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महराजगंज कोतवाल की भूमिका की होगी जांच
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रायबरेली। गोवंश तस्करों से बरामद वाहन का नंबर एफआईआर में गलत दर्ज किए जाने का महराजगंज पुलिस के लिए गले की फांस बनता नजर आ रहा है। स्थानीय पुलिस और अफसर इस मामले की नाकामी भी छिपा रहे। यही वजह है कि इसकी जानकारी आईजी तक को नहीं दी गई। ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद यह मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। लखनऊ रेंज के आईजी एसके भगत ने पूरे प्रकरण के साथ ही महराजगंज कोतवाल की भूमिका की जांच कराने की बात कही है।
गौरतलब है कि तीन दिन पहले महराजगंज पुलिस ने तस्करी के लिए ले जाए जा रहे गोवंशों को एक पिकअप से बरामद किया था। पुलिस ने तस्करों को पकड़ लिया और वाहन कोतवाली में खड़ा करा दिया। बरामद की गई पिकअप का नंबर यूपी 32 ईएन 6975 था, जबकि फर्द और एफआईआर में गाड़ी नंबर यूपी 32 ईएन 7569 लिखा दिया गया। यह खेल उजागर होने के बाद महराजगंज कोतवाल लालचंद्र सरोज पर अंगुली उठ रही हैं। कहा जा रहा है कि सेटिंग-गेटिंग के चलते उन्होंने ऐसा किया।
पुलिस अफसर यह कहते हुए कोतवाल को क्लीनचिट देने की कोशिश कर रहे हैं कि कंप्यूटर में फीडिंग के चलते ऐसा हुआ है। सवाल ये उठता है कि अफसर यह कैसे कह रहे हैं कि यह भूल वश हुआ। वहीं अमर उजाला के जरिए आईजी एसके भगत को प्रकरण की जानकारी हुई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। आईजी ने इस पूरे प्रकरण और कोतवाल की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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आईजी, लखनऊ रेंज एसके भगत ने कहा कि महराजगंज पुलिस की ओर से गोवंश तस्करों से बरामद वाहन का नंबर एफआईआर में गलत दर्ज किए जाने के मामले की जानकारी नहीं दी गई है। ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी हुई है। यह बहुत गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण के साथ ही कोतवाल की भूमिका की जांच कराई जाएगी। जांच के आधार पर मामले में सख्त कार्रवाई जाएगी।
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गौरतलब है कि तीन दिन पहले महराजगंज पुलिस ने तस्करी के लिए ले जाए जा रहे गोवंशों को एक पिकअप से बरामद किया था। पुलिस ने तस्करों को पकड़ लिया और वाहन कोतवाली में खड़ा करा दिया। बरामद की गई पिकअप का नंबर यूपी 32 ईएन 6975 था, जबकि फर्द और एफआईआर में गाड़ी नंबर यूपी 32 ईएन 7569 लिखा दिया गया। यह खेल उजागर होने के बाद महराजगंज कोतवाल लालचंद्र सरोज पर अंगुली उठ रही हैं। कहा जा रहा है कि सेटिंग-गेटिंग के चलते उन्होंने ऐसा किया।
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पुलिस अफसर यह कहते हुए कोतवाल को क्लीनचिट देने की कोशिश कर रहे हैं कि कंप्यूटर में फीडिंग के चलते ऐसा हुआ है। सवाल ये उठता है कि अफसर यह कैसे कह रहे हैं कि यह भूल वश हुआ। वहीं अमर उजाला के जरिए आईजी एसके भगत को प्रकरण की जानकारी हुई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। आईजी ने इस पूरे प्रकरण और कोतवाल की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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आईजी, लखनऊ रेंज एसके भगत ने कहा कि महराजगंज पुलिस की ओर से गोवंश तस्करों से बरामद वाहन का नंबर एफआईआर में गलत दर्ज किए जाने के मामले की जानकारी नहीं दी गई है। ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी हुई है। यह बहुत गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण के साथ ही कोतवाल की भूमिका की जांच कराई जाएगी। जांच के आधार पर मामले में सख्त कार्रवाई जाएगी।