फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   A growing number of TB patients in the district

जिले में लगातार बढ़ रहे टीबी के रोगी

Tue, 10 May 2016 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Tue, 10 May 2016 11:48 PM IST
विज्ञापन
A growing number of TB patients in the district
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या - फोटो : demo pic
जिले में टीबी (तपेदिक) रोगियों की संख्या बढ़ रही है। खासकर बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। शुरू में यह बीमारी बूढ़ों में होती थी, लेकिन चार साल में संपन्न घरों के बच्चे व युवा भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। टीबी के कुल रोगियों में करीब 20 फीसदी बच्चे व युवा हैं।
विज्ञापन


चार साल में जिले में टीबी के 583 रोगियों ने जान गवां दी है। जिले में टीबी की रोकथाम के लिए छह टीबी यूनिट और 29 बलगम जांच सेंटर खोले गए हैं। इसके अलावा 756 डाट्स सेंटर भी खोले गए हैं।
विज्ञापन


पिछले कुछ समय से ट्यूबर क्लोसिस (टीबी) के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देखने में आया है कि संपन्न व धूल-मिट्टी से दूर रहने वाले घरों के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे है। संक्रमण से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता के अभाव में यह बीमारी भयावह रूप लेती जा रही है। चूंकि टीबी संक्रमण रोग है। यदि पीड़ित व्यक्ति दूसरे के संपर्क में आ गया तो सांसों के सहारे दूसरा व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ जाता है।

जिले में जिला अस्पताल परिसर में टीबी क्लीनिक के साथ ही सीएचसी सलोन, डलमऊ, लालगंज, ऊंचाहार और महराजगंज में टीबी यूनिटें हैं। सीएचसी में रोगियों के आने पर आशंका होने पर बलगम की जांच कराई जाती है।

कभी-कभी समय से अस्पतालों में दवा उपलब्ध न होने के कारण रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि इसके अलावा तहसील दिवसों व अन्य कार्यक्रमों में लोगों को जागरूक करने के लिए पंपलेट आदि का वितरण किया जाता है।

साथ ही रोगियों को अधिक से अधिक संख्या में बलगम जांच करने के लिए प्रेरित किया जाता है। रोग के उपचार में लापरवाही जानलेवा साबित होती है। जिला अस्पताल के डॉ. बीरबल का कहना है कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी का आना।

बुखार जो खासकर शाम को बढ़ने लगे। खांसी के साथ खून आना और सीने में दर्द रहना। भूख न लगना और वजन का घटना समेत कई अन्य कारण है जो टीबी के लक्षण को बताते हैं। ऐसा होने पर बलगम की जांच जरूर कराएं। समय से इलाज शुरू न होने से रोगी की जान भी जा सकती है। देरी कतई न की जाए।

टीबी क्लीनिक के पीपीएस को-आर्डिनेटर मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि बलगम की जांच में टीबी की पुष्टि होने के बाद रोगी का इलाज शुरू कर दिया जाता है। डॉट्स के माध्यम से इसका सफल इलाज किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत बलगम की तीन जांचे कराई जाती है।

यह सारी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। टीबी से ग्रसित रोगी जब भी खांसे मुंह में कपड़ा जरूर लगाए। आशंका होने पर तुरंत बलगम जांच सेंटर पर पहुंचकर जांच कराए। जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. नागेंद्र प्रसाद ने बताया कि टीबी संक्रामक रोग है।


टुबरकुलोसिस बैक्टीरिया से इसके कीटाणु वायु द्वारा फैलते हैं। जब टीबी का रोगी खांसता या छींकता है तो तो रोगाणु छोटे-छोटे कणों के रूप में वातावरण में फेल जाते हैं। सांस लेने पर अन्य लोगों ने ये कण शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे स्वस्थ व्यक्ति भी टीबी का शिकार हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed