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पहले दिन ही स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था मिली बदहाल
Updated Sun, 02 Jul 2017 04:03 AM IST
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पहले दिन ही स्कूलों में लटके रहे ताले
- किताब के बजाय बच्चों के हाथों में थमाई झाड़ू, शिक्षा व्यवस्था मिली बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। पहले दिन ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। जिन बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए थी, वे विद्यालय की साफ-सफाई करते नजर आए। बच्चों की संख्या न के बराबर रही। कई स्कूलों में तो सिर्फ थे शिक्षक थे। बच्चे नहीं पहुंचे। जहां पर बच्चे पहुंचे, वहां पर उन्हें किताब नहीं दी गई। बच्चों ने मौज-मस्ती की और फिर घरों को लौट गए। यही नहीं कई स्कूल तो ऐसे रहे, जहां पर ताले लटके रहे। यह हाल तब रहा, जब प्रदेश सरकार ने स्कूलों की साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए थे। जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या 2600 है। इसमें सवा दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। पहले दिन नए शिक्षासत्र की शुरुआत तो हुई, लेकिन करीब 15 फीसदी बच्चे ही स्कूल पहुंचे। पूरी तरह से स्कूलों में अव्यवस्था नजर आई। स्कूलों में मवेशी टहलते नजर आए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी की वजह से शिक्षा व्यवस्था बेदम नजर आई। कई स्कूलों में शिक्षक भी नदारद रहे। बच्चों को किताबों तक वितरण नहीं किया जा सका।
सीन एक : शिक्षक तो पहुंचे पर बच्चे नहीं
प्राथमिक स्कूल सैदनपुर में प्रधानाध्यापक सुनील कुमार गुप्ता, शिक्षिका अल्पिका सिंह, इंद्रमति शर्मा, रश्मि वाजपेयी तो विद्यालय पहुंची, लेकिन वहां पर कोई बच्चा पढ़ने नहीं पहुंचा। पूछने पर प्रधानाध्यापक का जवाब था कि बच्चे नहीं आए। शहर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक बालिका विद्यालय सत्य नगर में छात्र-छात्राओं ने स्वयं झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की। स्कूल के अंदर साइकिलें रखी गई थी, जिन्हें हटवाने की जरूरत नहीं समझी गई।
सीन दो : छात्र-छात्रओं ने की साफ-सफाई
शहर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल बेलीगंज का ताला तो खुला, लेकिन साफ-सफाई नहीं की गई थी। सुबह पढ़ाई करने पहुंचे छात्र-छात्राएं झाड़ू लगाकर स्कूल की साफ-सफाई करते नजर आए। यही हाल शहर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल चक अहमदपुर का रहा, जहां पर बच्चे झाड़ू लगाते नजर आए। यही नहीं इस स्कूल में मेज तक की सफाई छात्राओं को करनी पड़ी। शिक्षक-शिक्षिकाएं कुर्सियों पर बैठे रहे।
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सीन तीन : 156 में से मात्र 10 बच्चे ही आए स्कूल
छतोह ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में पद्मपुर में प्रधानाध्यापक विद्यालय 9 बजे तक पहुंचे ही नहीं। विद्यालय में सहायक शिक्षक परमेश कुमार व सीमा देवी कार्यालय में मौजूद मिली। विद्यालय में कुल छात्रों की संख्या 156 थी, जबकि उपस्थित छात्र 10 थे और विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा दिखा। सहायक अध्यापक परमेश कुमार यादव ने बताया कि प्रधानाध्यापक आते ही होंगे, सर्फाई कर्मी नहीं आया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पदमपुर में भी नहीं दिखी छात्रों की संख्या। स्कूल में कुल छात्रों की संख्या 86 है, जबकिउपस्थित छात्र-छात्राओं की संख्या 9 थी।
इनसेट
शिक्षिका ने पढ़ाने के लिए रख दिया टीचर
परशदेपुर। छतोह क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जगतपुर में इंचार्ज प्रधानाचार्य ने विद्यालय में एक हजार रुपये महीने पर बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका मिथलेश कुमारी को रख लिया है। शिक्षा सत्र के पहले दिन शनिवार को मिथलेश कुमारी बच्चों को स्कूल में पढ़ाती नजर आई। पूछने पर इंचार्ज प्रधानचार्य अनीता का कहना था कि विद्यालय में और कोई शिक्षक नहीं है तो एबीएसए छतोह हौसिला प्रसाद से पूछ कर अपनी तरफ से मिथलेश कुमारी को रख लिया है और इनका वेतन अपने पास से देते हैं। विद्यालय में कुल छात्रों की संख्या 72 है। उपस्थित छात्रों की संख्या 15 रही। उधर खंड शिक्षा अधिकारी हौसिला प्रसाद ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय जगतपुर में किसी प्राइवेट शिक्षक रखने की जानकारी नहीं है और अगर किसी शिक्षक ने रखा है तो अपनी मर्जी से रखा होगा। कोई लिखापढ़ी में नहीं है और कानूनन तो यह गलत है।
वर्जन :
शनिवार से विद्यालय खुल गए हैं। पहला दिन था, जिससे बच्चों की संख्या कम रही। बच्चों को जल्द पुस्तक वितरित कराई जाएगी। जिस विद्यालय में जो खामियां रही, उसकी टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। इसके बाद शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।- राजेंद्र सिंह, बीएसए
