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पांच महीने से नहीं भुगतान, उधार के चारे पर निर्भर मवेशी
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गदागंज (रायबरेली)। दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र हमीरमऊ गोशाला में क्षमता से अधिक मवेशी उधार के चारे से अपनी भूख मिटा रहे हैं। मवेशियों के लिए बोया गया हरे चारे की सिंचाई और खाद तक के लिए कोई बजट नहीं मिला है।
इस वजह से उधार लेकर चारा तैयार किया जा रहा है। पांच महीने से इसी तरह जैसे-तैसे व्यवस्था की जा रही है। ग्राम प्रधान ने कई बार ब्लॉक के अधिकारियों से धन मुहैया कराने के लिए कहा, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
इतना ही नही मवेशियों की देखरेख में लगे श्रमिक भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्हें भी पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है।
हमीरमऊ में बनी गोशाला में 150 मवेशी रखने की क्षमता है, लेकिन यहां 185 मवेशी हैं। ग्राम समाज की जमीन पर चार बीघा हरा चारा बोया गया है, लेकिन उसकी सिंचाई और खाद के लिए भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
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ग्राम प्रधान रामलखन यादव ने बताया कि लोगों से उधार रुपये लेकर किसी तरह मवेशियों के चारे की व्यवस्था की जा रही है। पांच महीने का करीब छह लाख रुपये बकाया है। अब तक सरकारी मद से कोई भुगतान नहीं हुआ है।
इसी तरह मवेशियों की देखरेख में लगे चौकीदार राकेश सिंह, रामबरन पाल, शांति देवी, पवन पाल, तेजभान पाल, राम बहादुर वर्मा को पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है।
इस वजह से परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। ग्राम प्रधान ने कहा कि कई बार ब्लॉक के अधिकारियों से धन मुहैया कराने के लिए कहा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बीडीओ हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि मवेशियों के रखरखाव के लिए बजट की मांग की गई है। जैसे ही धन मिलता है ग्राम पंचायत के खाते में भेजा जाएगा।
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इस वजह से उधार लेकर चारा तैयार किया जा रहा है। पांच महीने से इसी तरह जैसे-तैसे व्यवस्था की जा रही है। ग्राम प्रधान ने कई बार ब्लॉक के अधिकारियों से धन मुहैया कराने के लिए कहा, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
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इतना ही नही मवेशियों की देखरेख में लगे श्रमिक भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्हें भी पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है।
हमीरमऊ में बनी गोशाला में 150 मवेशी रखने की क्षमता है, लेकिन यहां 185 मवेशी हैं। ग्राम समाज की जमीन पर चार बीघा हरा चारा बोया गया है, लेकिन उसकी सिंचाई और खाद के लिए भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
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ग्राम प्रधान रामलखन यादव ने बताया कि लोगों से उधार रुपये लेकर किसी तरह मवेशियों के चारे की व्यवस्था की जा रही है। पांच महीने का करीब छह लाख रुपये बकाया है। अब तक सरकारी मद से कोई भुगतान नहीं हुआ है।
इसी तरह मवेशियों की देखरेख में लगे चौकीदार राकेश सिंह, रामबरन पाल, शांति देवी, पवन पाल, तेजभान पाल, राम बहादुर वर्मा को पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है।
इस वजह से परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। ग्राम प्रधान ने कहा कि कई बार ब्लॉक के अधिकारियों से धन मुहैया कराने के लिए कहा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बीडीओ हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि मवेशियों के रखरखाव के लिए बजट की मांग की गई है। जैसे ही धन मिलता है ग्राम पंचायत के खाते में भेजा जाएगा।