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बेटा-बेटी का भेद मिटाने के लिए बदलनी होगी सोच

Fri, 07 Jun 2019 11:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूराे, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूराे, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 07 Jun 2019 11:34 PM IST
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Thinking about changing the distinction between son and daughter
news - फोटो : pratapgrah
अमर उजाला के अभियान अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल के तहत शुक्रवार को शहर के सिनेमा रोड स्थित शारदा संगीत महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए मंथन किया गया।
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बुद्धिजीवियों का मानना था कि बेटा-बेटी का भेद मिटाने के लिए समाज के लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। दुनिया में अब ऐसा कोई काम नहीं रह गया जो बेटियां नहीं कर रही हैं। ऐसी दशा में बेटा-बेटी समान हैं।
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पूर्व एडीआईओएस डॉ. दयाराम मौर्य ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर कड़े प्रतिबंध लगने के बाद भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा से लेकर हवाई जहाज तक बेटियां चला रही हैं। महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिला है, मगर वह पुरुषों को पीछे छोड़ती जा रही हैं। कवि और साहित्यकार चंद्रेश बहादुर सिंह ध्रुव ने कहा कि बेटियां दो परिवारों का भाग्य जगाती हैं। जिस परिवार में पैदा होती हैं, उस परिवार को संवारने के  साथ ही ससुराल में पति, सास, ससुर के साथ ही बच्चों की परवरिश करती हैं।
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अम्मा साहब ट्रस्ट के ट्रस्टी आनंद मोहन ओझा ने कहा कि कोख में पलने वाले बच्चों का लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जब तक सख्ती नहीं बरती जाएगी, तब तक बेटियों का कत्ल ऐसे ही होता रहेगा। समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने कहा कि परिवार में बेटियां सबसे अधिक पिता को ही प्यार करती हैं। इसके बावजूद पिता बेटियों के जन्म लेने के पहले ही उनकी हत्या कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सीमा की रखवाली करने में बेटियां बराबर की भूमिका निभा रही हैं।


डायट के प्रशिक्षक डॉ. राकेश कनौजिया ने कहा कि समाज से लिंगभेद की भावना को पूरी तरह समाप्त कर देनी चाहिए और इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। समाजसेविका रंजना विश्वकर्मा ने कहा कि बेटा-बेटी में भेद नहीं करने की बात तो सब करते हैं, मगर वास्तव में बेटी को जन्म लेने के पहले ही मार दिया जाता है। उन्होंने इसके लिए सामाजिक सोच को बदलने की आवश्यकता बताई। सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक डीएन चड्ढा ने संगोष्ठी में मौजूद रहे लोगों को शपथ दिलाई कि वह कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए समाज के लोगों को जागरुक करेंगे और कोई इसकी पहल करता है, तो उसे जेल पहुंचाने का प्रयास करेंगे। संगोष्ठी में अन्य लोगों के अलावा राजेश कुमार मिश्र, कुंजबिहारी मौर्य, बरसाती अली शेख, अख्तर अंसारी, शम्स तबरेज, जैद खान, कृपाशंकर शुक्ल, संतोष प्रजापति, अंजनी तिवारी, लखन प्रतापगढ़ी, राधेश्याम दीवाना, ललिता विश्वकर्मा, अशोक तिवारी, अरुण कुमार रत्नाकर, कुसुमलता श्रीवास्तव प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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