल कर लेते थे। यही वजह रही कि 1996 में बसपा से चुनाव लड़े और जीत हासिल की।
हालांकि 1996 के चुनाव के पहले स्वामी ने कई बार हार का स्वाद चखा। 2002 के विधानसभा चुनाव में भी स्वामी ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और परचम लहराया। 2007 में स्वामी बसपा से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
चुनाव हारने के बाद भी ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में उनका आना-जाना लगा रहा। उन्होंने अपने बेटे उत्कर्ष मौर्य को मैदान में उतारा, लेकिन दोनों बार ही उनका बेटा चुनाव हार गया। 2012 के चुनाव में बेटा उत्कर्ष मौर्य बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार मिली।
माना जा रहा है कि इस बार भी वह बेटे को किसी जिताऊ सीट से चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन पैरोकारी के बावजूद बात नहीं बन रही थी और शायद इसी वजह से उन्होंने भाजपा से दूरी बनाई। स्वामी कद्दावर नेता माने जाते हैं और शायद इसी सियासी खेल की वजह से उन्होंने पाला बदला।
जमीन मजबूत की तो कोई चाह तो रही ही होगी
ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र के अलावा जिलेभर में स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपना दबदबा बनाने का प्रयास किया। बछरावां क्षेत्र हो या फिर ऊंचाहार में। सैकड़ों श्रमिकों को साइकिल बांटने या फिर उनको आर्थिक मदद देने में वह आगे रहे।
एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह का साथ देकर स्वामी ने रंजना चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। अपनी पुत्रवधू सविता मौर्या को दीनशाह गौरा से ब्लॉक प्रमुख बनवाने में भी कामयाबी हासिल की। स्वामी ने ऊंचाहार सीट पर सियासी मजबूती के लिए हर तरह के जतन किए।
12 दिन पहले सीएम के साथ साझा किया था मंच
महज 12 दिन पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ आईटीआई स्थित स्पोर्ट्स मैदान पर आयोजित समारोह में दिखे थे। यहां योगी व मोदी के साथ भाजपा की तारीफ में कसीदे पढ़े थे।
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सबसे ज्यादा उलटफेर ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में होने के कयास लगाए जा रहे हैं। वजह यहां से लगातार दो बार से मनोज कुमार पांडेय सपा से विधायक हैं, जबकि दोनों बार स्वामी प्रसाद मौर्या का बेटा उत्कर्ष मौर्य उर्फ अशोक उनके खिलाफ मैदान में उतारा लेकिन हार का सामना करना पड़ा। स्वामी की अब सपा से नजदीकी की बात सामने आ रही है। ऐसे में ऊंचाहार क्षेत्र की राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं।
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स्वामी प्रसाद मौर्य की सियासी जमीन ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुई थी। पहले ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र डलमऊ विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी।
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इस सीट पर स्वामी का रुतबा ऐसा था कि वह आसानी से विरोधियों को मात देकर चुनाव में जीत हासिल कर लेते थे। यही वजह रही कि 1996 में बसपा से चुनाव लड़े और जीत हासिल की।
हालांकि 1996 के चुनाव के पहले स्वामी ने कई बार हार का स्वाद चखा। 2002 के विधानसभा चुनाव में भी स्वामी ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और परचम लहराया। 2007 में स्वामी बसपा से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
चुनाव हारने के बाद भी ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में उनका आना-जाना लगा रहा। उन्होंने अपने बेटे उत्कर्ष मौर्य को मैदान में उतारा, लेकिन दोनों बार ही उनका बेटा चुनाव हार गया। 2012 के चुनाव में बेटा उत्कर्ष मौर्य बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार मिली।
माना जा रहा है कि इस बार भी वह बेटे को किसी जिताऊ सीट से चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन पैरोकारी के बावजूद बात नहीं बन रही थी और शायद इसी वजह से उन्होंने भाजपा से दूरी बनाई। स्वामी कद्दावर नेता माने जाते हैं और शायद इसी सियासी खेल की वजह से उन्होंने पाला बदला।
जमीन मजबूत की तो कोई चाह तो रही ही होगी
ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र के अलावा जिलेभर में स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपना दबदबा बनाने का प्रयास किया। बछरावां क्षेत्र हो या फिर ऊंचाहार में। सैकड़ों श्रमिकों को साइकिल बांटने या फिर उनको आर्थिक मदद देने में वह आगे रहे।
एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह का साथ देकर स्वामी ने रंजना चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। अपनी पुत्रवधू सविता मौर्या को दीनशाह गौरा से ब्लॉक प्रमुख बनवाने में भी कामयाबी हासिल की। स्वामी ने ऊंचाहार सीट पर सियासी मजबूती के लिए हर तरह के जतन किए।
12 दिन पहले सीएम के साथ साझा किया था मंच
महज 12 दिन पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ आईटीआई स्थित स्पोर्ट्स मैदान पर आयोजित समारोह में दिखे थे। यहां योगी व मोदी के साथ भाजपा की तारीफ में कसीदे पढ़े थे।