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श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:20 PM IST
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रायबरेली में मंगलवार को गंगा स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मंगलवार को गंगातट पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। डलमऊ, ऊंचाहार, गेगासों, रालपुर के गंगाघाटों पर लोगों ने पहुंचकर स्नान किया। वहीं पूजा-अर्चना के बाद दान देकर सुख समृद्धि का वरदान मांगा। इस दौरान गंगा मइया के जयकारे भी गूंजते रहे।
जिले में गंगा घाटों पर तड़के से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। ऊंचाहार क्षेत्र में गोकना घाट, गोला घाट, बादशाह घाट, तीर का पुरवा घाट में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। सरेनी क्षेत्र के गेगासों, रालपुर घाट पर लोगों ने स्नान किया।
यहां पर रायबरेली के अलावा फतेहपुर जिले से लोग पहुंचे। गंगा स्नान के बाद लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की। डलमऊ प्रतिनिधि के अनुसार किलाघाट, सड़क घाट, रानी शिवालाघाट, पक्का घाट, पथवारीघाट, संकट मोचनघाट, शुक्ल घाट, महाबीरन घाट, बड़ा मठ घाट, तराई घाट आदि में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना की।
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एसडीएम राम अक्षयबर पुलिस बल के साथ घाटों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त बनाने में लगे रहे। नगर पंचायत की ओर से घाटों के आसपास साफ-सफाई नहीं होने से श्रद्धालुओं में आक्रोश रहा।
इस दौरान कोई सवारी गाड़ी तो कोई निजी वाहन, साइकिल और मोटरसाइकिल से स्नान के लिए पहुंचे। स्नान के बाद पंडा और पुरोहितों को अनाज, धन, कपड़ा आदि का दान किया। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
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जिले में गंगा घाटों पर तड़के से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। ऊंचाहार क्षेत्र में गोकना घाट, गोला घाट, बादशाह घाट, तीर का पुरवा घाट में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। सरेनी क्षेत्र के गेगासों, रालपुर घाट पर लोगों ने स्नान किया।
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यहां पर रायबरेली के अलावा फतेहपुर जिले से लोग पहुंचे। गंगा स्नान के बाद लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की। डलमऊ प्रतिनिधि के अनुसार किलाघाट, सड़क घाट, रानी शिवालाघाट, पक्का घाट, पथवारीघाट, संकट मोचनघाट, शुक्ल घाट, महाबीरन घाट, बड़ा मठ घाट, तराई घाट आदि में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना की।
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एसडीएम राम अक्षयबर पुलिस बल के साथ घाटों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त बनाने में लगे रहे। नगर पंचायत की ओर से घाटों के आसपास साफ-सफाई नहीं होने से श्रद्धालुओं में आक्रोश रहा।
इस दौरान कोई सवारी गाड़ी तो कोई निजी वाहन, साइकिल और मोटरसाइकिल से स्नान के लिए पहुंचे। स्नान के बाद पंडा और पुरोहितों को अनाज, धन, कपड़ा आदि का दान किया। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।