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आतंकी फंडिंग : संजय के रिश्तेदार की तलाश में फिर धमकी एटीएस
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 31 Mar 2018 12:28 AM IST
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गिरफ्तार किए गए आरोपी।
- फोटो : amar ujala
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आतंकी फंडिंग में संजय सरोज और नीरज मिश्रा को जेल भेजने के बाद गुरुवार रात संजय के रिश्तेदार की तलाश में एटीएस फिर पृथ्वीगंज इलाके में आ धमकी। टीम के लोग फंडिंग के मामले में संजय के एक रिश्तेदार की तलाश करते रहे। हालांकि वह नहीं मिला। इस पर टीम लौट गई। एटीएस संजय के पास से बरामद 27 पासबुक के आधार पर अन्य लोगों के भी खाते खंगाल रही है। शक है कि उसने ओमप्रकाश वनवासी के अलावा कुछ और लोगों के खाते से आतंकियों को फंडिंग की हैं। उधर, एटीएस की ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद आतंकी फंडिंग के लिए जिस बैंक में ओमप्रकाश वनवासी का खाता खुला था, उसके कर्मचारी भी सहमे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो एटीएस बैंक में पिछले दो सालों के भीतर खोले गए खातों की बारीकी से जांच कर रही है।
आतंकियों को फंडिंग करने के मामले में एटीएस ने नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज निवासी संजय सरोज व नीरज मिश्रा को जेल भेजा है। इनके साथ ईंट भट्ठा मजदूर ओमप्रकाश वनवासी निवासी राजापुर औवार और चंपतपुर निवासी सुधाकर तिवारी को भी उठाया गया था। ओमप्रकाश के नाम से खुलवाए गए खाते में नेपाल और बंग्लादेश से रुपये मंगाकर टेरर फंडिंग की गई थी। ओमप्रकाश के नाम से खुले खाते में सुधाकर तिवारी को गारंटर बनाया गया था।
पूछताछ के बाद एटीएस ने सुधाकर और ओमप्रकाश को सरकारी गवाह बनाने के बाद छोड़ दिया। गुरुवार की देर रात एटीएस संजय के एक रिश्तेदार की तलाश में फिर नगर कोतवाली के महेरीपुरनपुर गांव पहुंच गई। हालांकि काफी तलाश के बाद भी वह नहीं मिला। शक है कि वह भी संजय के साथ टेरर फंडिंग में शामिल था। हालांकि इस बारे में कोई कु छ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
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संजय के घरवालों से दूरी बना रहे रिश्तेदार
एटीएस की छानबीन और टेरर फंडिंग में संजय सरोज को जेल भेजे की घटना के बाद रिश्तेदारों और परिचितों ने उसके घर से दूरी बना ली हैॅ। घर आने की बात तो दूर अब परिजनों से लोग फोन पर बात करने से भी कतरा रहे हैं। उन्हें डर है कि एटीएस उनके यहां भी पूछताछ के लिए न पहुंच जाए। संजय के कई करीबी तो घर छोडक़र फरार हो गए हैं।
टाइनी शाखा में खुलवाए थे ज्यादातर खाते
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज और नीरज मिश्रा ने पहले आंवले का कारोबार शुरू किया। किसानों से बाग खरीदने व आंवले तोड़वाने के बाद वह उन्हें पैसे भी नहीं देता था। उसका रूतबा देखकर किसान शिकायत करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते थे। अब संजय के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो लोग धीरे-धीरे मुंह खोल रहे हैं।
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज ने वर्ष 2012 में सबसे पहले आंवला खरीदने का कारोबार शुरू किया। पृथ्वीगंज कोट के नरेंद्र प्रताप सिंह की आंवला की बाग 12 हजार रुपये में तय की। पांच हजार रुपये देने के बाद आंवला तोड़वाना शुरू कर दिया था। फिर बाकी पैसे नहीं दिए। बाद रुपये मांगने पर धमकी देने लगा। इसके बाद संजय ने शैलेंद्र सिंह की आंवले की बाग 80 हजार रुपये में तय की। महज 20 हजार रुपये ही दिए। ऐसे दर्जनों किसानों की आंवले की बाग उसने ली और रुपये नहीं दिए।
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आतंकियों को फंडिंग करने के मामले में एटीएस ने नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज निवासी संजय सरोज व नीरज मिश्रा को जेल भेजा है। इनके साथ ईंट भट्ठा मजदूर ओमप्रकाश वनवासी निवासी राजापुर औवार और चंपतपुर निवासी सुधाकर तिवारी को भी उठाया गया था। ओमप्रकाश के नाम से खुलवाए गए खाते में नेपाल और बंग्लादेश से रुपये मंगाकर टेरर फंडिंग की गई थी। ओमप्रकाश के नाम से खुले खाते में सुधाकर तिवारी को गारंटर बनाया गया था।
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पूछताछ के बाद एटीएस ने सुधाकर और ओमप्रकाश को सरकारी गवाह बनाने के बाद छोड़ दिया। गुरुवार की देर रात एटीएस संजय के एक रिश्तेदार की तलाश में फिर नगर कोतवाली के महेरीपुरनपुर गांव पहुंच गई। हालांकि काफी तलाश के बाद भी वह नहीं मिला। शक है कि वह भी संजय के साथ टेरर फंडिंग में शामिल था। हालांकि इस बारे में कोई कु छ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
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संजय के घरवालों से दूरी बना रहे रिश्तेदार
एटीएस की छानबीन और टेरर फंडिंग में संजय सरोज को जेल भेजे की घटना के बाद रिश्तेदारों और परिचितों ने उसके घर से दूरी बना ली हैॅ। घर आने की बात तो दूर अब परिजनों से लोग फोन पर बात करने से भी कतरा रहे हैं। उन्हें डर है कि एटीएस उनके यहां भी पूछताछ के लिए न पहुंच जाए। संजय के कई करीबी तो घर छोडक़र फरार हो गए हैं।
टाइनी शाखा में खुलवाए थे ज्यादातर खाते
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज और नीरज मिश्रा ने पहले आंवले का कारोबार शुरू किया। किसानों से बाग खरीदने व आंवले तोड़वाने के बाद वह उन्हें पैसे भी नहीं देता था। उसका रूतबा देखकर किसान शिकायत करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते थे। अब संजय के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो लोग धीरे-धीरे मुंह खोल रहे हैं।
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज ने वर्ष 2012 में सबसे पहले आंवला खरीदने का कारोबार शुरू किया। पृथ्वीगंज कोट के नरेंद्र प्रताप सिंह की आंवला की बाग 12 हजार रुपये में तय की। पांच हजार रुपये देने के बाद आंवला तोड़वाना शुरू कर दिया था। फिर बाकी पैसे नहीं दिए। बाद रुपये मांगने पर धमकी देने लगा। इसके बाद संजय ने शैलेंद्र सिंह की आंवले की बाग 80 हजार रुपये में तय की। महज 20 हजार रुपये ही दिए। ऐसे दर्जनों किसानों की आंवले की बाग उसने ली और रुपये नहीं दिए।