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दरक रहे पांच साल में बने भ्रष्टाचार के ओवरब्रिज
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रायबरेली में शहर क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रासिंग पर इस तरह दरक गया ओवरब्रिज।
- फोटो : RAIBARAILY
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केस एक
पानी में बहे 424 करोड़, हिचकोले खा रहे 40 हजार लोग
रायबरेली-बांदा के बीच आवागमन सुगम बनाने के लिए वर्ष 2018 में हाईवे का निर्माण कराया गया। हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण पर 424 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस हाईवे से प्रतिदिन करीब 40 हजार लोगों का आवागमन होता है। इस हाईवे कानपुर, उन्नाव, बांदा, फतेहपुर, झांसी समेत अन्य जिले के लोग आते जाते हैं। लालगंज कस्बे में जाम की समस्या को देखते हुए बाईपास और रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाईवे और ओवरब्रिज का लोकार्पण किया था। बाईपास और सड़क के निर्माण में अफसरों और कार्यदायी एजेंसी ने जमकर धन का बंदरबाट किया। यही वजह रही कि बाईपास से आवागमन शुरू होने के कुछ दिन बाद बाईपास पर रेलवे लाइन पर बनाया गया पुल ध्वस्त हो गयं। पुल ढह न जाए, इसको देखते हुए अफसरों ने लोहे के पिलर लगाकर रोकवा दिया। तभी से बाईपास से आवागमन बंद है। डेढ़ साल बाद से मरम्मत कराकर आवागमन बहाल करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन फ्लाईओवर अब तक नहीं बन पाया है। हाईवे भी बदहाल हो गया। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं।
केस दो
35 करोड़ खर्च होने के बाद भी फर्राटा नहीं भर पा रहे वाहन
रायबरेली शहर में मामा चौराहा के पास ओवरब्रिज बनवाया गया है। इस ओवरब्रिज को रायबरेली-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया है। इसके निर्माण पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईओवर का लोकार्पण किया था। दो साल पहले यह पुल दरक गया था। एक माह तक आवागमन बंद था। मामला तूल पकड़ा तो सेतु निगम के अधिकारियों ने फ्लाईओवर की मरम्मत कराई। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में ही फ्लाईओवर को इतना घुमावदार बना दिया है कि इस ओवरब्रिज से बड़े वाहन नहीं गुजर पाते। छोटे वाहनों का ही संचालन होता है। ओवरब्रिज बनने के बाद भी शहरवासियों को जाम से राहत मिलने का सपना हकीकत में नहीं बदल पाया। यह फ्लाईओवर अब भी जर्जर अवस्था में है। इसकी देखरेख नहीं की जा रही है। किसी भी दिन यह पुल फिर दरक सकता है।
केस तीन
40 करोड़ खर्च होने के बाद भी एक लाख लोग बेहाल
शहर क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के दरक जाने से एक लाख लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। एनएचएआई ने दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ओवरब्रिज का लोकार्पण कराया था। जिले से होकर निकले सुल्तानपुर वाया टांडा नेशनल हाईवे पर मलिकमऊ के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में शनिवार को दरार आ गई थी। 636 करोड़ रुपये से बने हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण में धन का बंदरबांट का नतीजा रहा कि इतनी जल्दी ओवरब्रिज दरक गया। अमेठी, सुल्तानपुर, आयोध्या, टांडा समेत आसपास कस्बों और गांवों को आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायबरेली-सुल्तानपुर वाया टांडा 162 किलोमीटर हाईवे से प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा लोगों का आवागमन होता है। इसमें छोटे और भारी वाहन चलते हैं। फ्लाईओवर के निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसका फायदा लोगों को नहीं मिल पाया।
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रायबरेली। सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में बनवाए गए ओवरब्रिजों की तस्वीर कुछ ऐसी ही है। विभागीय और कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों की हिम्मत तो देखिए, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किए गए लोकार्पण वाले ओवरब्रिजों को भी नहीं छोड़ा और जमकर खेल किया। लोगों का आवागमन बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन आज भी समस्या जस की तस है। पांच साल में बनाए गए ओवरब्रिजों के दरकने से भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है। खास बात ये है कि ओवरब्रिजों के निर्माण कार्य के दौरान न तो जिला प्रशासन के अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया। नतीजतन जमकर खेल हुुआ। यदि इन ओवरब्रिजों के निर्माण कार्यों की जांच कराई जाए तो इसमें खेल करने वाले अधिकारी बेपर्दा हो सकते हैं।
लालगंज में दोबारा होगा ओवरब्रिज निर्माण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से जिन ओवरब्रिजों का लोकार्पण किया गया था, उन्हें मानक के तहत ही बनवाया गया था। लालगंज बाईपास पर बने ओवरब्रिज का दोबारा निर्माण करवाया जाएगा। मामा चौराहे पर बना ओवरब्रिज हमारा नहीं है। उसे दूसरी कार्यदायी संस्था की तरफ से बनवाया गया था। शहर के क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर दरके ओवरब्रिज को जल्द ठीक करा दिया जाएगा। -समर सिंह, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
अफसरों से तलब की गई पूरी रिपोर्ट
शहर क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के दरक जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएचएआई के अधिकारियों से पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। एनएचएआआई के अधिकारियों ने कल तक का समय मांगा है। लालगंज में बने ओवरब्रिज के दरक जाने और मामा चौराहा के पास बने फ्आईओवर का निर्माण मानक के तहत न कराए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी भी जांच कराई जाएगी। निर्माण कार्यों में किसी तरह की मनमानी नहीं होने दी जाएगी। -माला श्रीवास्तव, डीएम
