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रायबरेली-टांडा नेशनल हाईवे पर बने ओवरब्रिज में आई दरार, दो साल पहले ही 40 करोड़ से बना था
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मलिकमऊ के निकट बने ओवरब्रिज में आई दरार।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। जिले से होकर निकले सुल्तानपुर वाया टांडा नेशनल हाईवे पर मलिकमऊ के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बना ओवरब्रिज दो साल में ही दरक गया।
करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में शनिवार को अचानक बड़ी दरार आने से हड़कंप मच गया। ओवरब्रिज से आवागमन ठप हो गया है।
इस मार्ग से अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या व टांडा के अलावा आसपास के कस्बे के लोग आते-जाते हैं। दरार आने से पुल से एहतियात के तौर पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
मामले की जानकारी होते ही जिला प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच के लिए लखनऊ से टीम बुलाई गई है।
636 करोड़ रुपये से बनकर तैयार हुए हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण में धन की बंदरबांट के आरोप लग रहे हैं। इसमें से करीब 40 करोड़ रुपये ओवरब्रिज के निर्माण पर खर्च हुए थे। 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस ओवरब्रिज का लोकार्पण किया था।
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रायबरेली-सुल्तानपुर वाया टांडा 162 किलोमीटर के इस हाईवे से प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा लोगों का आवागमन होता है। इसमें छोटे और भारी वाहन चलते हैं।
हाईवे का निर्माण दिसंबर 2019 में पूरा हुआ था। इसके बाद से कोई मेंटेनेंस कार्य नहीं कराया गया। शनिवार को ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में अचानक दरार मोटी दरार आने की जानकारी होने पर हड़कंप मच गया।
सूचना मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट पल्लवी मिश्रा, सीओ सदर वंदना सिंह के अलावा एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ओवरब्रिज के दोनों तरफ बैरीकेडिंग करके हाईवे से निकल रहे वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई।
ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आने से अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, टांडा समेत आसपास कस्बों और गांवों को आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किस वजह से दरार आई, इसकी जांच के लिए लखनऊ से टीम बुलाई गई।
कई जिले के लोगों का आवागमन प्रभावित
ओवरब्रिज में दरार आने से कई जिले के लोगों को असुविधा हो रही है। इस हाईवे से अमेठी, जायस, गौरीगंज, सुल्तानपुर, टांडा जाने वाले वाले मुसाफिरों के लिए समस्या खड़ी हो गई है। ओवरब्रिज में दरार आने से अब वाहन को निकालने के लिए डायवर्जन किया जा रहा है।
तीन साल में ही वियरिंग खराब
ओवरब्रिज निर्माण के दौरान लगाए जाने वाले गार्डर के नीचे वियरिंग लगाई जाती है। इस वियरिंग की समय सीमा 25 से 30 साल होती है, लेकिन तीन साल के अंदर वियरिंग खराब होने से साफ जाहिर है कि निर्माण के दौरान मनमानी की गई है। यदि उसी समय इन तकनीकी खामियां की बारीकी से जांच होती तो यह नौबत न आती। इस पूरी मनमानी में कार्यदायी एजेंसी के लिए एनएचएआई के अफसर भी जिम्मेदार हैं।
कई दिनों से फर्राटा भर रहे थे वाहन
ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में एक साथ दरार नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज में कई दिनों से दरार थी, जो वाहनों के आवागमन से धीरे-धीरे बढ़ती चली गई। इस दौरान भी वाहन फर्राटा भरते रहे, लेकिन एनएचएआई के अफसरों को इसकी खबर नहीं लगी। गनीमत रही कि समय से इसकी जानकारी प्रशासन को गई नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी होने पर वाहनों का आवागमन रोका।
कितनी टन की लगी वियरिंग, अफसर अनजान
ओवरब्रिज में गार्डर के नीचे लगने वाली वियरिंग की अलग-अलग क्षमता होती है, लेकिन रायबरेली-टांडा हाईवे पर जिस एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आई है, उस जगह कितनी क्षमता की वियरिंग लगाई गई है। इसकी जानकारी एनचएआई के अफसरों को नहीं है। इससे साफ अंदाजा लगाया जाता है कि ओवरब्रिज निर्माण के दौरान अफसर कितना फिक्रमंद रहते हैं। वैसे ओवरब्रिज में 143 टन से 184 टन के बीच वियरिंग लगाई जाती है।
10 दिन तक प्रभावित रहेगा आवागमन
रायबरेली-सुल्तानपुर वाया टांडा हाईवे पर बने ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आई है। इसी ज्वाइंट की जगह नीचे गार्डर को रखने से पहले वियरिंग लगाई जाती है। आशंका है कि वियरिंग खराब हुई है। इस वजह से दोनों गार्डर के बीच गैप हुआ है। आवागमन रोककर ओवरब्रिज को दुरुस्त कराया जाएगा। ओवरब्रिज से आवागमन दोबारा शुरू होने में 10 दिन लग सकते हैं।
