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आखिर कैसे होगा अपना शहर स्मार्ट, हर तरफ समस्याएं
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Wed, 25 May 2016 11:49 PM IST
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रायबरेली में रोज जाम से जूझते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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स्मार्ट सिटी में जिले को शामिल होने के लिए अफसर से लेकर नेता तक जी जान से लगे हैं। वहीं शहर की दुश्वारियां कुछ और ही बयां कर रही हैं। वीआईपी जिला होने के बावजूद यहां पर हर तरफ बदहाली ही देखने को मिलती है।
निचले स्तर की मूलभूत सुविधाओं और बिजली, पानी, यातायात, सीवर जैसी समस्याएं लोगों के लिए नासूर बने हुए हैं। वहीं तंग गलियों में अवैध कांप्लेक्स बनते जा रहे हैं। पटरियों पर फैले अतिक्रमण का खामियाजा हर दिन लोगों को जाम में फंसकर भुगतना पड़ता है।
ऐसे में शहर को स्मार्ट सिटी बनाने को लेकर इन दुश्वारियों को दूर करने के लिए अफसरों को नाके चने चबाने पड़ेंगे। नगर पालिका में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से खस्ताहाल है। पेयजल आपूर्ति आज भी जर्जर लाइनों के भरोसे है। इसके चलते आए दिन लीकेज की समस्या से जूझना पड़ता है।
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वहीं पानी में फोर्स नहीं होने के कारण मोटर लगाकर किसी लोग काम चला रहे हैं। कई दशक पुरानी पाइप लाइनें जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। इनसे गंदा पानी घरों में पहुंच जाता है। आरडीए की सुस्ती के चलते पिछले कुछ वर्षों में अवैध निर्माण तेजी से हो रहा है।
हालत यह है कि गलियों में भी कांप्लेक्स बनवा दिया गया। इस दौरान पार्किंग की कहीं पर कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते आम से लेकर खास तक को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। स्मार्ट बनने के लिए ट्रैफिककी व्यवस्था बदनुमा दाग है।
कब, कहां पर जाम लग जाए, कोई कह नहीं सकता है। कभी शहर के महत्वपूर्ण चौराहे, तो कभी बाजार में जाम लग जाता है। कहने को ट्रैफिक पुलिस तो रहती है, लेकिन वह भी जाम को देखकर कन्नी काट लेते हैं। कुछ जगह पर डिवाइडर खड़े कर दिए गए, लेकिन सड़क पर अतिक्रमण बढ़ने से यातायात चलता नहीं रेंगता है।
शहर के स्मार्ट बनने के लिए सीवर की व्यवस्था शायद शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है, लेकिन यहां तो अभी इसकी श्रीगणेश नहीं है। सीवर की व्यवस्था बमुश्किल से 20 फीसदी हिस्से में ही है। आज भी लोग निजी टैंक बनवाकर किसी तरह काम चला रहे हैं।
यहीं नहीं जो सीवर लाइन पड़ी है, उनकी क्षमता कम होने के कारण आए दिन चोक हो रही हैं। नतीजतन लोगों को सीवर की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे है। यहां पर बिजली तो मिल रही है, लेकिन उपयोग नहीं हो पा रहा है।
इसकी वजह लो-वोल्टेज की समस्या है। जर्जर पोल और तार इसके सबसे बड़े कारक हैं। शहर में बिजली आपूर्ति के लिए जाल फैला दिया गया है, लेकिन न तो समय पर मरम्मत होती है और न ही बिजली चोरी पर पावर कॉर्पोरेशन अंकुश लगा पा रहा है।
स्मार्ट सिटी के लिए कई ऐसी सुविधाएं हैं, जो लोगों को नहीं मिल पा रही है। इसमें जेएनएनयूआरएम की अधूरी परियोजनाएं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कमी, अव्यवस्थित यातायात, पुराना एवं जर्जर ड्रेनेज सिस्टम, घनी आबादी वाले कई मोहल्लों में सीवर लाइन न होना, ई-गवर्नेंस कार्य अधूरे होना, अतिक्रमण, सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी आदि शामिल है।
