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प्रतापगढ़ : आयुष्मान से संबद्ध निजी अस्पतालों में नहीं होगा गर्भवती महिलाओं का कैशलेस इलाज
Fri, 30 Sep 2022 01:10 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 01:10 AM IST
सार
प्रदेश भर के निजी अस्पतालों में योजना के तहत ऑपरेशन से ही प्रसव कराए जाने की शिकायतें मिली रही थीं।निजी अस्पतालों में योजना के तहत सामान्य प्रसव न के बराबर कराए जा रहे थे।
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आयुष्मान भारत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आयुष्मान योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में अब गर्भवती महिलाओं का कैशलेस इलाज नहीं होगा। निजी अस्पतालों में मनमाने तरीके से गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन से प्रसव कराए जाने की शिकायतें मिलने के बाद इस पर रोक लग गई है। आयुष्मान योजना के तहत गोल्डेन कार्ड धारकों का पांच लाख रुपये तक का इलाज फ्री है। जिले में योजना से सात निजी अस्पताल संबद्ध किए गए हैं। दस लाख 57 हजार लोगों का नाम पात्रता सूची में है। हालांकि इनमें से तीन लाख लोगों ने ही अभी तक गोल्डेन कार्ड बनवाया है।
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अब तक आयुष्मान से संबद्ध निजी अस्पतालों में प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कर कैशलेस प्रसव कराया जाता था। सामान्य प्रसव के साथ ऑपरेशन की सुविधा भी इसमें शामिल थी। प्रदेश भर के निजी अस्पतालों में योजना के तहत ऑपरेशन से ही प्रसव कराए जाने की शिकायतें मिली रही थीं। निजी अस्पतालों में योजना के तहत सामान्य प्रसव न के बराबर कराए जा रहे थे। इसके बाद अगस्त माह में आयुष्मान योजना का काम देखने वाली फर्म साचीज ने निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के इलाज और प्रसव पर रोक लगा दी।
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अब योजना के तहत सिर्फ सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के सामान्य और ऑपरेशन से प्रसव कराए जा सकेंगे। फिलहाल, निजी अस्पतालों में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। आयुष्मान योजना के प्रोग्राम मैनेजर डॉक्टर सुधाकर सिंह ने बताया कि कुछ दिक्कतें आने के कारण ऐसा किया गया है। दो से तीन माह के अंदर फिर से प्रसव पीड़िताओं का निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज शुरू कर दिया जाएगा।
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प्राइवेट अस्पताल संचालक मोटी कमाई के चक्कर में गर्भवती महिलाओं का सामान्य प्रसव कराए के बजाय ऑपरेशन करने पर जोर देते हैं। इसलिए रोक लगाने की जानकारी मिली है। जल्द ही फिर से सेवा बहाल हो सकती है। शासन के निर्देश के मुताबिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। - डॉ. एसके सिंह, एसीएमओ