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Raebareli News: ऐशबाग माइनर का फिर होगा सीमांकन, संयुक्त टीम करेगी जांच
Sat, 07 Feb 2026 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 07 Feb 2026 12:28 AM IST
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रायबरेली। ऐशबाग माइनर के 91 कब्जेदारों के खिलाफ सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अब नए सिरे से माइनर के सीमांकन के निर्देश दिए गए हैं। कब्जेदारों ने आपत्ति दर्ज कराई है कि गलत तरीके से सीमांकन करके मुकदमा किया गया है। सिंचाई विभाग और सदर तहसील की टीम दोबारा सीमांकन करेगी। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुकदमों में सुनवाई पूरी करके कब्जेदारों के खिलाफ बेदखली और जुर्माने के आदेश दिए जाएंगे।
ऐशबाग माइनर शहर के बीच से होकर निकली है। 1917 में यह माइनर अस्तित्व में आई थी। कभी इस माइनर से जिला जेल में खेती होती थी। माइनर की लंबाई करीब 3.300 किमी और चौड़ाई 18 मीटर है। 30 साल पहले माइनर धरातल से गायब हो गई। कहीं मॉल तो कहीं मकान बन गए। कई जगह नर्सिंगहोम खुले हैं। वर्ष 2017 में जांच के बाद कब्जेदारों को नोटिस दिया गया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में शहर के डिग्री कॉलेज चौराहा पेट्रोल पंप के पास हसनैन खां, सलीम, सूर्यभान, सोनिया नगर में संचालित विवेकानंद व यूनिवर्सल कोचिंग, इंदिरा नगर निवासी अशोक कुमार, रामरतन, क्रांतीपुरी निवासी शिवकुमार, सोनिया नगर निवासी दयाराम, रघुवर दयाल, ज्योति, राकेश, रामनरेश, गंगाबिसुन, शिव प्रसाद, शिलाजीत, नयापुरवा निवासी चांदबाबू, सुबेदार गूजर, कृष्णदेव पाल, हसीना समेत 91 कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान 30 लोग अब तक मुकदमे में हाजिर नहीं हुए। हाजिर हुए कब्जेदारों ने आरोप लगाया कि गलत तरीके से सीमांकन करके मुकदमा किया गया है। उनके निर्माण माइनर से बाहर है। मामले में सिटी मजिस्ट्रेट ने एडीएम को पत्र भेजकर दोबारा सीमांकन कराने का अनुरोध किया है, जिससे अवैध कब्जेदारों पर ही कार्रवाई तय की जा सके। सीमांकन के लिए सदर तहसील और सिंचाई विभाग की टीम बनाई गई है। एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ ने बताया कि ऐशबाग माइनर का सीमांकन दोबारा कराया जाना है। यह काम सदर तहसील और सिंचाई विभाग की टीम करेगी।
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ऐशबाग माइनर शहर के बीच से होकर निकली है। 1917 में यह माइनर अस्तित्व में आई थी। कभी इस माइनर से जिला जेल में खेती होती थी। माइनर की लंबाई करीब 3.300 किमी और चौड़ाई 18 मीटर है। 30 साल पहले माइनर धरातल से गायब हो गई। कहीं मॉल तो कहीं मकान बन गए। कई जगह नर्सिंगहोम खुले हैं। वर्ष 2017 में जांच के बाद कब्जेदारों को नोटिस दिया गया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में शहर के डिग्री कॉलेज चौराहा पेट्रोल पंप के पास हसनैन खां, सलीम, सूर्यभान, सोनिया नगर में संचालित विवेकानंद व यूनिवर्सल कोचिंग, इंदिरा नगर निवासी अशोक कुमार, रामरतन, क्रांतीपुरी निवासी शिवकुमार, सोनिया नगर निवासी दयाराम, रघुवर दयाल, ज्योति, राकेश, रामनरेश, गंगाबिसुन, शिव प्रसाद, शिलाजीत, नयापुरवा निवासी चांदबाबू, सुबेदार गूजर, कृष्णदेव पाल, हसीना समेत 91 कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा किया गया।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान 30 लोग अब तक मुकदमे में हाजिर नहीं हुए। हाजिर हुए कब्जेदारों ने आरोप लगाया कि गलत तरीके से सीमांकन करके मुकदमा किया गया है। उनके निर्माण माइनर से बाहर है। मामले में सिटी मजिस्ट्रेट ने एडीएम को पत्र भेजकर दोबारा सीमांकन कराने का अनुरोध किया है, जिससे अवैध कब्जेदारों पर ही कार्रवाई तय की जा सके। सीमांकन के लिए सदर तहसील और सिंचाई विभाग की टीम बनाई गई है। एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ ने बताया कि ऐशबाग माइनर का सीमांकन दोबारा कराया जाना है। यह काम सदर तहसील और सिंचाई विभाग की टीम करेगी।
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