नगर पालिका परिषद अधिशासी अधिकारी पीएन सिंह का कहना है कि शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। वर्तमान में जो भी कमियां हैं, उसे दूर किया जा रहा है। पेयजल, सीवर, सड़क, प्रकाश आदि में निरंतर सुधार किया जा रहा है।
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निचले स्तर की मूलभूत सुविधाओं और बिजली, पानी, यातायात, सीवर जैसी समस्याएं लोगों के लिए नासूर बने हुए हैं। वहीं तंग गलियों में अवैध कांप्लेक्स बनते जा रहे हैं। पटरियों पर फैले अतिक्रमण का खामियाजा हर दिन लोगों को जाम में फंसकर भुगतना पड़ता है।
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ऐसे में शहर को स्मार्ट सिटी बनाने को लेकर इन दुश्वारियों को दूर करने के लिए अफसरों को नाके चने चबाने पड़ेंगे। नगर पालिका में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से खस्ताहाल है। पेयजल आपूर्ति आज भी जर्जर लाइनों के भरोसे है। इसके चलते आए दिन लीकेज की समस्या से जूझना पड़ता है।
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वहीं पानी में फोर्स नहीं होने के कारण मोटर लगाकर किसी लोग काम चला रहे हैं। कई दशक पुरानी पाइप लाइनें जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। इनसे गंदा पानी घरों में पहुंच जाता है। आरडीए की सुस्ती के चलते पिछले कुछ वर्षों में अवैध निर्माण तेजी से हो रहा है।
हालत यह है कि गलियों में भी कांप्लेक्स बनवा दिया गया। इस दौरान पार्किंग की कहीं पर कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते आम से लेकर खास तक को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। स्मार्ट बनने के लिए ट्रैफिककी व्यवस्था बदनुमा दाग है।
कब, कहां पर जाम लग जाए, कोई कह नहीं सकता है। कभी शहर के महत्वपूर्ण चौराहे, तो कभी बाजार में जाम लग जाता है। कहने को ट्रैफिक पुलिस तो रहती है, लेकिन वह भी जाम को देखकर कन्नी काट लेते हैं। कुछ जगह पर डिवाइडर खड़े कर दिए गए, लेकिन सड़क पर अतिक्रमण बढ़ने से यातायात चलता नहीं रेंगता है।
शहर के स्मार्ट बनने के लिए सीवर की व्यवस्था शायद शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है, लेकिन यहां तो अभी इसकी श्रीगणेश नहीं है। सीवर की व्यवस्था बमुश्किल से 20 फीसदी हिस्से में ही है। आज भी लोग निजी टैंक बनवाकर किसी तरह काम चला रहे हैं।
यहीं नहीं जो सीवर लाइन पड़ी है, उनकी क्षमता कम होने के कारण आए दिन चोक हो रही हैं। नतीजतन लोगों को सीवर की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे है। यहां पर बिजली तो मिल रही है, लेकिन उपयोग नहीं हो पा रहा है।
इसकी वजह लो-वोल्टेज की समस्या है। जर्जर पोल और तार इसके सबसे बड़े कारक हैं। शहर में बिजली आपूर्ति के लिए जाल फैला दिया गया है, लेकिन न तो समय पर मरम्मत होती है और न ही बिजली चोरी पर पावर कॉर्पोरेशन अंकुश लगा पा रहा है।
स्मार्ट सिटी के लिए कई ऐसी सुविधाएं हैं, जो लोगों को नहीं मिल पा रही है। इसमें जेएनएनयूआरएम की अधूरी परियोजनाएं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कमी, अव्यवस्थित यातायात, पुराना एवं जर्जर ड्रेनेज सिस्टम, घनी आबादी वाले कई मोहल्लों में सीवर लाइन न होना, ई-गवर्नेंस कार्य अधूरे होना, अतिक्रमण, सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी आदि शामिल है।
नगर पालिका परिषद अधिशासी अधिकारी पीएन सिंह का कहना है कि शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। वर्तमान में जो भी कमियां हैं, उसे दूर किया जा रहा है। पेयजल, सीवर, सड़क, प्रकाश आदि में निरंतर सुधार किया जा रहा है।