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दो साल में जर्जर हो गया 35 करोड़ का ओवरब्रिज
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ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट की टूटी सरिया व लोहे की प्लेट।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने के लिए शहर के मामा चौराहा रेलवे क्रॉसिंग पर 35 करोड़ की लागत से बनवाया गया ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया है। यह हाल तब है, जब इस ओवरब्रिज से भारी वाहनों का ज्यादा आवागमन नहीं है।
इसके बावजूद ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट की सरिया और लोहे की प्लेटें टूट गईं हैं। निर्माण के समय मानकों को ताक पर रखा गया है। यही वजह है कि बीच में अधिक मोड़ दे दिए जाने के कारण एक साथ दो चार पहिया वाहन नहीं निकल पाते हैं।
एक्सपेंशन ज्वाइंट ध्वस्त होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस ओवरब्रिज निर्माण का मकसद शहर में जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए कराया गया था।
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कार्यदायी संस्था रेलवे एवं लोक निर्माण विभाग/उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड थी। यह ओवरब्रिज 2018 में बनकर तैयार हुआ था। आवागमन शुरू हुआ तो ऊहापोह की स्थिति बन गई। ओवरब्रिज संकरा होने के साथ-साथ इसमें अधिक मोड़ दे दिए जाने से एक साथ दो बड़े वाहन नहीं निकल पाए।
इस वजह से शहर में जाम की समस्या जस की तस बनी है। अब इस ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में लगी सरिया और लोहे की लगी प्लेटें टूट गई हैं। दो साल में ही 35 करोड़ रुपये से तैयार किया गया ओवरब्रिज खस्ताहाल हो गया।
मानक को दरकिनार करके बनाए गए इस ओवरब्रिज का 16 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकार्पण कराया गया था। यह ओवरब्रिज सई नदी के पहले लखनऊ-प्रयागराज हाईवे को जोड़ता है। हाईवे की तरफ की सड़क भी ध्वस्त हो गई है।
मानकों को ताक पर रखकर बनाए गए ओवरब्रिज के विरोध में कई बार शिकायतें हुई, लेकिन अफसरों ने मामले को दबा दिया। जल्दबाजी करते हुए अफसरों ने लोकार्पण करा दिया गया।
ओवरब्रिज निर्माण के बाद ब्रिज कॉर्पोरेशन इसे हैंडओवर करने के लिए लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और नगर पालिका को पत्राचार कर चुका हैं, लेकिन अब तक किसी विभाग ने इसे हैंडओवर नहीं किया है।
इससे साफ जाहिर है कि ब्रिज के निर्माण में मनमानी हुई है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी एसके कुरील ने बताया कि पुल में कई कमियां हैं। उनको दुरुस्त होने के बाद हैंडओवर किया जाएगा।
ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट की सरिया व प्लेट टूटे होने की जानकारी हुई हैं। जल्द इसको दुरुस्त करा दिया जाएगा। ओवरब्रिज को हैंडओवर करने के लिए कई विभागों को पत्राचार किया गया, लेकिन किसी ने हैंडओवर नहीं किया। लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर करना है। अन्य मरम्मत के लिए ब्रिज कॉर्पोरेशन को कोई बजट नहीं मिलता है।-विजय त्रिपाठी, अवर अभियंता, ब्रिज कॉर्पोरेशन प्रतापगढ़
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इसके बावजूद ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट की सरिया और लोहे की प्लेटें टूट गईं हैं। निर्माण के समय मानकों को ताक पर रखा गया है। यही वजह है कि बीच में अधिक मोड़ दे दिए जाने के कारण एक साथ दो चार पहिया वाहन नहीं निकल पाते हैं।
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एक्सपेंशन ज्वाइंट ध्वस्त होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस ओवरब्रिज निर्माण का मकसद शहर में जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए कराया गया था।
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कार्यदायी संस्था रेलवे एवं लोक निर्माण विभाग/उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड थी। यह ओवरब्रिज 2018 में बनकर तैयार हुआ था। आवागमन शुरू हुआ तो ऊहापोह की स्थिति बन गई। ओवरब्रिज संकरा होने के साथ-साथ इसमें अधिक मोड़ दे दिए जाने से एक साथ दो बड़े वाहन नहीं निकल पाए।
इस वजह से शहर में जाम की समस्या जस की तस बनी है। अब इस ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में लगी सरिया और लोहे की लगी प्लेटें टूट गई हैं। दो साल में ही 35 करोड़ रुपये से तैयार किया गया ओवरब्रिज खस्ताहाल हो गया।
मानक को दरकिनार करके बनाए गए इस ओवरब्रिज का 16 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकार्पण कराया गया था। यह ओवरब्रिज सई नदी के पहले लखनऊ-प्रयागराज हाईवे को जोड़ता है। हाईवे की तरफ की सड़क भी ध्वस्त हो गई है।
मानकों को ताक पर रखकर बनाए गए ओवरब्रिज के विरोध में कई बार शिकायतें हुई, लेकिन अफसरों ने मामले को दबा दिया। जल्दबाजी करते हुए अफसरों ने लोकार्पण करा दिया गया।
ओवरब्रिज निर्माण के बाद ब्रिज कॉर्पोरेशन इसे हैंडओवर करने के लिए लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और नगर पालिका को पत्राचार कर चुका हैं, लेकिन अब तक किसी विभाग ने इसे हैंडओवर नहीं किया है।
इससे साफ जाहिर है कि ब्रिज के निर्माण में मनमानी हुई है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी एसके कुरील ने बताया कि पुल में कई कमियां हैं। उनको दुरुस्त होने के बाद हैंडओवर किया जाएगा।
ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट की सरिया व प्लेट टूटे होने की जानकारी हुई हैं। जल्द इसको दुरुस्त करा दिया जाएगा। ओवरब्रिज को हैंडओवर करने के लिए कई विभागों को पत्राचार किया गया, लेकिन किसी ने हैंडओवर नहीं किया। लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर करना है। अन्य मरम्मत के लिए ब्रिज कॉर्पोरेशन को कोई बजट नहीं मिलता है।-विजय त्रिपाठी, अवर अभियंता, ब्रिज कॉर्पोरेशन प्रतापगढ़