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- किताब के बजाय बच्चों के हाथों में थमाई झाड़ू, शिक्षा व्यवस्था मिली बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। पहले दिन ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। जिन बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए थी, वे विद्यालय की साफ-सफाई करते नजर आए। बच्चों की संख्या न के बराबर रही। कई स्कूलों में तो सिर्फ थे शिक्षक थे। बच्चे नहीं पहुंचे। जहां पर बच्चे पहुंचे, वहां पर उन्हें किताब नहीं दी गई। बच्चों ने मौज-मस्ती की और फिर घरों को लौट गए। यही नहीं कई स्कूल तो ऐसे रहे, जहां पर ताले लटके रहे। यह हाल तब रहा, जब प्रदेश सरकार ने स्कूलों की साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए थे। जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या 2600 है। इसमें सवा दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। पहले दिन नए शिक्षासत्र की शुरुआत तो हुई, लेकिन करीब 15 फीसदी बच्चे ही स्कूल पहुंचे। पूरी तरह से स्कूलों में अव्यवस्था नजर आई। स्कूलों में मवेशी टहलते नजर आए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी की वजह से शिक्षा व्यवस्था बेदम नजर आई। कई स्कूलों में शिक्षक भी नदारद रहे। बच्चों को किताबों तक वितरण नहीं किया जा सका।
सीन एक : शिक्षक तो पहुंचे पर बच्चे नहीं
प्राथमिक स्कूल सैदनपुर में प्रधानाध्यापक सुनील कुमार गुप्ता, शिक्षिका अल्पिका सिंह, इंद्रमति शर्मा, रश्मि वाजपेयी तो विद्यालय पहुंची, लेकिन वहां पर कोई बच्चा पढ़ने नहीं पहुंचा। पूछने पर प्रधानाध्यापक का जवाब था कि बच्चे नहीं आए। शहर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक बालिका विद्यालय सत्य नगर में छात्र-छात्राओं ने स्वयं झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की। स्कूल के अंदर साइकिलें रखी गई थी, जिन्हें हटवाने की जरूरत नहीं समझी गई।
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सीन दो : छात्र-छात्रओं ने की साफ-सफाई
शहर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल बेलीगंज का ताला तो खुला, लेकिन साफ-सफाई नहीं की गई थी। सुबह पढ़ाई करने पहुंचे छात्र-छात्राएं झाड़ू लगाकर स्कूल की साफ-सफाई करते नजर आए। यही हाल शहर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल चक अहमदपुर का रहा, जहां पर बच्चे झाड़ू लगाते नजर आए। यही नहीं इस स्कूल में मेज तक की सफाई छात्राओं को करनी पड़ी। शिक्षक-शिक्षिकाएं कुर्सियों पर बैठे रहे।
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सीन तीन : 156 में से मात्र 10 बच्चे ही आए स्कूल
छतोह ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में पद्मपुर में प्रधानाध्यापक विद्यालय 9 बजे तक पहुंचे ही नहीं। विद्यालय में सहायक शिक्षक परमेश कुमार व सीमा देवी कार्यालय में मौजूद मिली। विद्यालय में कुल छात्रों की संख्या 156 थी, जबकि उपस्थित छात्र 10 थे और विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा दिखा। सहायक अध्यापक परमेश कुमार यादव ने बताया कि प्रधानाध्यापक आते ही होंगे, सर्फाई कर्मी नहीं आया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पदमपुर में भी नहीं दिखी छात्रों की संख्या। स्कूल में कुल छात्रों की संख्या 86 है, जबकिउपस्थित छात्र-छात्राओं की संख्या 9 थी।
इनसेट
शिक्षिका ने पढ़ाने के लिए रख दिया टीचर
परशदेपुर। छतोह क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जगतपुर में इंचार्ज प्रधानाचार्य ने विद्यालय में एक हजार रुपये महीने पर बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका मिथलेश कुमारी को रख लिया है। शिक्षा सत्र के पहले दिन शनिवार को मिथलेश कुमारी बच्चों को स्कूल में पढ़ाती नजर आई। पूछने पर इंचार्ज प्रधानचार्य अनीता का कहना था कि विद्यालय में और कोई शिक्षक नहीं है तो एबीएसए छतोह हौसिला प्रसाद से पूछ कर अपनी तरफ से मिथलेश कुमारी को रख लिया है और इनका वेतन अपने पास से देते हैं। विद्यालय में कुल छात्रों की संख्या 72 है। उपस्थित छात्रों की संख्या 15 रही। उधर खंड शिक्षा अधिकारी हौसिला प्रसाद ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय जगतपुर में किसी प्राइवेट शिक्षक रखने की जानकारी नहीं है और अगर किसी शिक्षक ने रखा है तो अपनी मर्जी से रखा होगा। कोई लिखापढ़ी में नहीं है और कानूनन तो यह गलत है।
वर्जन :
शनिवार से विद्यालय खुल गए हैं। पहला दिन था, जिससे बच्चों की संख्या कम रही। बच्चों को जल्द पुस्तक वितरित कराई जाएगी। जिस विद्यालय में जो खामियां रही, उसकी टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। इसके बाद शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।- राजेंद्र सिंह, बीएसए