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नौनिहालों की सुरक्षा में शिक्षक ने लगाई अपनी जान की बाजी
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बस कुछ पल में ही हंसते-खेलते नौनिहालों के चीथड़े उड़ते देर न लगती, लेकिन एक साहसी शिक्षक ने मासूमों की जान बचाने की खातिर खुद अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। अगर शिक्षक ने ऐसा न किया होता तो शायद गुरुवार का दिन करीब एक सैकड़ा नौनिहालों की जिंदगी में अंधेरा ला देता।
शिक्षक के इस कदम से जिले में एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि खुद शिक्षक के हाथ इस हादसे को बचाने के चक्कर में झुलस गए। मामला खीरों विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मानपुर का है, जहां एक सिलेंडर में आग लग गई थी। विद्यालय में 189 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन गुरुवार को 106 बच्चे उपस्थित थे।
प्रधान शिक्षक राम खेलावन, सहायक शिक्षक रमेश कुमार सिंह, गीता सिंह, राज बहादुर कक्षाओं में पढ़ा रहे थे। एमडीएम की रसोई में रसोइया दुलारा, जनक दुलारी और बिटाना खाना बना रही थी। प्रधान शिक्षक राम खेलावन ने बताया कि दोपहर में बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा था।
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सब्जी बनने के बाद जैसे ही रोटी बनाने की तैयारी चल रही थी, तभी रेगुलेटर से हुए गैस रिसाव से सिलेंडर में आग लग गई। रसोइयों के शोर मचाने पर हड़कंप मच गया। अफरातफरी के बीच कोई हिम्मत नहीं जुटा सका तो शिक्षक रमेश कुमार सिंह ने आग बुझाने के लिए पानी से भीगे दो बोरे सिलेंडर पर डाले, लेकिन आग नहीं बुझी।
तुरंत रमेश जलते हुए सिलेंडर को उठाकर बाहर की ओर भागा। थोड़ी दूरी पर एक तालाब में सिलेंडर को फेंका। जलता सिलेंडर उठाने से शिक्षक के हाथ झुलस गए। सूचना पर पहुंचे चौकी प्रभारी सेमरी रूपेंद्र कुमार मिश्रा पुलिस टीम और दमकल कर्मियों को लेकर पहुंचे तो जलते हुए सिलेंडर को निष्क्रिय किया जा सका।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मानपुर में तैनात गणित के अध्यापक रमेश कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें बच्चो से बहुत लगाव है। सिलेंडर में आग दहक रही थी। कुछ भी हो सकता था। यह देख उन्हें कुछ नहीं समझ आया, बस बड़े हादसे के अंदेशे को भांपते हुए मासूमों के हंसते-खेलते चेहरे याद आने लगी।
बस इन्हीं मासूमों के चेहरों के आगे कुछ नजर नहीं आया और जलता हुआ सिलेंडर लेकर भाग गया। रमेश ने बताया कि जब सिलेंडर को तालाब में फेंक दिया तो वह खुद बेसुध होकर गिर पड़े। बच्चों का भी उनसे लगाव ही था कि सभी ने मिलकर उन्हें तालाब के किनारे से उठाकर विद्यालय वापस लाए। विद्यालय में ही स्टाफ और बच्चों ने प्राथमिक उपचार करते हुए झुलसे हाथों में मरहम लगाया।
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शिक्षक के इस कदम से जिले में एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि खुद शिक्षक के हाथ इस हादसे को बचाने के चक्कर में झुलस गए। मामला खीरों विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मानपुर का है, जहां एक सिलेंडर में आग लग गई थी। विद्यालय में 189 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन गुरुवार को 106 बच्चे उपस्थित थे।
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प्रधान शिक्षक राम खेलावन, सहायक शिक्षक रमेश कुमार सिंह, गीता सिंह, राज बहादुर कक्षाओं में पढ़ा रहे थे। एमडीएम की रसोई में रसोइया दुलारा, जनक दुलारी और बिटाना खाना बना रही थी। प्रधान शिक्षक राम खेलावन ने बताया कि दोपहर में बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा था।
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सब्जी बनने के बाद जैसे ही रोटी बनाने की तैयारी चल रही थी, तभी रेगुलेटर से हुए गैस रिसाव से सिलेंडर में आग लग गई। रसोइयों के शोर मचाने पर हड़कंप मच गया। अफरातफरी के बीच कोई हिम्मत नहीं जुटा सका तो शिक्षक रमेश कुमार सिंह ने आग बुझाने के लिए पानी से भीगे दो बोरे सिलेंडर पर डाले, लेकिन आग नहीं बुझी।
तुरंत रमेश जलते हुए सिलेंडर को उठाकर बाहर की ओर भागा। थोड़ी दूरी पर एक तालाब में सिलेंडर को फेंका। जलता सिलेंडर उठाने से शिक्षक के हाथ झुलस गए। सूचना पर पहुंचे चौकी प्रभारी सेमरी रूपेंद्र कुमार मिश्रा पुलिस टीम और दमकल कर्मियों को लेकर पहुंचे तो जलते हुए सिलेंडर को निष्क्रिय किया जा सका।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मानपुर में तैनात गणित के अध्यापक रमेश कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें बच्चो से बहुत लगाव है। सिलेंडर में आग दहक रही थी। कुछ भी हो सकता था। यह देख उन्हें कुछ नहीं समझ आया, बस बड़े हादसे के अंदेशे को भांपते हुए मासूमों के हंसते-खेलते चेहरे याद आने लगी।
बस इन्हीं मासूमों के चेहरों के आगे कुछ नजर नहीं आया और जलता हुआ सिलेंडर लेकर भाग गया। रमेश ने बताया कि जब सिलेंडर को तालाब में फेंक दिया तो वह खुद बेसुध होकर गिर पड़े। बच्चों का भी उनसे लगाव ही था कि सभी ने मिलकर उन्हें तालाब के किनारे से उठाकर विद्यालय वापस लाए। विद्यालय में ही स्टाफ और बच्चों ने प्राथमिक उपचार करते हुए झुलसे हाथों में मरहम लगाया।