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Pratapgarh News: सुझाव पर अमल नहीं, दवाओं का नाम साफ लिखने से बच रहे डॉक्टर

Sat, 19 Aug 2023 08:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Updated Sat, 19 Aug 2023 08:36 PM IST
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Suggestions are not implemented, doctors are avoiding writing the names of medicines clearly
प्रताप बहादुर चिकित्सालय में डॉ. द्वारा लिखी गई दवाएं। संवाद
आरोप-कमीशन वाली लिखते हैं बाजार की महंगी दवा, सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर संचालक ही पढ़ पाते हैं दवा का नाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। एनएमसी यानी कि नेशनल मेडिकल कमीशन दिशा निर्देश और सुझाव पर जिले के अधिकांश चिकित्सक अमल नहीं कर रहे हैं। मरीजों के ओपीडी पर्चा पर डॉक्टर दवाओं के साफ साफ नाम लिखने से बच रहे हैं। इससे मरीज व उनके तीमारदार दवा का नाम नहीं पढ़ पा रहे हैं। आरोप है कि कमीशन वाली दवाएं पर्चे पर लिखी जा रही हैं। अस्पताल से बाहर बाजार में मिलने वाली महंगी दवा का नाम सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर संचालक ही पढ़ पाते हैं।
एनएमसी ने गाइड लाइन जारी की है कि डॉक्टर जो दवा लिखे मरीज या उनके तीमारदार भी दवा का नाम पढ़ सकें। इतना ही नहीं, जेनरिक दवाएं लिखे जाने के निर्देश हैं। डाॅ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज के अधिकांश चिकित्सक निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर साहब दवा का नाम साफ नहीं लिखते हैं। इसमें कुछ नाम तो पढ़ने में नहीं आते हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर के संचालक पर्चा देखते ही समझ जाते हैं।
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कई बार मरीजों को किसी खास दवा के लिए दुकानों पर भटकना पड़ता है। एनएमसी की नई गाइड लाइन में साफ कहा है कि जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 30 से लेकर 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। इसलिए डॉक्टरों को चाहिए कि इस श्रेणी में केवल जेनरिक दवा ही मरीजों को लिखें। इसके अलावा ऐसी दवा का नाम लिखें, जो छोटे बाजारों के मेडिकल स्टोरों पर आसानी से उपलब्ध हों।
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एनएमसी ने दिए हैं ये सुझाव

- केवल जेनरिक, गैर मालिकाना दवाओं का ही नाम लिखें

- तर्कसंगत और किफायती दवाएं लिखें

- दवाओं के दुष्प्रभाव को देखते हुए उतनी ही दवा लिखें, जितनी जरूरी हो

- निश्चित खुराक संयोजन का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करें

- दवा विक्रेताओं को समझाएं कि वे केवल जेनरिक दवा रखें और उसी का विक्रय करें
- ब्रांडेड जेनरिक दवाएं लिखने से बचें

- ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं की समानता के बारे में मेडिकल छात्रों, मरीज व जनता को बताएं

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नए नियम के पीछे सोच सही हो सकती है पर तरीका गलत है। यह कार्य बिना सोचे-समझे किया जा रहा है। इससे मरीजों का नुकसान होगा। मौजूदा समय में जेनरिक दवाओं की उपलब्धता नहीं है। पहले इसकी उपलब्धता व गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जाए। ब्रांडेड कंपनियों की दवा व दर की जांच सरकार करे और गलत व मनमानी मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

डॉ. इम्तियाज, आईएमए सचिव


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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को पहले से जेनरिक दवा लिखने का निर्देश दिया गया है। अब दवा का नाम साफ लिखने को कहा गया है। सरकार के नियमों का पालन कराया जाएगा।


- डॉ.रमेश पांडेय, सीएमएस
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सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों को जेनरिक दवा लिखने का नियम पहले से है। दवाओं का फार्मूला स्पष्ट लिखने के नियम का पालन कराया जाएगा। सरकार का ध्यान जेनरिक दवा से मरीजों हो फायदा पहुंचाने का है।

- डॉ.जीएम शुक्ल, सीएमओ।

प्रताप बहादुर चिकित्सालय में डॉ. द्वारा लिखी गई दवाएं। संवाद

प्रताप बहादुर चिकित्सालय में डॉ. द्वारा लिखी गई दवाएं। संवाद

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