-योगेश कुमार, उप प्रबंधक, एनएचएआई, रायबरेली
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करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में शनिवार को अचानक बड़ी दरार आने से हड़कंप मच गया। ओवरब्रिज से आवागमन ठप हो गया है।
इस मार्ग से अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या व टांडा के अलावा आसपास के कस्बे के लोग आते-जाते हैं। दरार आने से पुल से एहतियात के तौर पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
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मामले की जानकारी होते ही जिला प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच के लिए लखनऊ से टीम बुलाई गई है।
636 करोड़ रुपये से बनकर तैयार हुए हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण में धन की बंदरबांट के आरोप लग रहे हैं। इसमें से करीब 40 करोड़ रुपये ओवरब्रिज के निर्माण पर खर्च हुए थे। 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस ओवरब्रिज का लोकार्पण किया था।
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रायबरेली-सुल्तानपुर वाया टांडा 162 किलोमीटर के इस हाईवे से प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा लोगों का आवागमन होता है। इसमें छोटे और भारी वाहन चलते हैं।
हाईवे का निर्माण दिसंबर 2019 में पूरा हुआ था। इसके बाद से कोई मेंटेनेंस कार्य नहीं कराया गया। शनिवार को ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में अचानक दरार मोटी दरार आने की जानकारी होने पर हड़कंप मच गया।
सूचना मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट पल्लवी मिश्रा, सीओ सदर वंदना सिंह के अलावा एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ओवरब्रिज के दोनों तरफ बैरीकेडिंग करके हाईवे से निकल रहे वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई।
ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आने से अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, टांडा समेत आसपास कस्बों और गांवों को आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किस वजह से दरार आई, इसकी जांच के लिए लखनऊ से टीम बुलाई गई।
कई जिले के लोगों का आवागमन प्रभावित
ओवरब्रिज में दरार आने से कई जिले के लोगों को असुविधा हो रही है। इस हाईवे से अमेठी, जायस, गौरीगंज, सुल्तानपुर, टांडा जाने वाले वाले मुसाफिरों के लिए समस्या खड़ी हो गई है। ओवरब्रिज में दरार आने से अब वाहन को निकालने के लिए डायवर्जन किया जा रहा है।
तीन साल में ही वियरिंग खराब
ओवरब्रिज निर्माण के दौरान लगाए जाने वाले गार्डर के नीचे वियरिंग लगाई जाती है। इस वियरिंग की समय सीमा 25 से 30 साल होती है, लेकिन तीन साल के अंदर वियरिंग खराब होने से साफ जाहिर है कि निर्माण के दौरान मनमानी की गई है। यदि उसी समय इन तकनीकी खामियां की बारीकी से जांच होती तो यह नौबत न आती। इस पूरी मनमानी में कार्यदायी एजेंसी के लिए एनएचएआई के अफसर भी जिम्मेदार हैं।
कई दिनों से फर्राटा भर रहे थे वाहन
ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में एक साथ दरार नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज में कई दिनों से दरार थी, जो वाहनों के आवागमन से धीरे-धीरे बढ़ती चली गई। इस दौरान भी वाहन फर्राटा भरते रहे, लेकिन एनएचएआई के अफसरों को इसकी खबर नहीं लगी। गनीमत रही कि समय से इसकी जानकारी प्रशासन को गई नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी होने पर वाहनों का आवागमन रोका।
कितनी टन की लगी वियरिंग, अफसर अनजान
ओवरब्रिज में गार्डर के नीचे लगने वाली वियरिंग की अलग-अलग क्षमता होती है, लेकिन रायबरेली-टांडा हाईवे पर जिस एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आई है, उस जगह कितनी क्षमता की वियरिंग लगाई गई है। इसकी जानकारी एनचएआई के अफसरों को नहीं है। इससे साफ अंदाजा लगाया जाता है कि ओवरब्रिज निर्माण के दौरान अफसर कितना फिक्रमंद रहते हैं। वैसे ओवरब्रिज में 143 टन से 184 टन के बीच वियरिंग लगाई जाती है।
10 दिन तक प्रभावित रहेगा आवागमन
रायबरेली-सुल्तानपुर वाया टांडा हाईवे पर बने ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आई है। इसी ज्वाइंट की जगह नीचे गार्डर को रखने से पहले वियरिंग लगाई जाती है। आशंका है कि वियरिंग खराब हुई है। इस वजह से दोनों गार्डर के बीच गैप हुआ है। आवागमन रोककर ओवरब्रिज को दुरुस्त कराया जाएगा। ओवरब्रिज से आवागमन दोबारा शुरू होने में 10 दिन लग सकते हैं।
-योगेश कुमार, उप प्रबंधक, एनएचएआई, रायबरेली