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Punjab Election Result 2022: अमरिंदर सिंह कौन सी गलती कर गए, जानिए पटियाला सीट से कैप्टन के हारने के पांच बड़े कारण
Thu, 10 Mar 2022 02:40 PM IST
हिमांशु मिश्रा
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 10 Mar 2022 02:40 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कांग्रेस से अलग होकर पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव हार गए हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी के अजीत पाल सिंह कोहली ने करीब 10 हजार से ज्यादा वोटों से मात दे दी। कैप्टन दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। ऐसे में उनकी हार ने सियासी पंडितों को हैरान कर दिया है। जानिए अमरिंदर की हार के पीछे क्या है पांच बड़े कारण?पहले जान लीजिए अमरिंदर के बारे में
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का जन्म 11 मार्च 1942 को पटियाला के राजपरिवार में हुआ था। अमरिंदर और राजीव गांधी ने एक साथ पढ़ाई की थी। 1963 में उन्होंने सेना जॉइन की, 1965 में इस्तीफा दे दिया, लेकिन पाकिस्तान से युद्ध शुरू होने पर फिर सेना से जुड़ गए। युद्ध समाप्त होने के बाद उन्होंने फिर से सेना छोड़ दी। तब नवजोत सिंह सिद्धू के पिता भगवंत सिंह सिद्धू उन्हें राजनीति में लेकर आए। अमरिंदर की मां मोहिंदर कौर भी सक्रिय राजनीति में रहीं। अमरिंदर की पत्नी परणीत कौर मनमोहन सिंह की सरकार में विदेश राज्यमंत्री रहीं।
- 1980 में कैप्टन कांग्रेस से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 1984 में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार' के विरोध में कांग्रेस और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया।
- अगस्त 1985 में अकाली दल में शामिल हो गए। सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में कृषि मंत्री रहे।
- 1997 में फिर कांग्रेस में आ गए। 1999 से 2002 तक कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
- 2002 से 2007 तक पहली बार और फिर 2017 से 2021 तक दूसरी बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे।
- कैप्टन ने युद्ध और सिख इतिहास पर किताबें भी लिखी हैं।
- उन्होंने ए रिज टू फार, लेस्ट वी फॉरगेट, द लास्ट सनसेट: राइज एंड फॉल ऑफ लाहौर दरबार और द सिख इन ब्रिटेन: 150 ईयर्स ऑफ फोटोग्राफ्स लिखी हैं।
हार के पांच बड़े कारण?
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो :
अमर उजाला
1. आम आदमी की लहर : पूरे पंजाब में इस बार आम आदमी पार्टी की लहर दिखाई दे रही है। इसमें बड़े से बड़े दिग्गज मात खा गए। अमरिंदर पर भी आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत हासिल कर ली। आप की लहर का कैप्टन पर भारी पड़ गया।
2. भाजपा के साथ हाथ मिलाना : कैप्टन की हार का एक बड़ा कारण ये भी है कि उन्होंने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाई और भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। किसान आंदोलन को लेकर पूरे पंजाब में भाजपा का विरोध था। इसके बावजूद कैप्टन ने भाजपा के साथ हाथ मिलाया।
3. साढ़े चार साल की एंटीइनकंबेंसी : चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को ताज पहना दिया। इसके पहले अमरिंदर सिंह ने साढ़े चार साल तक पंजाब पर राज किया। लोगों के बीच कैप्टन को लेकर काफी विरोध था। साढ़े चार साल की एंटीइनकंबेंसी भी कैप्टन पर हावी हो गई।
4. आम जनता से दूरी : राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह बताते हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए आम जनता से दूरी बना ली। इसका खामियाजा भी उन्हें खुद की सीट पर भुगतना पड़ा। वहीं, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार लगातार जनता के बीच दिखाई दिए। इसका उन्हें फायदा मिला।
5. मजबूत कारडर न होना : कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनाव से ठीक पहले नई पार्टी का गठन किया है। भाजपा के साथ गठबंधन में उन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन अभी उनका काडर काफी कमजोर है। इसका नुकसान भी कैप्टन को उठाना पड़ा।
2. भाजपा के साथ हाथ मिलाना : कैप्टन की हार का एक बड़ा कारण ये भी है कि उन्होंने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाई और भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। किसान आंदोलन को लेकर पूरे पंजाब में भाजपा का विरोध था। इसके बावजूद कैप्टन ने भाजपा के साथ हाथ मिलाया।
3. साढ़े चार साल की एंटीइनकंबेंसी : चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को ताज पहना दिया। इसके पहले अमरिंदर सिंह ने साढ़े चार साल तक पंजाब पर राज किया। लोगों के बीच कैप्टन को लेकर काफी विरोध था। साढ़े चार साल की एंटीइनकंबेंसी भी कैप्टन पर हावी हो गई।
4. आम जनता से दूरी : राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह बताते हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए आम जनता से दूरी बना ली। इसका खामियाजा भी उन्हें खुद की सीट पर भुगतना पड़ा। वहीं, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार लगातार जनता के बीच दिखाई दिए। इसका उन्हें फायदा मिला।
5. मजबूत कारडर न होना : कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनाव से ठीक पहले नई पार्टी का गठन किया है। भाजपा के साथ गठबंधन में उन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन अभी उनका काडर काफी कमजोर है। इसका नुकसान भी कैप्टन को उठाना पड़ा।