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3.90 करोड़ से सई नदी के किनारों की बदलेगी सूरत
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रायबरेली। जिले के छह ब्लॉक क्षेत्रों से निकली सई नदी को संरक्षित करने के लिए मनरेगा से कार्ययोजना तैयार हो गई है। नदी के किनारे की सूरत को बदलने में मनरेगा से 3.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
63 तालाबों में काम होने के साथ ही 60 नाले बनाए जाएंगे। नदी के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए 71 बांध बनेंगे। 76 स्थलों पर पौधरोपण की योजना है। जल्द ही मनरेगा से काम शुरू होगा।
प्रदेश में मनरेगा से नदियों के संरक्षण का काम भी हो रहा है। सई नदी राही, सतांव, हरचंदपुर, डीह, बछरावां व सलोन से गुजरती है।
शासन स्तर से दो साल पहले ही नदी को संरक्षित करने के लिए मनरेगा से काम कराने के लिए पत्र आया था, लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका। दो साल बीतने के बाद विभाग नदी को संरक्षित कराने के लिए जुट गया है।
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काम कराने के लिए कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है। बछरावां में पस्तौर, इचौली, नींवा, मैनाहार कटरा सहित सात स्थानों पर सई के किनारे तालाब बनाए जाएंगे।
तीन स्थलों पर नाले बनेंगे। राही में 23 तालाब सई के किनारे बनाए जाएंगे। इसी तरह हरचंदपुर, सतांव व अन्य ब्लॉक क्षेत्र में भी सई के किनारे काम किया जाएगा।
सभी छह ब्लॉकों में सई नदी के किनारे 63 तालाब, 60 कच्चे नाले, और 71 बांध मनरेगा से बनवाए जाएंगे। पौधरोपण भी किनारों के कटाने को रोकने के लिए 76 स्थलों पर होगा। डीह में सादीपुर कोटवा, कचनावां, गड़वा, घीसीगढ़, अहल, गोपालपुर और निगोही में बंधे बनाए जाएंगे।
हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र में 17 स्थलों पर छोटे-बड़े बंधे बनाए जाएंगे। हरचंदपुर में सई के किनारे 14 तालाबों को जीवनदान मिलेगा। इसी तरह सभी ब्लॉकों की कार्ययोजना तैयार हो गई है। जल्द ही सई के किनारों को संवारने का काम शुरू हो जाएगा।
सई नदी को संवारने के लिए सभी छह ब्लॉकों की कार्ययोजना तैयार हो गई है। सई के किनारे 63 तालाब, 60 कच्चे नाले, और 71 बांध मनरेगा से बनवाए जाएंगे। 76 स्थलों पर पौधरोपण होगा। इस काम में मनरेगा से 3.90 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च की जाएगी।
जीपी कुशवाहा, उपायुक्त (मनरेगा)
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63 तालाबों में काम होने के साथ ही 60 नाले बनाए जाएंगे। नदी के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए 71 बांध बनेंगे। 76 स्थलों पर पौधरोपण की योजना है। जल्द ही मनरेगा से काम शुरू होगा।
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प्रदेश में मनरेगा से नदियों के संरक्षण का काम भी हो रहा है। सई नदी राही, सतांव, हरचंदपुर, डीह, बछरावां व सलोन से गुजरती है।
शासन स्तर से दो साल पहले ही नदी को संरक्षित करने के लिए मनरेगा से काम कराने के लिए पत्र आया था, लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका। दो साल बीतने के बाद विभाग नदी को संरक्षित कराने के लिए जुट गया है।
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काम कराने के लिए कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है। बछरावां में पस्तौर, इचौली, नींवा, मैनाहार कटरा सहित सात स्थानों पर सई के किनारे तालाब बनाए जाएंगे।
तीन स्थलों पर नाले बनेंगे। राही में 23 तालाब सई के किनारे बनाए जाएंगे। इसी तरह हरचंदपुर, सतांव व अन्य ब्लॉक क्षेत्र में भी सई के किनारे काम किया जाएगा।
सभी छह ब्लॉकों में सई नदी के किनारे 63 तालाब, 60 कच्चे नाले, और 71 बांध मनरेगा से बनवाए जाएंगे। पौधरोपण भी किनारों के कटाने को रोकने के लिए 76 स्थलों पर होगा। डीह में सादीपुर कोटवा, कचनावां, गड़वा, घीसीगढ़, अहल, गोपालपुर और निगोही में बंधे बनाए जाएंगे।
हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र में 17 स्थलों पर छोटे-बड़े बंधे बनाए जाएंगे। हरचंदपुर में सई के किनारे 14 तालाबों को जीवनदान मिलेगा। इसी तरह सभी ब्लॉकों की कार्ययोजना तैयार हो गई है। जल्द ही सई के किनारों को संवारने का काम शुरू हो जाएगा।
सई नदी को संवारने के लिए सभी छह ब्लॉकों की कार्ययोजना तैयार हो गई है। सई के किनारे 63 तालाब, 60 कच्चे नाले, और 71 बांध मनरेगा से बनवाए जाएंगे। 76 स्थलों पर पौधरोपण होगा। इस काम में मनरेगा से 3.90 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च की जाएगी।
जीपी कुशवाहा, उपायुक्त (मनरेगा)