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पानी में बहे 424 करोड़, हिचकोले खा रहे 40 हजार लोग
रायबरेली-बांदा के बीच आवागमन सुगम बनाने के लिए वर्ष 2018 में हाईवे का निर्माण कराया गया। हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण पर 424 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस हाईवे से प्रतिदिन करीब 40 हजार लोगों का आवागमन होता है। इस हाईवे कानपुर, उन्नाव, बांदा, फतेहपुर, झांसी समेत अन्य जिले के लोग आते जाते हैं। लालगंज कस्बे में जाम की समस्या को देखते हुए बाईपास और रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाईवे और ओवरब्रिज का लोकार्पण किया था। बाईपास और सड़क के निर्माण में अफसरों और कार्यदायी एजेंसी ने जमकर धन का बंदरबाट किया। यही वजह रही कि बाईपास से आवागमन शुरू होने के कुछ दिन बाद बाईपास पर रेलवे लाइन पर बनाया गया पुल ध्वस्त हो गयं। पुल ढह न जाए, इसको देखते हुए अफसरों ने लोहे के पिलर लगाकर रोकवा दिया। तभी से बाईपास से आवागमन बंद है। डेढ़ साल बाद से मरम्मत कराकर आवागमन बहाल करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन फ्लाईओवर अब तक नहीं बन पाया है। हाईवे भी बदहाल हो गया। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं।
केस दो
35 करोड़ खर्च होने के बाद भी फर्राटा नहीं भर पा रहे वाहन
रायबरेली शहर में मामा चौराहा के पास ओवरब्रिज बनवाया गया है। इस ओवरब्रिज को रायबरेली-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया है। इसके निर्माण पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईओवर का लोकार्पण किया था। दो साल पहले यह पुल दरक गया था। एक माह तक आवागमन बंद था। मामला तूल पकड़ा तो सेतु निगम के अधिकारियों ने फ्लाईओवर की मरम्मत कराई। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में ही फ्लाईओवर को इतना घुमावदार बना दिया है कि इस ओवरब्रिज से बड़े वाहन नहीं गुजर पाते। छोटे वाहनों का ही संचालन होता है। ओवरब्रिज बनने के बाद भी शहरवासियों को जाम से राहत मिलने का सपना हकीकत में नहीं बदल पाया। यह फ्लाईओवर अब भी जर्जर अवस्था में है। इसकी देखरेख नहीं की जा रही है। किसी भी दिन यह पुल फिर दरक सकता है।
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केस तीन
40 करोड़ खर्च होने के बाद भी एक लाख लोग बेहाल
शहर क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के दरक जाने से एक लाख लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। एनएचएआई ने दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ओवरब्रिज का लोकार्पण कराया था। जिले से होकर निकले सुल्तानपुर वाया टांडा नेशनल हाईवे पर मलिकमऊ के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में शनिवार को दरार आ गई थी। 636 करोड़ रुपये से बने हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण में धन का बंदरबांट का नतीजा रहा कि इतनी जल्दी ओवरब्रिज दरक गया। अमेठी, सुल्तानपुर, आयोध्या, टांडा समेत आसपास कस्बों और गांवों को आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायबरेली-सुल्तानपुर वाया टांडा 162 किलोमीटर हाईवे से प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा लोगों का आवागमन होता है। इसमें छोटे और भारी वाहन चलते हैं। फ्लाईओवर के निर्माण पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसका फायदा लोगों को नहीं मिल पाया।
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रायबरेली। सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में बनवाए गए ओवरब्रिजों की तस्वीर कुछ ऐसी ही है। विभागीय और कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों की हिम्मत तो देखिए, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किए गए लोकार्पण वाले ओवरब्रिजों को भी नहीं छोड़ा और जमकर खेल किया। लोगों का आवागमन बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन आज भी समस्या जस की तस है। पांच साल में बनाए गए ओवरब्रिजों के दरकने से भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है। खास बात ये है कि ओवरब्रिजों के निर्माण कार्य के दौरान न तो जिला प्रशासन के अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया। नतीजतन जमकर खेल हुुआ। यदि इन ओवरब्रिजों के निर्माण कार्यों की जांच कराई जाए तो इसमें खेल करने वाले अधिकारी बेपर्दा हो सकते हैं।
लालगंज में दोबारा होगा ओवरब्रिज निर्माण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से जिन ओवरब्रिजों का लोकार्पण किया गया था, उन्हें मानक के तहत ही बनवाया गया था। लालगंज बाईपास पर बने ओवरब्रिज का दोबारा निर्माण करवाया जाएगा। मामा चौराहे पर बना ओवरब्रिज हमारा नहीं है। उसे दूसरी कार्यदायी संस्था की तरफ से बनवाया गया था। शहर के क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर दरके ओवरब्रिज को जल्द ठीक करा दिया जाएगा। -समर सिंह, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
अफसरों से तलब की गई पूरी रिपोर्ट
शहर क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के दरक जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएचएआई के अधिकारियों से पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। एनएचएआआई के अधिकारियों ने कल तक का समय मांगा है। लालगंज में बने ओवरब्रिज के दरक जाने और मामा चौराहा के पास बने फ्आईओवर का निर्माण मानक के तहत न कराए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी भी जांच कराई जाएगी। निर्माण कार्यों में किसी तरह की मनमानी नहीं होने दी जाएगी। -माला श्रीवास्तव, डीएम