{"_id":"62bf43072e0b631cd67060e8","slug":"state-university-undergraduate-masters-students-will-do-research-pratapgarh-news-ald336366742","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य विश्वविद्यालय : स्नातक-परास्नातक के विद्यार्थी करेंगे शोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य विश्वविद्यालय : स्नातक-परास्नातक के विद्यार्थी करेंगे शोध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीए, बीएससी, बीकाम और परास्नातक के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई केवल पारंपरिक विषयों तक ही सीमित नहीं रहेगी। स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्हें शोध अध्ययन भी कराया जाएगा। स्नातक एवं परास्नातक के कोर्स को इस तरह से तैयार किया गया है, जिससे उनके लिए बाद में पीएचडी करना आसान हो जाएगा।
प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय वर्ष 2022-23 में स्नातक के विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष में सर्टिफिकेट, द्वितीय वर्ष में डिप्लोमा, तृतीय वर्ष में स्नातक डिग्री के साथ लघु शोध कराया जाएगा। लघु शोध परियोजना परीक्षा प्रणाली लागू होने से विद्यार्थियों को शोध के विषय मे जानकारी हो सकेगी। तृतीय वर्ष में लघु शोध परियोजना मात्र क्वालीफाइंग होगी। लघु शोध परियोजना का मूल्यांकन विभागाध्यक्ष के अतिरिक्त प्राचार्य द्वारा नियुक्त दो आंतरिक परीक्षकों द्वारा किया जाएगा।
वहीं, विश्वविद्यालय ने परास्नातक में दीर्घ परियोजना प्रणाली लागू की है। परास्नातक के चौथे सेमेस्टर में दीर्घ शोध परियोजना का प्रश्न पत्र होगा। जिसका मूल्यांकन विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त दो बाह्य परीक्षकों द्वारा किया जाएगा। दीर्घ शोध परियोजना के लिए विद्यार्थियों को विषय आवंटन दूसरे सेमेस्टर में ही कर दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थियों को एक-एक शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाएगा। जिसकी सहायता से विद्यार्थी शोध परियोजना को पूरा कर सकेंगे। इसका मूल्यांकन चौथे सेमेस्टर में होगा।
विज्ञापन
स्नातक के तृतीय वर्ष और परास्नातक के चौथे वर्ष में शोध परियोजना प्रणाली लागू की गई है। स्नातक में लघु शोध परियोजना जबकि परास्नातक में दीर्घ शोध परियोजना प्रणाली लागू की गई है। सत्र 2022 से ही छात्रों को शोध की पढ़ाई करनी होगी। डॉ. अखिलेश सिंह,कुलपति, राज्य विवि
विज्ञापन
प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय वर्ष 2022-23 में स्नातक के विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष में सर्टिफिकेट, द्वितीय वर्ष में डिप्लोमा, तृतीय वर्ष में स्नातक डिग्री के साथ लघु शोध कराया जाएगा। लघु शोध परियोजना परीक्षा प्रणाली लागू होने से विद्यार्थियों को शोध के विषय मे जानकारी हो सकेगी। तृतीय वर्ष में लघु शोध परियोजना मात्र क्वालीफाइंग होगी। लघु शोध परियोजना का मूल्यांकन विभागाध्यक्ष के अतिरिक्त प्राचार्य द्वारा नियुक्त दो आंतरिक परीक्षकों द्वारा किया जाएगा।
विज्ञापन
वहीं, विश्वविद्यालय ने परास्नातक में दीर्घ परियोजना प्रणाली लागू की है। परास्नातक के चौथे सेमेस्टर में दीर्घ शोध परियोजना का प्रश्न पत्र होगा। जिसका मूल्यांकन विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त दो बाह्य परीक्षकों द्वारा किया जाएगा। दीर्घ शोध परियोजना के लिए विद्यार्थियों को विषय आवंटन दूसरे सेमेस्टर में ही कर दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थियों को एक-एक शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाएगा। जिसकी सहायता से विद्यार्थी शोध परियोजना को पूरा कर सकेंगे। इसका मूल्यांकन चौथे सेमेस्टर में होगा।
विज्ञापन
स्नातक के तृतीय वर्ष और परास्नातक के चौथे वर्ष में शोध परियोजना प्रणाली लागू की गई है। स्नातक में लघु शोध परियोजना जबकि परास्नातक में दीर्घ शोध परियोजना प्रणाली लागू की गई है। सत्र 2022 से ही छात्रों को शोध की पढ़ाई करनी होगी। डॉ. अखिलेश सिंह,कुलपति, राज्य विवि