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Pratapgarh News: उपकरण के अभाव में खेल मैदान का नहीं हो रहा उपयोग
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प्रतिभा को निखारने के लिए ग्राम पंचायतों में लाखों की लागत से खेल मैदान तैयार किए गए हैं। कागजी कोरम पूरा करने के लिए खेल मैदान बनाकर जिम्मेदार उपकरण लगाना ही भूल गए। ऐसे में ग्राम पंचायतों में खेल मैदान शोपीस बने हुए है।
योग्यता होने के बावजूद गांव के युवा खेल क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण जिम्मेदारों की लापरवाही भी है। जिले की 1148 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से खेल मैदान का निर्माण किया गया है। एक-एक खेल मैदान के निर्माण पर करीब दस-दस लाख रुपये खर्च किए गए है।
नियम के अनुसार खेल मैदान की जमीन समतल होनी चाहिए। पौधरोपण के साथ चहारदीवारी का निर्माण होना चाहिए। बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की जानी चाहिए। शौचालय के साथ बच्चों को खेल उपकरण भी लगाए जाने चाहिए। बावजूद इसके मानक की अनदेखी कर खेल मैदान तैयार किए गए हैं।
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नजीर के तौर पर सदर तहसील के परशुरामपुर में बने खेल मैदान में चहारदीवारी नहीं है। खेल उपकरण भी नहीं लगाए गए हैं। पोल लगाने के बाद झूला टांगना जिम्मेदार भूल गए। खेल मैदान में साफ-सफाई के बजाय झाड़ियां और घास उगे हैं। करीब-करीब यही स्थिति अधिकांश खेल मैदानों की है।
जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने की बजाय अपने जेब भरने का प्रयास अधिक किया है। प्रभारी डीसी मनरेगा केएन पांडेय ने बताया कि इस तरह के खेल मैदानों का निरीक्षण कराकर व्यवस्था पूरी कराई जाएगी।
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योग्यता होने के बावजूद गांव के युवा खेल क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण जिम्मेदारों की लापरवाही भी है। जिले की 1148 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से खेल मैदान का निर्माण किया गया है। एक-एक खेल मैदान के निर्माण पर करीब दस-दस लाख रुपये खर्च किए गए है।
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नियम के अनुसार खेल मैदान की जमीन समतल होनी चाहिए। पौधरोपण के साथ चहारदीवारी का निर्माण होना चाहिए। बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की जानी चाहिए। शौचालय के साथ बच्चों को खेल उपकरण भी लगाए जाने चाहिए। बावजूद इसके मानक की अनदेखी कर खेल मैदान तैयार किए गए हैं।
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नजीर के तौर पर सदर तहसील के परशुरामपुर में बने खेल मैदान में चहारदीवारी नहीं है। खेल उपकरण भी नहीं लगाए गए हैं। पोल लगाने के बाद झूला टांगना जिम्मेदार भूल गए। खेल मैदान में साफ-सफाई के बजाय झाड़ियां और घास उगे हैं। करीब-करीब यही स्थिति अधिकांश खेल मैदानों की है।
जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने की बजाय अपने जेब भरने का प्रयास अधिक किया है। प्रभारी डीसी मनरेगा केएन पांडेय ने बताया कि इस तरह के खेल मैदानों का निरीक्षण कराकर व्यवस्था पूरी कराई जाएगी।