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रायबरेली: आदित्य हत्याकांड में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष समेत 14 आरोपियों को आजीवन कारावास, दो आरोपी दोषमुक्त

Tue, 18 Aug 2026 04:20 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 18 Aug 2026 04:20 PM IST
सार

आदित्य हत्याकांड में साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया है। मामले में 13 गवाहों को पेश किया गया था। जिनके आधार पर जिला जज ने फैसला सुनाया।

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Raebareli: 14 sentenced to life imprisonment in Aditya murder case, two acquitted
जेल भेजा गया आरोपी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

रायबरेली जिले के चर्चित आदित्य प्रताप सिंह हत्याकांड का मंगलवार को फैसला आ गया। जिला जज अमित पाल सिंह ने हत्याकांड में शामिल सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष समेत 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। कोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के माथे पर पसीना रहा।

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महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के सिकंदरपुर निवासी आदित्य प्रताप सिंह पुत्र प्रदीप कुमार सिंह डी फार्मा के छात्र थे। 9 अक्तूबर 2019 की शाम को वह मिल एरिया थाना क्षेत्र के रतापुर स्थित सोमू ढाबा पर अपने साथियों के साथ खाना खाने गए थे। इस दौरान बिल के भुगतान को लेकर विवाद हुआ और ढाबा मालिक व मुख्य आरोपी सुरेश यादव ने साथियों के साथ मिलकर आदित्य और उसके साथियों को ढाबे के भीतर जमकर पीटा था। इसके बाद जब आदित्य जान बचाकर घर की ओर बाइक से जाने लगे तो हरदासपुर से पास दो लग्जरी वाहन सवार हमलावरों ने बाइक को ओवरटेक कर आदित्य की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को हरचंदपुर के गढ़ी खास गांव के पास फेंक दिया था। 10 अक्तूबर को पुलिस ने आदित्य का शव सड़क किनारे से बरामद किया था। इस हत्याकांड में आदित्य के पिता प्रदीप कुमार सिंह ने हरचंदपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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इस घटना ने प्रदेश की सियासत को भी गर्म कर दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन एसपी स्वप्निल ममगाई ने एसओजी के साथ पुलिस टीम को हत्यारोपियों की धरपकड़ के लिए लगाया था। पुलिस ने घटना के दूसरे दिन ही रतापुर निवासी व मुख्य आरोपी सुरेश यादव, भदोखर थाना क्षेत्र के मिश्रन का पुरवा मजरे सुलखियापुर निवासी विनोद कुमार, मिलएरिया क्षेत्र के देवानंदपुर निवासी सुमेर उर्फ राम सुमेर, झुरहा उर्फ जयचंद, शहर के तेलियाकोट निवासी सौरभ शर्मा, रतापुर भरतपुरम निवासी मानू कुमार और अशरफाबाद थाना महराजगंज निवासी अभितेज सिंह को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ में पुलिस को मालूम चला था कि खाना खाने के बाद बिल पेमेंट को लेकर विवाद होने के बाद आदित्य की हत्या की गई थी।
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इस मामले में फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल के साथ सोमू ढाबा का निरीक्षण किया था। साथ ही पुलिस के खुफियातंत्र ने 16 लोगों के हत्याकांड में शामिल होने की जानकारी दी थी। इसके बाद ताबड़तोड़ छापामारी के बाद पुलिस ने सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राम प्रताप यादव उर्फ आरपी सिंह यादव, रमेश यादव, अंकित यादव, हर्षित वर्मा, लवकुश कुमार , गयाबक्श सिंह, अतुल तिवारी, सचिन कुमार सोनी, राम कृष्ण यादव उर्फ आरके को गिरफ्तार किया था। सभी आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया था। वहीं दिसंबर 2019 में सभी आरोपियों को बरेली, शाहजहांपुर और हरदोई जिला कारागार भेज दिया गया था। पिछले डेढ़ साल से सभी 16 आरोपी जमानत पर थे।

