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रक्तदान कर समाज में कायम की इंसानियत की मिसाल

Fri, 30 Sep 2016 11:50 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Fri, 30 Sep 2016 11:50 PM IST
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Humane Society of the precedent set in donated blood
blood donation - फोटो : अमर उजाला
जिले में भी ऐेसे कुछ लोग हैं, जो रक्तदान के लिए जाने जाते हैं। समय-समय पर रक्तदान करके दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए कदम बढ़ाते हैं। न तो जान-पहचान देखते हैं न तो नाते और रिश्तेदारी। इनका उद्देश्य सिर्फ लोगों की जान बचाना होता है।
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किसी भी समय जरूरत पड़े ये महादानी हाजिर हो जाते हैं और बड़ी उत्सुकता के साथ अपना ब्लड डोनेट करते हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपने ऊपर आई समस्याओं से सीख लेकर रक्तदान शुरू किया तो किसी ने दूसरों से प्रेरणा ली।
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अपना खून देकर सिर्फ लोगों की जिंदगी बचाना ही नहीं, दूसरों को रक्तदान के लिए जागरूक करने का काम भी ये महादानी पूरी तन्मयता से कर रहे हैं। ऐसे ही कुछ लोगों ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी बात रखी।
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गढ़ीखास निवासी शिवशरण सिंह अब तक करीब 36 बार रक्तदान कर चुके हैं। वे बताते हैं कि एक बार उनके छोटे भाई की तबियत खराब थी। उसे खून की जरूरत थी, लेकिन कोई डोनर नहीं मिल रहा था।

जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उन्होंने पहली बार अपने भाई को अपना खून देकर जान बचाई। खून की कमी से कहीं किसी की जान न चली जाए, इसलिए वे लगातार ब्लड डोनेट करते आ रहे हैं। वहीं, करीब 10 बार ब्लड डोनेट कर चुके हनुमंत पुरम के रहने वाले दिलीप कुमार पटेल ने रक्तदान को महादान बताया। कहा कि रक्तदान करने वाला किसी डॉक्टर से कम नहीं होता।

 

क्योंकि डॉक्टर इलाज करके लोगों की जान बचाता है, तो वहीं रक्तदाता अपने शरीर का खून देकर रोगी को नई जिंदगी देता है। सभी को रक्तदान करना चाहिए। इससे शरीर या स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। 

छोटी बाजार निवासी अजय कक्कड़ का कहना है कि लोगों को खाना खिलाने, कंबल बांटने और पानी पिलाने से कहीं ज्यादा पुण्य रक्तदान करने से मिलता है। इसके लिए सभी को जागरुक होने की जरूरत है। हर किसी को रक्तदान करके पुण्य कमाना चाहिए। जिले में ऐसे लोगों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है, बावजूद इसके लोगों को अभी और जागरुक होने की आवश्यकता है। 



शहर के गौरा कोठी के राहुल करीब चार बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं। दो बार तो अपने जान पहचान वालों को जरूरत पड़ी तो ब्लड दिया, जबकि दो बार जिला अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद रोगियों को खून देकर उनकी जान बचाई। इनका कहना है कि रक्तदान से बढ़ा पुण्य कोई नहीं। कुछ लोगों की सोंच है कि रक्तदान से शरीर कमजोर हो जाता है, लेकिन ये सिर्फ गलतफहमी है। सभी को रक्तदान करना चाहिए।
 

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