{"_id":"582ca0af4f1c1bd53b8ffb8a","slug":"seventy-persent-market-down-in-belha","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेल्हा बाजार में बिक्री 70 फीसदी गिरी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेल्हा बाजार में बिक्री 70 फीसदी गिरी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:41 PM IST
विज्ञापन
न्यूूज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के सबसे बड़े बाजार चौक में नोट बंदी का जबरदस्त असर है। जनरल स्टोर, कपड़ा, और गल्ला की बिक्री में 70 फीसदी तक गिरावट आई है। रेस्टोरेंट के व्यवसाय पर भी असर पड़ा है। थोक विक्रेता बाहर से सामान नहीं मंगा रहे हैं। बुधवार को बाजार में अधिकांश थोक विक्रेताओं की दुकानें तो खुली रहीं, लेकिन आर्डर के नाम पर गिने चुने लोग ही आए। दुकानों पर बैठे व्यापारी पुराने पांच सौ और हजार के नोटों को बदलने को लेकर परेशान दिखे। बुधवार को अमर उजाला संवाददाता ने थोक बाजार का जायजा लिया। पेश है रिपोर्ट...
ग्राहक तो छोड़िए फुटकर दुकानदार भी नहीं आ रहे
वेंकटेश ट्रेडर्स : समय 1:10 बजे
पवन पैलेस कम्पाउंड में किराना के थोक विक्रेता राजेंद्र अग्रवाल दुकान पर अकेले बैठकर ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे। प्रतिदिन सुबह दस बजे से रात आठ बजे तक भीड़ लगी रहती थी, मगर नोट बंदी के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि शादी-विवाह का सीजन चल रहा है। दुकान पर वनस्पति घी, देशी घी, रिफाइंड ऑयल, सरसों का तेल आदि शाम तक बचती नहीं थी। अब ग्राहक छोड़िए, फुटकर दुकानदार भी नहीं आ रहे हैं। कुछ देर बाद दो कस्टमर आए तो राजेंद्र उनकी लिस्ट देखने में व्यस्त हो गए, लेकिन ग्राहकों ने नए नोट न होने से तत्काल भुगतान करने से मना कर दिया।
अब ग्राहक डोसा की जगह ले रहे चाय की चुस्की
स्नेह होटल एंड विष्णु रेस्टोरेंट बाबागंज। समय दोपहर 1:22 बजे
‘नोट बंदी की सूचना : पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट नहीं लिए जाएंगे।’ रेस्टोरेंट के बाहर टंगा नोटिस देखकर अधिकांश लोग सीढ़ियां चढ़ने से पहले ही पीछे मुड़ जा रहे थे। रेस्टोरेंट के अंदर पट्टी के राकेश तिवारी और कंधई के दुर्गेश त्रिपाठी चाय की चुस्कियां ले रहे थे। दुर्गेश ने बताया कि उनके पास पांच सौ व हजार रुपये के नोट हैं, मगर सौ और पचास रुपये के नोट नहीं हैं। होटल आने से पहले डोसा खाने का इरादा बनाया था, मगर पहुंचने पर नोटिस देखकर इरादा बदला और चाय की चुस्कियों से काम चला रहे हैं। मैनेजर रवि कुमार ने बताया कि दुकानदारी पूरी तरह चौपट हो गई है। दिनभर दुकान में सन्नाटा पसरा रहता है, इससे 70 फीसदी बिक्री पर असर पड़ा है।
विज्ञापन
गरमाने से पहले ठंडा हो गया कपड़ों का व्यवसाय
भइया की दुकान, पंजाबी मार्केट। समय दोपहर 1.30 बजे।
जिले के प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसायी भइया की दुकान का सन्नाटा टीवी की आवाज तोड़ रही थी। दुकान संचालक परमजीत सिंह और चार नौकर टेलीविजन देखने में ही मशगूल थे। कभी दिन में चाय पीने की फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन नोटबंदी के बाद कस्टमर गायब हैं। लोग आपस में बात ही कर रहे थे कि दहिलामऊ निवासी रेनू सिंह अपने बेटे रबी के साथ दुकान पहुंची और कपड़ों को खरीदने के पहले बोल पड़ी- भइया पांच-पांच सौ के नोट हैं। परमजीत सिंह ने हाथ जोड़ा, और कहा कि बहनजी नोट बंदी की खबर आपने ने भी पढ़ी होगी।
उधारी व ई-पेमेंट ने बचा रखी है इज्जत
एसके इंटरप्राइजेज चिलबिला। समय 2:10 बजे।
गड़वारा बाजार के फुटकर दुकानदार रामचंद्र गुप्ता ड्राईफ्रू ट, मसाला, सुपाड़ी, चीनी, तेल खरीदने के बाद पांच सौ और एक हजार के नोट देने लगे। पुराने नोट लेने से मना करने पर दलील दी कि नियमित ग्राहक हैं। नकदी के अभाव में उधार सामान ले जा रहे हैं। इस पर थोक विक्रेता श्रीकिशोर अग्रवाल ने सामान ले जाने की इजाजत तो दे दी, मगर उन्होंने ई-पेमेंट या चेक से भुगतान करने को कहा। श्रीकिशोर ने बताया कि फुटकर दुकानदार विश्वास पात्र हैं, उन्हें उधार देने में कोई गुरेज नहीं है, मगर समस्या इस बात की है कि उधार कितने का और कब तक दिया जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि 70 प्रतिशत व्यवसाय में कमी आई है। उधार की बिक्री और ई-पेमेंट ने ही कुछ इज्जत बचा रखी है।
