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Pratapgarh News: आसमान का ख्वाब दिखाकर पैरों तले जमीन खींच ली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 01:27 AM IST
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Showing dreams of the sky, the ground was pulled from under my feet
इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) तक का सफर तय करने में छात्रों की मदद के लिए बनाई गई स्पेस लैब ताले में बंद है। छात्रों को जिस स्पेस लैब के उपकरणों के जरिये अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी मिलनी थी, वह अब धूल फांक रहे हैं। आलम ये है कि विद्यार्थी क्या शिक्षक भी भूल चुके हैं कि जिले में प्रदेश की चौथी और मंडल की पहली स्पेस लैब भी स्थापित हुई है। शिक्षा विभाग ने बच्चों को इसरो तक ले जाने का ख्वाब दिखाकर पैरों तले जमीन खींच ली है।
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सदर तहसील क्षेत्र के बीआरसी केंद्र सुखपाल नगर में बीते वर्ष 21 जून को सदर विधायक राजेंद्र मौर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव, तत्कालीन डीएम संजीव रंजन और सीडीओ नवनीत सेहारा ने सर सीवी रमन स्पेस लैब का उद्घाटन किया था। स्पेस लैब को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवेश में पल रहे बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ ही अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी मुहैया कराना था। उन्हें इसरो तक ले जाना ताकि वह वैज्ञानिक सोच को विकसित कर सकें।
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पंचायत निधि से स्पेस लैब की स्थापना कराई गई थी। लैब में इसरो के वैज्ञानिकों से लाइव सेशन कराया जाना था। लाइव सेशन तो दूर की बात है लैब के संचालन के लिए विज्ञान शिक्षकों को सही से प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। प्रशिक्षण के अभाव में शिक्षक बच्चों को स्पेस लैब का बेहतर ज्ञान नहीं दे पा रहे हैं।
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प्रशिक्षण के दो माह बाद बच्चों को इसरो ले जाने का दावा भी किया गया लेकिन वह भी कागजी ही निकाला। ऐसे में वैज्ञानिक बनने का सपना संजोए बच्चों की इच्छा पर विभाग की लापरवाही भारी पड़ रही है।











10 लाख के उपकरण फांक रहे धूल, लैब में लटका ताला







स्पेस लैब में करीब 10 लाख रुपये की लागत से आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इसरो से जुड़े रॉकेट, सैटेलाइट, खगोल विज्ञान के टेलीस्कोप, खगोलिकी किट के सहारे सौरमंडल और तारामंडल का अद्भुत नजारा देखने की सुविधा दी गई है। ड्रोन के साथ साइंस टेक्नोलॉजी का ज्ञान बच्चों को दिया जाना था लेकिन स्पेस लैब में उपकरण धूल फांक रहे हैं और लैब के दरवाजे पर ताला लटक रहा है।











विभाग बोला- नहीं मिला प्रशिक्षण, संस्था ने कहा कराई थी कार्यशाला

सदर बीईओ संतोष श्रीवास्तव ने कहना है कि ग्योमिका स्पेस संस्था, लखनऊ ने लैब की स्थापना के बाद एआरपी और विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण नहीं दिया है। वहीं, संस्था निदेशक गोविंद यादव ने बताया कि करीब 11 एआरपी को दो दिवसीय कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।


उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ की लैब से प्रेरणा लेकर फतेहपुर में लैब स्थापित की गई। यहां के तीन बच्चे इसरो तक पहुंच चुके हैं। सिद्धार्थ नगर में स्थापित स्पेस लैब को राष्ट्रपति पुरस्कार और यहां प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों को मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
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