इस मामले में शासन के निर्देश पर विशेष पैरवी के लिए सुरेश प्रताप सिंह को विशेष अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था। मंगलवार को सत्र न्यायालय में सुनवाई पूरी हुई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आदित्य सिंह हत्याकांड में आरोपी सुरेश यादव, राम प्रताप यादव, रमेश यादव, अंकित यादव, हर्षित वर्मा, लवकुश कुमार, गयाबक्श सिंह, मानू कुमार बारी, विनोद कुमार, सुमेर उर्फ राम समेर, झुरहा उर्फ जयचंद, सौरभ शर्मा, अतुल तिवारी, सचिन कुमार सोनी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास के साथ 35-35 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्य को अभाव में राम कृष्ण यादव उर्फ आरके व अभितेज सिंह को दोषमुक्त कर दिया। सजा सुनाए जाने के बाद सभी 14 आरोपियों को जिला विशेष सुरक्षा के बीच जिला कारागार लाया गया, जहां पर उनका मेडिकल चेकअप हुआ। कोर्ट के फैसले पर सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव ने मीडिया के सामने कहा कि वह हाईकोर्ट जाएंगे। समय बदलेगा, इस मामले में बहुत लोग लगे हुए थे। न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं।

सजा सुनाते ही एक तरफ गम तो दूसरी ओर आंखों से छलके खुशी के आंसू

फैसला आते ही कोर्ट परिसर में मायूसी, राहत और न्याय मिलने की संतुष्टि के भाव एक साथ नजर आए। 14 दोषियों की आंखों से आंसू झलक पड़े। आदित्य की बहन रुचि की आंखों से भाई को इंसाफ मिलने की खुशी आंसू बनकर छलक पड़ी। मंगलवार दोपहर दो बजे आदित्य की हत्या के दोषियों को सजा सुनाई जानी थी।

करीब सवा दो बजे सभी दोषियों को कोर्ट में पेश किया गया। सभी दोषियों और उनके परिजनों के चेहरे पर सजा से पहले ही डर साफ नजर आया। कुछ देर बाद ही जज ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों को सजा सुनाए जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत से बाहर निकालकर पुलिस वाहन तक पहुंचाया गया। सजा होने के बाद कोर्ट परिसर में लोग चर्चा करते दिखे। बोले, भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती है। आदमी को ज्यादा बढ़कर बात नहीं करनी चाहिए। भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। आखिर आदित्य को इंसाफ मिल ही गया।

आदित्य हत्याकांड टाइमलाइन
-9 अक्तूबर 2019 को सोमू ढाबा में आदित्य की हत्या
10-अक्तूबर 2019 को शव गढ़ी खास गांव के पास मिला
-11 जनवरी 2019 को जिला मुख्यालय में हुआ आदित्य का पोस्टमार्टम
-25 दिसंबर 2019 को पुलिस ने केस में आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया
-20 जनवरी 2020 को जिला जज कोर्ट में पहली सुनवाई
-18 अगस्त 2026 को 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

हाईकोर्ट के आदेश पर तेजी से हुई थी सुनवाई

बहन रुचि के मुताबिक 20 जनवरी को पहली सुनवाई जिला जज कोर्ट में हुई थी। बाद में यह मामला एडीजे प्रथम के यहां भेज दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तय हुआ था कि जिला जज ही प्रतिदिन मामले की सुनवाई करेंगे। इसके बाद तेजी से मामले की सुनवाई हुई। मामले में 13 गवाह कोर्ट में पेश हुए। बीती जुलाई माह में डीबीआर को लेकर विवाद हुआ था। इस पर शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह राठौर को हटाकर वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश प्रताप सिंह को इस मामले के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त किया गया था।

अधूरा न्याय मिला-रुचि
मृतक आदित्य प्रताप सिंह की बहन रुचि ने बताया कि उन्हें अधूरा न्याय मिला है, क्योंकि आरके यादव, अभितेज सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया। इन्हीं दोनों ने स्कार्पियो से भाई का पीछा किया था। हालांकि उन्होंने 14 दोषियों को सजा सुनाए जाने पर खुशी जताई। कहा कि लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनको न्याय दिलाने में मदद की। यदि मुख्यमंत्री मामले को गंभीरता से न लेते तो उनकी हत्या हो जाती। उन्हें सुरक्षा दी गई।

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