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नहाय खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय छठ महापर्व
रायबरेली
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:12 PM IST
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रायबरेली में शुक्रवार को छठ पूजा पर चूल्हा बनाती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व डाला छठ शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। चार दिन तक चलने वाले इस पर्व में पूर्वांचल और बिहार प्रांत से जुड़े परिवारों में उल्लास का माहौल है।
सुबह महिलाओं ने पूजा स्थल और घर-आंगन को शुद्ध किया। इसके बाद कद्दू भात (चावल) खाया। इस दौरान बाजार में भी रौनक छा गई। महिलाओं ने फल, पूजन सामग्री आदि की खरीददारी की।
पूर्वांचल और बिहार प्रांत का प्रमुख पर्व डाला छठ का प्रचलन जिले में भी बढ़ गया है। यहां पर करीब तीन हजार परिवार हैं। आईटीआई, कल्लू का पुरवा, शक्तिनगर, इंदिरा नगर, नेहरू नगर, कृष्णा नगर, गांधी नगर, सोनिया नगर, रेलवे कॉलोनी आदि मोहल्लों के अलावा एनटीपीसी में सबसे अधिक पूर्वांचल के परिवार हैं।
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पूजा में सुख समृद्धि का आशीष पाने के लिए शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है। इसलिए पूजा प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे की लकड़ी से लेकर बर्तन सभी को गंगाजल से पवित्र किया गया। इस दौरान महिलाओं ने नए चूल्हे बनाए। वहीं पीतल के बर्तन में पूजन सामग्री बनाई गई।
दिन भर व्रत करने के बाद शाम को लौकी या कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद छका। पूजा को लेकर बाजार में भी रौनक आ गई है। महिलाओं ने बाजार में फल, पूजन सामग्री और चढ़ाने के लिए साड़ी की खरीददारी की।
गांधी नगर की रामरती, सुमन, रेखा, विमला का कहना है कि इसमें 36 तरह के फल लगते हैं। इसके साथ ही महिलाओं ने चावल, गुड़, सब्जी, फल, शुद्ध देशी घी, दूध और सुहाग श्रृंगार का सामान आदि की खरीददारी की।
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सुबह महिलाओं ने पूजा स्थल और घर-आंगन को शुद्ध किया। इसके बाद कद्दू भात (चावल) खाया। इस दौरान बाजार में भी रौनक छा गई। महिलाओं ने फल, पूजन सामग्री आदि की खरीददारी की।
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पूर्वांचल और बिहार प्रांत का प्रमुख पर्व डाला छठ का प्रचलन जिले में भी बढ़ गया है। यहां पर करीब तीन हजार परिवार हैं। आईटीआई, कल्लू का पुरवा, शक्तिनगर, इंदिरा नगर, नेहरू नगर, कृष्णा नगर, गांधी नगर, सोनिया नगर, रेलवे कॉलोनी आदि मोहल्लों के अलावा एनटीपीसी में सबसे अधिक पूर्वांचल के परिवार हैं।
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पूजा में सुख समृद्धि का आशीष पाने के लिए शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है। इसलिए पूजा प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे की लकड़ी से लेकर बर्तन सभी को गंगाजल से पवित्र किया गया। इस दौरान महिलाओं ने नए चूल्हे बनाए। वहीं पीतल के बर्तन में पूजन सामग्री बनाई गई।
दिन भर व्रत करने के बाद शाम को लौकी या कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद छका। पूजा को लेकर बाजार में भी रौनक आ गई है। महिलाओं ने बाजार में फल, पूजन सामग्री और चढ़ाने के लिए साड़ी की खरीददारी की।
गांधी नगर की रामरती, सुमन, रेखा, विमला का कहना है कि इसमें 36 तरह के फल लगते हैं। इसके साथ ही महिलाओं ने चावल, गुड़, सब्जी, फल, शुद्ध देशी घी, दूध और सुहाग श्रृंगार का सामान आदि की खरीददारी की।