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अफसरों की लापरवाही से गहराया यूरिया का संकट
Fri, 11 Jan 2019 12:38 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 11 Jan 2019 12:38 AM IST
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खाद
- फोटो : अमर उजाला
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गेहूं की बुवाई के समय डीएपी का अकाल और अब टापड्रेसिंग का समय आया तो समितियों से यूरिया गायब है। ऐेसे में किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। सदर और कुंडा तहसील की अधिकांश समितियों पर सप्ताह भर से यूरिया नहीं मिल रही है। इससे किसान प्राइवेट दुकानों से खरीदने को मजबूर हैं।
गेहूं बुवाई के समय डीएपी का संकट झेलने वाले किसान अब यूरिया के लिए भटक रहे हैं। सदर और कुंडा तहसील की साधन सहकारी समितियों पर सप्ताह भर से यूरिया नहीं है। सचिव प्रतिदिन मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, मगर केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी समिति के अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं। जबकि साधन सहकारी समितियों ने खाद का भुगतान पहले ही कर दिया है। विभागीय जानकारों की मानें तो जिले में यूरिया का संकट अफसरों ने जानबूझ कर उत्पन्न किया है।
दरअसल, जिले की 172 साधन सहकारी समितियों पर यूरिया पहुंचाने की जिम्मेदारी पीसीएफ और केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी समिति को दी गई है। पीसीएफ, लालगंज, पट्टी और रानीगंज है, तो केंद्रीय उपभोक्ता करे पास कुंडा और सदर की समितियां हैं। इन समितियों के खाद का भुगतान जिला सहकारी बैंक सीधे इफको को करती है। मगर खाद वितरण की जिम्मेदारी इकाइयों को सौंपी गई है। सदर और कुंडा के समितियों पर नियमित रुप से यूरिया नहीं पहुंचने से किसान प्राइवेट दुकानों से लेने को मजबूर हैं।
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समितियों पर खाद की मांग के अनुरूप इफको को भुगतान कर दिया गया है। नियमित रूप से खाद क्यों नहीं पहुंच रही है, यह बात समझ में नहीं आ रही है। फिलहाल जिले में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। धर्मराज सिंह, महाप्रबंधक, जिला सहकारी समिति।
जिन समितियों से डिमांड आई है और खाद नहीं पहुंची है। उसकी जांच की जा रही है। फिलहाल यूरिया की रैक 27000 मीट्रिकटन आ गई है। दो दिन के अंदर सभी समितियों पर पहुंच जाएगी।
अमित पांडेय, सहायक निबंधक, सहकारिता।
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गेहूं बुवाई के समय डीएपी का संकट झेलने वाले किसान अब यूरिया के लिए भटक रहे हैं। सदर और कुंडा तहसील की साधन सहकारी समितियों पर सप्ताह भर से यूरिया नहीं है। सचिव प्रतिदिन मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, मगर केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी समिति के अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं। जबकि साधन सहकारी समितियों ने खाद का भुगतान पहले ही कर दिया है। विभागीय जानकारों की मानें तो जिले में यूरिया का संकट अफसरों ने जानबूझ कर उत्पन्न किया है।
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दरअसल, जिले की 172 साधन सहकारी समितियों पर यूरिया पहुंचाने की जिम्मेदारी पीसीएफ और केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी समिति को दी गई है। पीसीएफ, लालगंज, पट्टी और रानीगंज है, तो केंद्रीय उपभोक्ता करे पास कुंडा और सदर की समितियां हैं। इन समितियों के खाद का भुगतान जिला सहकारी बैंक सीधे इफको को करती है। मगर खाद वितरण की जिम्मेदारी इकाइयों को सौंपी गई है। सदर और कुंडा के समितियों पर नियमित रुप से यूरिया नहीं पहुंचने से किसान प्राइवेट दुकानों से लेने को मजबूर हैं।
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समितियों पर खाद की मांग के अनुरूप इफको को भुगतान कर दिया गया है। नियमित रूप से खाद क्यों नहीं पहुंच रही है, यह बात समझ में नहीं आ रही है। फिलहाल जिले में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। धर्मराज सिंह, महाप्रबंधक, जिला सहकारी समिति।
जिन समितियों से डिमांड आई है और खाद नहीं पहुंची है। उसकी जांच की जा रही है। फिलहाल यूरिया की रैक 27000 मीट्रिकटन आ गई है। दो दिन के अंदर सभी समितियों पर पहुंच जाएगी।
अमित पांडेय, सहायक निबंधक, सहकारिता।