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टैक्स जमा करने पर अब अलॉट होगा मकान नंबर
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रायबरेली। शहर में नया मकान बनाने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। अब नए मकान का नंबर तभी पालिका अलॉट करेगी, जब टैक्स जमा करेंगे। बिना टैक्स के उनका कार्य नहीं हो सकेगा।
टैक्स जमा कराने के लिए पालिका के अफसरों की ओर से नया फंडा अपनाया गया है। अब देखना ये है कि पालिका की सख्ती के बाद लोग टैक्स जमा करते हैं कि नहीं।
दरअसल, नगर पालिका की ओर से स्वकर प्रणाली शुरू कर दी गई है। इसका मतलब है कि नागरिक स्वयं अपने घर का हाऊस, वाटर और सीवर टैक्स जमा पालिका में जमा करेंगे।
पहले होता था कि पालिका के कर्मचारी घरों में जाकर टैक्स वसूलते थे। स्वकर प्रणाली तो शुरू कर दी गई है, लेकिन टैक्स जमा करने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं।
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पालिका ने नए मकान बनवाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ाते हुए शर्त रख दी है कि पहले टैक्स जमा करो, फिर इसके बाद नए मकान का नंबर एलाट किया जाएगा। शहर में दो साल में करीब पांच हजार नए मकान बने हैं।
घरों में बांटे गए फार्म, एलाट किए गए नए नंबर
स्वकर प्रणाली के तहत पालिका के कर्मियों की ओर से 34 वार्डों में रहने वाले लोगों के घरों में फार्म बांट दिए गए हैं। इन फार्मों में ही लोगों को लिखकर देना होगा कि उनके घर का टैक्स कितना हुआ है।
इसी के हिसाब से उन्हें टैक्स जमा करना होगा। पहले शहर में 31 वार्ड थे। अब वार्डों की संख्या 34 हो गई है। करीब ढाई लाख आबादी शहर क्षेत्र में रहती है, जबकि करीब 40 हजार मकान हैं। अब तक 25 हजार मकानों को नए नंबर एलाट कर दिए गए हैैं।
असमंजस में लोग, जमा नहीं कर पा रहे टैक्स
दरअसल वर्ष 2008 के बाद नगर पालिका में नया टैक्स लगाते हुए स्वकर प्रणाली लागू कर दी गई। वर्ष 2008 में जिन लोगों का घर दो कमरे का था, अब उन लोगों ने बड़ा मकान बनाते हुए दो या फिर तीन मंजिला मकान बना लिया है। एरिया के हिसाब से हाऊस टैक्स जमा करने का नियम है।
अब एरिया बढ़ गया है तो लोगों को अधिक टैक्स जमा करना है। अधिक टैक्स जमा करने की बारी आई तो अब लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
करीब दो करोड़ रुपया बकाया
हाऊस, सीवर, वाटर टैक्स मिलाकर करीब दो करोड़ का टैक्स बकाया है। टैक्स वसूलने के लिए पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके टैक्स शत प्रतिशत जमा नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द कर्मचारियों को घरों पर भेजकर लोगों से टैक्स जमा कराने के लिए कहा जाएगा।
टैक्स जमा हो तो हो शहर का विकास
अधिकारियों का मानना है कि टैक्स जमा कराने के पीछे की मंसा विकास कराने की भी है। यदि टैक्स जमा होगा तो शहर के मोहल्लों में और विकास कार्य कराए जा सकेंगे। पालिका का खजाना खाली होगा तो विकास कार्य कैसे हो सकते हैं। इसलिए टैक्स जमा कराने के लिए स्वकर प्रणाली लागू की गई है, लेकिन इसको लेकर नागरिक गंभीर नहीं हैं। बड़े होटल, रेस्टोरेंट तक टैक्स जमा कराने में फिसड्डी हैं।
शत प्रतिशत टैक्स जमा कराने के लिए शहर में स्वकर प्रणाली लागू की गई है। इसके लिए नागरिकों के घरों में फार्म का वितरण करा दिया गया है। बावजूद इसके लोग ैक्स जमा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। नए मकान का नंबर तभी एलाट किया जाएगा, जब गृहस्वामी टैक्स पहले जमा करेंगे।