शाहबान थोक भंडार, रामपुर बावलीकेला, सेब व संतरा का थोक कारोबार सत्तर फीसदी तक घट गया है। थोक की गोदाम पर शाहबान के साथ थोक व्यवसाय करने वाले मोे. जलील व मो. सईद नए नोट पर चर्चा कर रहे थे। बोले, नोट बंदी का फैसला करने से पहले तैयारी करनी चाहिए थी। अचानक से नोट चलना बंद हो गई और नई नोट की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर फलों के कारोबार पर हो रहा है।
विज्ञापन
ग्राहक तो छोड़िए फुटकर दुकानदार भी नहीं आ रहे
वेंकटेश ट्रेडर्स : समय 1:10 बजे
पवन पैलेस कम्पाउंड में किराना के थोक विक्रेता राजेंद्र अग्रवाल दुकान पर अकेले बैठकर ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे। प्रतिदिन सुबह दस बजे से रात आठ बजे तक भीड़ लगी रहती थी, मगर नोट बंदी के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि शादी-विवाह का सीजन चल रहा है। दुकान पर वनस्पति घी, देशी घी, रिफाइंड ऑयल, सरसों का तेल आदि शाम तक बचती नहीं थी। अब ग्राहक छोड़िए, फुटकर दुकानदार भी नहीं आ रहे हैं। कुछ देर बाद दो कस्टमर आए तो राजेंद्र उनकी लिस्ट देखने में व्यस्त हो गए, लेकिन ग्राहकों ने नए नोट न होने से तत्काल भुगतान करने से मना कर दिया।
विज्ञापन
अब ग्राहक डोसा की जगह ले रहे चाय की चुस्की
स्नेह होटल एंड विष्णु रेस्टोरेंट बाबागंज। समय दोपहर 1:22 बजे
‘नोट बंदी की सूचना : पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट नहीं लिए जाएंगे।’ रेस्टोरेंट के बाहर टंगा नोटिस देखकर अधिकांश लोग सीढ़ियां चढ़ने से पहले ही पीछे मुड़ जा रहे थे। रेस्टोरेंट के अंदर पट्टी के राकेश तिवारी और कंधई के दुर्गेश त्रिपाठी चाय की चुस्कियां ले रहे थे। दुर्गेश ने बताया कि उनके पास पांच सौ व हजार रुपये के नोट हैं, मगर सौ और पचास रुपये के नोट नहीं हैं। होटल आने से पहले डोसा खाने का इरादा बनाया था, मगर पहुंचने पर नोटिस देखकर इरादा बदला और चाय की चुस्कियों से काम चला रहे हैं। मैनेजर रवि कुमार ने बताया कि दुकानदारी पूरी तरह चौपट हो गई है। दिनभर दुकान में सन्नाटा पसरा रहता है, इससे 70 फीसदी बिक्री पर असर पड़ा है।
विज्ञापन
गरमाने से पहले ठंडा हो गया कपड़ों का व्यवसाय
भइया की दुकान, पंजाबी मार्केट। समय दोपहर 1.30 बजे।
जिले के प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसायी भइया की दुकान का सन्नाटा टीवी की आवाज तोड़ रही थी। दुकान संचालक परमजीत सिंह और चार नौकर टेलीविजन देखने में ही मशगूल थे। कभी दिन में चाय पीने की फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन नोटबंदी के बाद कस्टमर गायब हैं। लोग आपस में बात ही कर रहे थे कि दहिलामऊ निवासी रेनू सिंह अपने बेटे रबी के साथ दुकान पहुंची और कपड़ों को खरीदने के पहले बोल पड़ी- भइया पांच-पांच सौ के नोट हैं। परमजीत सिंह ने हाथ जोड़ा, और कहा कि बहनजी नोट बंदी की खबर आपने ने भी पढ़ी होगी।
उधारी व ई-पेमेंट ने बचा रखी है इज्जत
एसके इंटरप्राइजेज चिलबिला। समय 2:10 बजे।
गड़वारा बाजार के फुटकर दुकानदार रामचंद्र गुप्ता ड्राईफ्रू ट, मसाला, सुपाड़ी, चीनी, तेल खरीदने के बाद पांच सौ और एक हजार के नोट देने लगे। पुराने नोट लेने से मना करने पर दलील दी कि नियमित ग्राहक हैं। नकदी के अभाव में उधार सामान ले जा रहे हैं। इस पर थोक विक्रेता श्रीकिशोर अग्रवाल ने सामान ले जाने की इजाजत तो दे दी, मगर उन्होंने ई-पेमेंट या चेक से भुगतान करने को कहा। श्रीकिशोर ने बताया कि फुटकर दुकानदार विश्वास पात्र हैं, उन्हें उधार देने में कोई गुरेज नहीं है, मगर समस्या इस बात की है कि उधार कितने का और कब तक दिया जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि 70 प्रतिशत व्यवसाय में कमी आई है। उधार की बिक्री और ई-पेमेंट ने ही कुछ इज्जत बचा रखी है।
शाहबान थोक भंडार, रामपुर बावलीकेला, सेब व संतरा का थोक कारोबार सत्तर फीसदी तक घट गया है। थोक की गोदाम पर शाहबान के साथ थोक व्यवसाय करने वाले मोे. जलील व मो. सईद नए नोट पर चर्चा कर रहे थे। बोले, नोट बंदी का फैसला करने से पहले तैयारी करनी चाहिए थी। अचानक से नोट चलना बंद हो गई और नई नोट की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर फलों के कारोबार पर हो रहा है।