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पानी की बर्बादी से घट रहा जलस्तर

Sat, 23 Apr 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sat, 23 Apr 2016 12:04 AM IST
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water crisis in pratapgarh
पानी की समस्‍या - फोटो : amar ujala
 सदर ब्लॉक में सबसे अधिक पानी का दोहन किया जा रहा है। फसलों से सिंचाई से अधिक पानी की बर्बादी की जा रही है। विकास क्षेत्र में सबसे अधिक समरसिबल लगे हुए हैं, जबकि जलस्तर में वृद्घि के लिए जिले में सबसे कम तालाब है और राजकीय नलकूप लगे हैं। इससे सदर ब्लाक में पेयजल का संकट और गहराता जा रहा है। जलस्तर सुधारने के लिए ब्लाक प्रशासन का दावा भी हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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जिले के  सदर ब्लॉक का अधिकांश शहरी इलाके में आता है, कहने का आशय है कि लोग रहते हैं तो गांव में हैं, मगर सुविधाएं उन्हें शहर की जैसी मिल रही है। दहिलामऊ, जोगापुर, रूपापुर, चिलबिला, शुकुलपुर, सगरा, भंगवा सहित अनेक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनका अधिकांश हिस्सा शहर की सीमा से जुड़ा हुआ है। इससे प्यास बुझाने के लिए लोगों ने घर-घर समरसिबल की बोरिंग करा ली है। घर की साफ-सफाई के साथ ही अधिकांश पानी बर्बाद किया जा रहा है। पानी का दोहन तो खूब किया जा रहा है, मगर जलस्तर सुधारने की दिशा में कोई पहल नहीं हो रही है।
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सदर ब्लाक के 80 ग्राम पंचायतों में 10 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां एक भी तालाब नहीं है। किशुनदासपुर, पूरेरायजू, पूरेमुस्तफा, मझिलहा, सगरा, दहिलामऊ, सेतापुर, सकरौली, घाटमपुर, कादीपुर इन ग्राम पंचायतों में अभी तक मनरेगा के तहत एक भी तालाब नहीं खोदे गए हैं। जाहिर सी बात है कि जब तालाब नहीं हैं, तो बरसात का पानी भी नहीं रुकता है और गर्मी के दिनों में इन तालाबों में पानी कहां से भराया जाएगा। ब्लॉक में 4025 हैंडपंप लगे हुए हैं, इसमें से 78 हैंडपंप रीबोर का इंतजार कर रहे हैं। जलनिगम की लापरवाही के चलते इन हैंडपंपों का अभी तक रीबोर नहीं हुआ है। सदर ब्लाक में नहर का एरिया नहीं है, जो नहरें हैं भी उसमें कई वर्षो से पानी आना बंद हो गया है। इससे पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। अगर आने वाले दिनों में जलस्तर सुधारने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई, हालात और भी खराब हो सकते हैं।
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