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नियम ठेंगे पर, मासूमों की जान से खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 04 Aug 2016 11:56 PM IST
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टेंपो, मैजिक में भूसे की तरह भरकर ढोए जा रहे स्कूली बच्चे
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भदोही जनपद में स्कूली बच्चों से भरी मैजिक व ट्रेन की टक्कर के बाद दस बच्चों की मौत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं। स्कूली वाहनों के लिए जारी शासन व प्रशासन का दिशा निर्देश ठेंगे पर रखते हुए मासूमों की जान के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। टेंपो, विक्रम, मिनी बस, मैजिक से बच्चोें को स्कूल लाया जाता है। अभी तक महज 159 वाहनों को ही स्कूल के लिए पंजीकृत कराया गया है। जबकि करीब सात सौ की संख्या में हर दिन वाहन बच्चों को स्कूल पहुंचाने व घर छोड़ने में लगे हैं।
शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के साथ ही स्कूली बच्चों को स्कूल लाने व घर पहुंचाने के लिए तमाम वाहन स्कूलों में अटैच कर लिए जाते हैं। स्कूलों में उन्हीं वाहनों को अटैच किया जाता है जो यातायात के लिए सभी मानक पूरा करते हैं। जनपद में सात सौ से अधिक मान्यता प्राप्त प्राइमरी व मिडिल स्कूल संचालित हैं। इसके अलावा इंटर कालेजों की संख्या भी पांच सौ के करीब है। अधिकांश स्कूलों में दूरदराज से बच्चों को लाया जाता है। स्कूल प्रशासन ऐसे बच्चों को घर से लाने व छोड़ने के लिए वाहनों को अटैच कर लेते हैं। स्कूली वाहनों को मानक पूरा करना होता है। ऐसे वाहनों का पंजीकरण कामर्शियल में होना आवश्यक होता है। परमिट बना होना चाहिए। इसके अलावा वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
ऐसे चारपहिया वाहनों को ही स्कूली वाहन के लिए पंजीकृत किया जाता है। शासन व प्रशासन के नियम कानून को ठेंगे पर रखते हुए स्कूल, कालेज संचालक मनमानी पर उतारू हैं। नियम कानून को ठेंगे पर रखते हुए टेंपो, मैजिक, ई-रक्शा, प्राइवेट बस, जीप व रिक्शे को स्कूली बच्चों को लाने व छोड़ने के लिए अटैच किया गया है। ऐसे वाहनों में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चों को भूसे की तरह भरकर ले जाया जाता है। खास बात यह है कि उपसंभागीय विभाग के कार्यालय में महज 159 स्कूली वाहनों का पंजीकरण कराया गया है। जबकि पूरे जनपद में सात सौ से अधिक वाहन हर दिन स्कूली बच्चों को लाने व छोड़ने में लगे हुए हैं। ऐसे वाहनों को एआरटीओ विभाग में पंजीकृत नहीं कराया गया। जिससे हर माह विभाग को स्कूल संचालक लाखों रुपये चूना लगा रहे हैं।
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शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के साथ ही स्कूली बच्चों को स्कूल लाने व घर पहुंचाने के लिए तमाम वाहन स्कूलों में अटैच कर लिए जाते हैं। स्कूलों में उन्हीं वाहनों को अटैच किया जाता है जो यातायात के लिए सभी मानक पूरा करते हैं। जनपद में सात सौ से अधिक मान्यता प्राप्त प्राइमरी व मिडिल स्कूल संचालित हैं। इसके अलावा इंटर कालेजों की संख्या भी पांच सौ के करीब है। अधिकांश स्कूलों में दूरदराज से बच्चों को लाया जाता है। स्कूल प्रशासन ऐसे बच्चों को घर से लाने व छोड़ने के लिए वाहनों को अटैच कर लेते हैं। स्कूली वाहनों को मानक पूरा करना होता है। ऐसे वाहनों का पंजीकरण कामर्शियल में होना आवश्यक होता है। परमिट बना होना चाहिए। इसके अलावा वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
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ऐसे चारपहिया वाहनों को ही स्कूली वाहन के लिए पंजीकृत किया जाता है। शासन व प्रशासन के नियम कानून को ठेंगे पर रखते हुए स्कूल, कालेज संचालक मनमानी पर उतारू हैं। नियम कानून को ठेंगे पर रखते हुए टेंपो, मैजिक, ई-रक्शा, प्राइवेट बस, जीप व रिक्शे को स्कूली बच्चों को लाने व छोड़ने के लिए अटैच किया गया है। ऐसे वाहनों में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चों को भूसे की तरह भरकर ले जाया जाता है। खास बात यह है कि उपसंभागीय विभाग के कार्यालय में महज 159 स्कूली वाहनों का पंजीकरण कराया गया है। जबकि पूरे जनपद में सात सौ से अधिक वाहन हर दिन स्कूली बच्चों को लाने व छोड़ने में लगे हुए हैं। ऐसे वाहनों को एआरटीओ विभाग में पंजीकृत नहीं कराया गया। जिससे हर माह विभाग को स्कूल संचालक लाखों रुपये चूना लगा रहे हैं।
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