{"_id":"5cc1f470bdec225ef047693b","slug":"sp-s-bycycle-missing-form-evm-after-22-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"22 वर्ष बाद ईवीएम से गायब सपा की साइकिल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
22 वर्ष बाद ईवीएम से गायब सपा की साइकिल
Thu, 25 Apr 2019 11:25 PM IST
विनोद सिंह
Pratapgarh
Pratapgarh
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 25 Apr 2019 11:25 PM IST
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में 22 वर्ष बाद सपा की साइकिल वाला चुनाव चिन्ह ईवीएम से गायब रहेगा। बसपा से गठबंधन होने के बाद 17वीं लोकसभा के लिए बसपा प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सपा बसपा का समर्थन कर रही है। इस चुनाव में सपा नेता और कार्यकर्ताओं की फौज चुनावी जंग में शामिल जरूर है, मगर सेनापति की कमान बसपा के हाथ में है।
विज्ञापन
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 1992 में जनता दल से अलग होकर समाजवादी पार्टी का गठन किया था। पार्टी के गठन के बाद 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता दल छोड़कर सपा का दामन थामने वाले राजा अभय प्रताप सिंह साइकिल चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़े थे, लेकिन वह तीसरे स्थान पर चले गए थे। हालांकि बाद में राजा अभय प्रताप सिंह ने सपा का साथ छोड़ दिया था। एक वर्ष बाद 1999 में लोकसभा का चुनाव फिर हुआ। इस बार सपा ने मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाया। जनता दल से विधायक रहे श्याद अली को मैदान में उतारा। वह साइकिल चुनाव निशान पर मैदान में उतरे। हालांकि उन्हेेें भी जीत हासिल नहीं हो सकी। वर्ष 2004 के चुनाव में सपा ने राजाभैया के करीबी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी पर दांव लगाया। इस बार सपा ने जीत का परचम लहराया।
विज्ञापन
कांग्रेस की सांसद रत्ना सिंह को हराकर वह संसद पहुंचे। वर्ष 2009 के चुनाव में सपा ने फिर अक्षय प्रताप सिंह को मैदान में उतारा, लेकिन वह कांग्रेस की रत्ना सिंह से हार गए। इस बार चुनाव में वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने बाहरी प्रमोद कुमार पटेल को मैदान में उतारा। वह चौथे स्थान पर चले गए। सपा के 22 साल के सियासी सफर में पहली बार प्रतापगढ़ की लड़ाई में साइकिल चुनाव चिह्न गायब है। पदाधिकारी और कार्यकर्ता लाल टोपी लगाए जनसंपर्क करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अगुवाई करने के लिए हाथी वाला झंडाधारी आगे खड़ा है। ईवीएम से पहली बार साइकिल निशान गायब रहेगा।
विज्ञापन
पहले गठबंधन में जद प्रत्याशी को मिली थी हार
सपा ने पहला लोकसभा चुनाव जनता दल से गठबंधन कर 1996 में लड़ा था। उस दौरान जनता दल से भोला सिंह मैदान में उतरे थे। सपा ने उन्हें समर्थन दिया था। सपा के पहलेे चुनाव में भी प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र के मतपत्र में साइकिल चुनाव निशान गायब था। इस चुनाव में गठबंधन प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था।
वोट गलत पड़ने पर ‘टेस्ट वोट’ बनेगा सहारा
चुनाव आयोग के निर्देश पर शुरू हुआ टेस्टिंग वोट से मतदान
प्रतापगढ़। लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदाताओं को टेस्टिंग वोट डालने का मौका मिलने जा रहा है। टेस्टिंग वोट वही मतदाता डाल सकेंगे जो ईवीएम में दूसरे प्रत्याशी को वोट पहुंचने की शिकायत पीठाशीन अधिकारी से करेंगे।
लोकसभा चुनाव में इस बार ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके द्वारा मतदान के बाद वीवीपैट में सात सेकेंड के लिए यह पर्ची दिखेगी। इस दौरान मतदाता द्वारा दिए गए मत के अलावा किसी दूसरे प्रत्याशी के चुनाव चिन्ह पर मत देखने को मिलता है तो मतदाता उस वोट को चैलेंज कर सकता है, उसका टेस्टिंग वोट डलवाया जा सकता है। यदि शिकायत झूठी साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टेस्टिंग वोट से पूर्व मतदाता को भरना होगा फार्म
मतदाता ने जिस प्रत्याशी को वोट देने के लिए ईवीएम में बटन दबाया गया और वीवीपैट मशीन किसी अन्य प्रत्याशी को वोट देने की सूचना दे रही है तो निर्वाचन प्रक्रिया नियमावली के तहत मतदाता टेस्टिंग वोट की प्रक्रिया को अपना सकता है। इससे पूर्व पीठासीन अधिकारी को मतदाता फार्म 49 भर कर देना होगा। साथ ही फार्म पर लिखी शर्तों को मानना होगा। इसके बाद मतदाता शर्तों से संतुष्ट होता है तो आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं, मतदाता की शिकायत सही मिलने पर मतदान को तुरंत रुकवा दिया जाएगा और इसकी सूचना रिटर्निंग ऑफिसर को दे दी जाएगी। यदि मतदाता की शिकायत गलत मिलती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी और उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। जिसे छह माह तक की सजा हो सकती है।
किसी अन्य प्रत्याशी को वोट जाने पर मतदाता की शिकायत पर आयोग के निर्देश पर टेस्टिंग वोट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसे लिए मतदाता को फार्म भरकर देना होगा और सभी शर्त माननी होगी। यदि मतदाता की शिकायत झूठी साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीठासीन अधिकारी को फार्म 17ए मतदाता की पूर्ण जानकारी के साथ भरना होगा। जिसे मतगणना के दौरान ईवीएम से संबंधित वोट को निरस्त कर दिया जाएगा।
शत्रोहन वैश्य, उप जिला निर्वाचन अधिकारी/ अपर जिलाधिकारी