{"_id":"62507358cc3f272af342b8bd","slug":"court-raibaraily-news-lko625235390","type":"story","status":"publish","title_hn":"फतेहपुर के सिपाही की हत्या के प्रयास में चार भाइयों को सात-सात वर्ष की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फतेहपुर के सिपाही की हत्या के प्रयास में चार भाइयों को सात-सात वर्ष की सजा
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रायबरेली। अपर सत्र न्यायाधीश श्वेेता श्रीवास्तव ने शुक्रवार को लालगंज कोतवाली क्षेत्र से जुड़े करीब 13 साल पुराने हत्या की कोशिश के एक मुकदमे की सुनवाई पूरी की।
दोष सिद्ध होने पर चार भाइयों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिन युवक की हत्या का प्रयास किया गया था, वह फतेहपुर जिले के धाता थाने में बतौर कांस्टेबल तैनात था और अपनी बहन की ससुराल आया था।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) दिनेश श्रीवास्तव के मुताबिक मामले की रिपोर्ट लालगंज कोतवाली क्षेत्र के बहाई निवासी कमरुज्जमा ने दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार सात जुलाई 2008 की सुबह करीब सात बजे बजे वादी का साला इफ्तिखार अहमद अपने घर के सामने खड़ा था।
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तभी गाली-गलौज करते हुए उसे गांव के ही शानू, रुकसार व शम्मू ने लाठी-डंडों से मारा और शानू ने पेट में भाला मार दिया। चोटिल इफ्तिखार को लालगंज अस्पताल ले गए, जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर किया गया था।
इफ्तिखार फतेहपुर जिले के धाता थाने में बतौर कांस्टेबल तैनात था। पुलिस ने विवेचना के बाद शानू उर्फ मो. इरफान, रुकसार, शम्मू उर्फ शमशाद व फुरकान के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
अदालत ने दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर चारों भाइयों को सजा सुनाई। कोर्ट ने अर्थदंड जमा होने पर 80 फीसदी राशि वादी को देने का भी आदेश दिया है।
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दोष सिद्ध होने पर चार भाइयों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिन युवक की हत्या का प्रयास किया गया था, वह फतेहपुर जिले के धाता थाने में बतौर कांस्टेबल तैनात था और अपनी बहन की ससुराल आया था।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) दिनेश श्रीवास्तव के मुताबिक मामले की रिपोर्ट लालगंज कोतवाली क्षेत्र के बहाई निवासी कमरुज्जमा ने दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार सात जुलाई 2008 की सुबह करीब सात बजे बजे वादी का साला इफ्तिखार अहमद अपने घर के सामने खड़ा था।
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तभी गाली-गलौज करते हुए उसे गांव के ही शानू, रुकसार व शम्मू ने लाठी-डंडों से मारा और शानू ने पेट में भाला मार दिया। चोटिल इफ्तिखार को लालगंज अस्पताल ले गए, जहां से उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर किया गया था।
इफ्तिखार फतेहपुर जिले के धाता थाने में बतौर कांस्टेबल तैनात था। पुलिस ने विवेचना के बाद शानू उर्फ मो. इरफान, रुकसार, शम्मू उर्फ शमशाद व फुरकान के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।
अदालत ने दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर चारों भाइयों को सजा सुनाई। कोर्ट ने अर्थदंड जमा होने पर 80 फीसदी राशि वादी को देने का भी आदेश दिया है।