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बूथ मैनेजरों की अग्निपरीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 22 Feb 2017 11:45 PM IST
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विधायकी का चुनाव लड़ रहे विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के समर्थक मतदाताओं को देर रात तक रिझाते नजर आए। मतदाताओं को मोटीवेट करने के लिए गांवों में नेताजी के करीबी डेरा डाले हुए हैं। ताकि नेताजी के उम्मीद पर वह खराउतर सकें।
हर चुनाव में बूथ स्तर के मैनेजरों का कद बढ़ जाता है। पोलिंग के दिन वही प्रत्याशियों के असली सेनापति होते हैं। 23 फरवरी के दिन होने वाले चुनाव में अपने प्रत्याशी के सिर जीत का सेहरा बंधवाने के लिए समर्थक दिन रात एक किए हुए हैं। प्रचार की समय सीमा समाप्त होने के बाद से ही अपने नेता के आदेश पर कार्यकर्ताओं की फौज अपने गांवों में डट गई है। वह गांव में बनने वाले समीकरण के बारे में पल-पल की रिपोर्ट अपने प्रत्याशी को दे रहे हैं। डोर टू डोर मतदाताओं से संपर्क कर अपने प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने में वह अभी भी जुटे हुए हैं। सपा को छोड़ भाजपा, बसपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थक गुपचुप तरीके से दोनों विधानसभा में अपना प्रचार कर रहे हैं।
हर दलों में मैसेंजर की भूमिका में भी कई लोग दिखते हैं। जो यहां का संदेश इधर-उधर कर रहे हैं। कई लोगों ने विरोधी दलों के चाल की काट खोजने के लिए उनके सुर में सुर मिलाते हुए साथ होने की कसमें भी खा लिए। ताकि उनकी रणनीति की जानकारी हो सके और वह उसकी काट खोज सकें।
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मतदाताओं की खामोशी बढ़ाती रही बेचैनी
चुनाव में मतदाताओं की अंतिम समय तक खामोशी प्रत्याशियों के समर्थकों को बेकरार करती रही। गांव व शहरी मतदाताओं ने अंतिम दिन तक वोट मांगने पहुंचे नेता व उनके समर्थकों के समर्थन में ही अपना मत देने का वादा करते रहे लेकिन वह किसको मत देंगे। यह कोई समझ नहीं सका। इससे नेताजी के साथ ही उनके समर्थक खासे परेशान रहे।
हर चुनाव में बूथ स्तर के मैनेजरों का कद बढ़ जाता है। पोलिंग के दिन वही प्रत्याशियों के असली सेनापति होते हैं। 23 फरवरी के दिन होने वाले चुनाव में अपने प्रत्याशी के सिर जीत का सेहरा बंधवाने के लिए समर्थक दिन रात एक किए हुए हैं। प्रचार की समय सीमा समाप्त होने के बाद से ही अपने नेता के आदेश पर कार्यकर्ताओं की फौज अपने गांवों में डट गई है। वह गांव में बनने वाले समीकरण के बारे में पल-पल की रिपोर्ट अपने प्रत्याशी को दे रहे हैं। डोर टू डोर मतदाताओं से संपर्क कर अपने प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने में वह अभी भी जुटे हुए हैं। सपा को छोड़ भाजपा, बसपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थक गुपचुप तरीके से दोनों विधानसभा में अपना प्रचार कर रहे हैं।
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हर दलों में मैसेंजर की भूमिका में भी कई लोग दिखते हैं। जो यहां का संदेश इधर-उधर कर रहे हैं। कई लोगों ने विरोधी दलों के चाल की काट खोजने के लिए उनके सुर में सुर मिलाते हुए साथ होने की कसमें भी खा लिए। ताकि उनकी रणनीति की जानकारी हो सके और वह उसकी काट खोज सकें।
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मतदाताओं की खामोशी बढ़ाती रही बेचैनी
चुनाव में मतदाताओं की अंतिम समय तक खामोशी प्रत्याशियों के समर्थकों को बेकरार करती रही। गांव व शहरी मतदाताओं ने अंतिम दिन तक वोट मांगने पहुंचे नेता व उनके समर्थकों के समर्थन में ही अपना मत देने का वादा करते रहे लेकिन वह किसको मत देंगे। यह कोई समझ नहीं सका। इससे नेताजी के साथ ही उनके समर्थक खासे परेशान रहे।