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राइस मिल मालिकों की हड़ताल से धान खरीद पड़ी सुस्त
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रायबरेली। राइस मिल मालिकों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ने लगा है। यही वजह है कि धान खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त हो गई है। केंद्र प्रभारियों को डर सता रहा है कि यदि राइस मिलें चालू नहीं हुईं तो धान उठान न होने से परेशानी बढ़ जाएगी। इसलिए केंद्र प्रभारी धान तौलने में तेजी नहीं दिखा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो धान खरीद के कार्य पर पूरी तरह से ब्रेक लग जाएगा, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ेगा।
जिले में एक नवंबर से धान खरीद शुरू हो गई है। धान खरीद शुरू होते ही राइस मिल मालिकों ने मांगों को लेकर हड़ताल का ऐलान कर दिया। इससे 54 राइस मिल मालिकों में तालाबंदी हो गई है।
यही राइस मिल मालिक सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे जाने वाले धान का उठान करते हैं। राइस मिल मालिकों की हड़ताल के असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10 दिन में महज अभी तक 124.80 मीट्रिक टन ही धान खरीदा गया है। धान खरीद से जुड़े अधिकारियों का भी मानना है कि राइस मिल मालिकों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ा है।
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मांगें मानी जाएं, अन्यथा हड़ताल चलती रहेगी
रायबरेली मिल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह का कहना है कि काफी समय से हम लोग मांगों को पूरा करने के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 11 नवंबर को संभागीय खाद्य नियंत्रक ने बातचीत करने के लिए लखनऊ बुलाया है। मांगें न मानने तक हड़ताल चलती रहेगी।
विजय शंकर शुक्ला, शाहिद, सूर्य विक्रम सिंह, कौशल किशोर, बृजेश सिंह का कहना है कि धान सूखने तक का पैसा नहीं दिया जाता। पिछली बार भी इसको लेकर आवाज उठाई गई थी, लेकिन आश्वासन पर हम लोगों ने हड़ताल नहीं की थी। इस बार उपेक्षा बर्दाश्त नहीं होगी। मांगें मानी जाएं, अन्यथा हड़ताल चलती रहेगी। हम लोगों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ रहा है।
राइस मिल मालिकों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ रहा है। हालांकि 15 नवंबर से धान खरीद में तेजी आती है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द राइस मिल मालिकों से बातचीत के जरिए हल निकाल लिया जाएगा। राइस मिल मालिकों को 11 नवंबर को वार्ता के लिए संभागीय खाद्य नियंत्रक ने लखनऊ बुलाया है।
रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ
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अधिकारियों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो धान खरीद के कार्य पर पूरी तरह से ब्रेक लग जाएगा, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ेगा।
जिले में एक नवंबर से धान खरीद शुरू हो गई है। धान खरीद शुरू होते ही राइस मिल मालिकों ने मांगों को लेकर हड़ताल का ऐलान कर दिया। इससे 54 राइस मिल मालिकों में तालाबंदी हो गई है।
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यही राइस मिल मालिक सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे जाने वाले धान का उठान करते हैं। राइस मिल मालिकों की हड़ताल के असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10 दिन में महज अभी तक 124.80 मीट्रिक टन ही धान खरीदा गया है। धान खरीद से जुड़े अधिकारियों का भी मानना है कि राइस मिल मालिकों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ा है।
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मांगें मानी जाएं, अन्यथा हड़ताल चलती रहेगी
रायबरेली मिल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह का कहना है कि काफी समय से हम लोग मांगों को पूरा करने के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 11 नवंबर को संभागीय खाद्य नियंत्रक ने बातचीत करने के लिए लखनऊ बुलाया है। मांगें न मानने तक हड़ताल चलती रहेगी।
विजय शंकर शुक्ला, शाहिद, सूर्य विक्रम सिंह, कौशल किशोर, बृजेश सिंह का कहना है कि धान सूखने तक का पैसा नहीं दिया जाता। पिछली बार भी इसको लेकर आवाज उठाई गई थी, लेकिन आश्वासन पर हम लोगों ने हड़ताल नहीं की थी। इस बार उपेक्षा बर्दाश्त नहीं होगी। मांगें मानी जाएं, अन्यथा हड़ताल चलती रहेगी। हम लोगों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ रहा है।
राइस मिल मालिकों की हड़ताल का असर धान खरीद पर पड़ रहा है। हालांकि 15 नवंबर से धान खरीद में तेजी आती है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द राइस मिल मालिकों से बातचीत के जरिए हल निकाल लिया जाएगा। राइस मिल मालिकों को 11 नवंबर को वार्ता के लिए संभागीय खाद्य नियंत्रक ने लखनऊ बुलाया है।
रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