गिरीश बहादुर सिंह, कार्यवाहक ईओ
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टैक्स जमा कराने के लिए पालिका के अफसरों की ओर से नया फंडा अपनाया गया है। अब देखना ये है कि पालिका की सख्ती के बाद लोग टैक्स जमा करते हैं कि नहीं।
दरअसल, नगर पालिका की ओर से स्वकर प्रणाली शुरू कर दी गई है। इसका मतलब है कि नागरिक स्वयं अपने घर का हाऊस, वाटर और सीवर टैक्स जमा पालिका में जमा करेंगे।
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पहले होता था कि पालिका के कर्मचारी घरों में जाकर टैक्स वसूलते थे। स्वकर प्रणाली तो शुरू कर दी गई है, लेकिन टैक्स जमा करने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं।
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पालिका ने नए मकान बनवाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ाते हुए शर्त रख दी है कि पहले टैक्स जमा करो, फिर इसके बाद नए मकान का नंबर एलाट किया जाएगा। शहर में दो साल में करीब पांच हजार नए मकान बने हैं।
घरों में बांटे गए फार्म, एलाट किए गए नए नंबर
स्वकर प्रणाली के तहत पालिका के कर्मियों की ओर से 34 वार्डों में रहने वाले लोगों के घरों में फार्म बांट दिए गए हैं। इन फार्मों में ही लोगों को लिखकर देना होगा कि उनके घर का टैक्स कितना हुआ है।
इसी के हिसाब से उन्हें टैक्स जमा करना होगा। पहले शहर में 31 वार्ड थे। अब वार्डों की संख्या 34 हो गई है। करीब ढाई लाख आबादी शहर क्षेत्र में रहती है, जबकि करीब 40 हजार मकान हैं। अब तक 25 हजार मकानों को नए नंबर एलाट कर दिए गए हैैं।
असमंजस में लोग, जमा नहीं कर पा रहे टैक्स
दरअसल वर्ष 2008 के बाद नगर पालिका में नया टैक्स लगाते हुए स्वकर प्रणाली लागू कर दी गई। वर्ष 2008 में जिन लोगों का घर दो कमरे का था, अब उन लोगों ने बड़ा मकान बनाते हुए दो या फिर तीन मंजिला मकान बना लिया है। एरिया के हिसाब से हाऊस टैक्स जमा करने का नियम है।
अब एरिया बढ़ गया है तो लोगों को अधिक टैक्स जमा करना है। अधिक टैक्स जमा करने की बारी आई तो अब लोग टैक्स जमा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
करीब दो करोड़ रुपया बकाया
हाऊस, सीवर, वाटर टैक्स मिलाकर करीब दो करोड़ का टैक्स बकाया है। टैक्स वसूलने के लिए पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके टैक्स शत प्रतिशत जमा नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द कर्मचारियों को घरों पर भेजकर लोगों से टैक्स जमा कराने के लिए कहा जाएगा।
टैक्स जमा हो तो हो शहर का विकास
अधिकारियों का मानना है कि टैक्स जमा कराने के पीछे की मंसा विकास कराने की भी है। यदि टैक्स जमा होगा तो शहर के मोहल्लों में और विकास कार्य कराए जा सकेंगे। पालिका का खजाना खाली होगा तो विकास कार्य कैसे हो सकते हैं। इसलिए टैक्स जमा कराने के लिए स्वकर प्रणाली लागू की गई है, लेकिन इसको लेकर नागरिक गंभीर नहीं हैं। बड़े होटल, रेस्टोरेंट तक टैक्स जमा कराने में फिसड्डी हैं।
शत प्रतिशत टैक्स जमा कराने के लिए शहर में स्वकर प्रणाली लागू की गई है। इसके लिए नागरिकों के घरों में फार्म का वितरण करा दिया गया है। बावजूद इसके लोग ैक्स जमा करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। नए मकान का नंबर तभी एलाट किया जाएगा, जब गृहस्वामी टैक्स पहले जमा करेंगे।
गिरीश बहादुर सिंह, कार्यवाहक ईओ