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बस कागजों में सिमटकर रह गई 80 तालाबों की पहचान
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सीन एक
पाटकर बना लिए मकान
शहर क्षेत्र के नया पुरवा मोहल्ला स्थित तालाब के काफी हिस्से की जमीन को पाटकर मकान बना लिए गए हैं। शेष तालाब की जमीन को भी धीरे-धीरे पाटकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद अफसरों की नजर नहीं पड़ी। रतापुर के पास सरकारी तालाब था, जिसे पाट दिया गया। यहां बिल्डिंग खड़ी हो गई। तालाब को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया।
सीन दो
तालाब पर भूमाफिया की नजर
शहर क्षेत्र के सर्वोदय नगर स्थित तालाब पर भी भूमाफिया की नजर है। तालाब की काफी हिस्से की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। शेष तालाब की जमीन पर भी धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है। देवानंदपुर में तो तालाब पाटकर उसका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। तालाब पर कब्जा होता रहा, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजतन तालाब को पाट दिया गया।
चारों तरफ से पट गया
शहर क्षेत्र के सोनिया नगर स्थित तालाब का अब कुछ ही हिस्सा शेष रह गया है। बाकी हिस्से को पीटकर लोगों ने मकान बना लिए हैं। लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित एफसीआई गोदाम के पास स्थित तालाब का भी कुछ हिस्सा कब्जा लिया गया है। त्रिपुला के पास शंकरगढ़ स्थित तालाब का भी अस्तित्व खतरे में है।
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रायबरेली। शहर में तालाबों पर कॉलोनियां बस गईं हैं। सरकारी आंकड़ों में 138 तालाब दर्ज हैं, लेकिन इसमें से करीब 80 तालाबों की पहचान अब कागजों तक ही सीमित रह गई है।
इन तालाबों को पाटकर मकान बना लिए गए हैैं। शेष 59 तालाबों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। हाल ये है कि राजस्व कर्मियों और भूमाफिया के गठजोड़ के चलते तालाबों की जमीन पर कब्जा कर लिया गया।
कुछ भू्माफिया ने तो तालाबों की जमीन को ही अपनी बताकर औने-पौने दाम में बेच लिया। इन तालाबों के पाट दिए जाने के कारण बरसात के दौरान शहर क्षेत्र की ढाई लाख आबादी को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है।
बारिश का पानी तालाबों में जाता था, लेकिन अब बारिश का पानी सड़कों के साथ लोगों के घरों में घुस जाता था। पानी का जलस्तर बढ़ाने में भी तालाब सहायक होते थे, लेकिन इन तालाबों के पाट दिए जाने से पानी का जलस्तर बढ़ाने में भी मदद नहीं मिल पा रही है।
अब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं। इससे राजस्व कर्मियों और भूमाफिया में हड़कंप मचा है।
शासन का आदेश आने पर शहर क्षेत्र के तालाबों को चिह्नित कराने का काम किया जा रहा है। चिह्नित करने के बाद वह अपनी रिपोर्ट राजस्व विभाग को देंगे। राजस्व विभाग की तरफ से ही तालाबों से अवैध कब्जा हटवाया जाएगा।
डॉ.आशीष कुमार सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद, रायबरेली
शहर क्षेत्र में जितने भी सरकारी तालाब हैं, उन सभी की रिपोर्ट मंगाई गई हैं। रिपोर्ट आने के बाद जिन तालाबों में अवैध कब्जा किया गया है, उसे हटवा दिया जाएगा। साथ ही अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी कराई जाएगी।
आरके शुक्ला, एसडीएम सदर
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पाटकर बना लिए मकान
शहर क्षेत्र के नया पुरवा मोहल्ला स्थित तालाब के काफी हिस्से की जमीन को पाटकर मकान बना लिए गए हैं। शेष तालाब की जमीन को भी धीरे-धीरे पाटकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद अफसरों की नजर नहीं पड़ी। रतापुर के पास सरकारी तालाब था, जिसे पाट दिया गया। यहां बिल्डिंग खड़ी हो गई। तालाब को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया।
सीन दो
तालाब पर भूमाफिया की नजर
शहर क्षेत्र के सर्वोदय नगर स्थित तालाब पर भी भूमाफिया की नजर है। तालाब की काफी हिस्से की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। शेष तालाब की जमीन पर भी धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है। देवानंदपुर में तो तालाब पाटकर उसका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। तालाब पर कब्जा होता रहा, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजतन तालाब को पाट दिया गया।
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चारों तरफ से पट गया
शहर क्षेत्र के सोनिया नगर स्थित तालाब का अब कुछ ही हिस्सा शेष रह गया है। बाकी हिस्से को पीटकर लोगों ने मकान बना लिए हैं। लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित एफसीआई गोदाम के पास स्थित तालाब का भी कुछ हिस्सा कब्जा लिया गया है। त्रिपुला के पास शंकरगढ़ स्थित तालाब का भी अस्तित्व खतरे में है।
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रायबरेली। शहर में तालाबों पर कॉलोनियां बस गईं हैं। सरकारी आंकड़ों में 138 तालाब दर्ज हैं, लेकिन इसमें से करीब 80 तालाबों की पहचान अब कागजों तक ही सीमित रह गई है।
इन तालाबों को पाटकर मकान बना लिए गए हैैं। शेष 59 तालाबों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। हाल ये है कि राजस्व कर्मियों और भूमाफिया के गठजोड़ के चलते तालाबों की जमीन पर कब्जा कर लिया गया।
कुछ भू्माफिया ने तो तालाबों की जमीन को ही अपनी बताकर औने-पौने दाम में बेच लिया। इन तालाबों के पाट दिए जाने के कारण बरसात के दौरान शहर क्षेत्र की ढाई लाख आबादी को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है।
बारिश का पानी तालाबों में जाता था, लेकिन अब बारिश का पानी सड़कों के साथ लोगों के घरों में घुस जाता था। पानी का जलस्तर बढ़ाने में भी तालाब सहायक होते थे, लेकिन इन तालाबों के पाट दिए जाने से पानी का जलस्तर बढ़ाने में भी मदद नहीं मिल पा रही है।
अब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं। इससे राजस्व कर्मियों और भूमाफिया में हड़कंप मचा है।
शासन का आदेश आने पर शहर क्षेत्र के तालाबों को चिह्नित कराने का काम किया जा रहा है। चिह्नित करने के बाद वह अपनी रिपोर्ट राजस्व विभाग को देंगे। राजस्व विभाग की तरफ से ही तालाबों से अवैध कब्जा हटवाया जाएगा।
डॉ.आशीष कुमार सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद, रायबरेली
शहर क्षेत्र में जितने भी सरकारी तालाब हैं, उन सभी की रिपोर्ट मंगाई गई हैं। रिपोर्ट आने के बाद जिन तालाबों में अवैध कब्जा किया गया है, उसे हटवा दिया जाएगा। साथ ही अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी कराई जाएगी।
आरके शुक्ला, एसडीएम सदर