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ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा रोजगार
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Feb 2018 11:17 PM IST
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गांव की महिलाओं को जीविका चलाने के लिए अब सिर पर मिट्टी नहीं ढोनी होगी। अशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करके मनपसंद रोजगार मुहैया कराया जाएगा। ग्रामीण महिलाओं का यह सपना साकार करने के लिए पहले चरण में गौरा और मानधाता को चयनित करके महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। गांव की अशिक्षित महिलाओं को अब मोटा काम नहीं करना होगा। महिलाओं का जीवन स्तर उठाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना प्रभावी ढंग से लागू हो रही है।
अगले वित्तीय वर्ष में योजना को अमली-जामा पहनाने के लिए पहले चरण में गौरा और मानधाता विकास खंडों का चयन किया गया है। दरअसल, गांव की अनपढ़ महिलाएं जीविकोपार्जन के लिए मनरेगा में जॉबकार्ड बनवाकर मिट्टी ढोने का कार्य कर रही हैं। ऐसी कामकाजी महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अधिकाधिक समूहों का गठन किया जाएगा। 20 महिलाओं के गठित होने वाले समूह में शासन की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इससे महिलाओं को समूह में और व्यक्तिगत रूप से रोजगार स्थापित करने के लिए ऋण भी प्रदान किया जाएगा। महिला समूहों के माध्यम से महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं दिलाया जाएगा, बल्कि समाज में उनकी पहचान भी बनाई जाएगी। अगरबत्ती, मोमबत्ती, अचार-मुरब्बा, जैम, कढ़ाई-बुनाई से संबंधित प्रशिक्षण देकर उन्हें मनपसंद रोजगार करने की छूट मिलेगी।
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समूह बनाने की नहीं होगी सीमा
मानधाता और गौरा ब्लाकों में स्वयं सहायता समूह बनाने की कोई सीमा नहीं होगी। एक समूह में अधिकतम बीस महिलाएं शामिल होंगी। जिले और ब्लाक स्तर पर तैनात होने वाले अधिकारी इन समूहों की निगरानी करेंगे।
अनुदान पर बैंकों से मिलेगा ऋण
स्वयं सहायता समूहों को अनुदान पर बैंकों से ऋण प्रदान किया जाएगा। अनुदान की राशि से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। साथ ही सामुदायिक सहभागिता के कार्यक्रमों को बल मिलेगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की उन महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाएगा, जो मोटा काम करके
परिवार की जीविका चलाती हैं। ऐसी महिलाओं को स्वरोजगार से प्रेरित करके आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
अरविंद सिंह, परियोजना निदेशक
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अगले वित्तीय वर्ष में योजना को अमली-जामा पहनाने के लिए पहले चरण में गौरा और मानधाता विकास खंडों का चयन किया गया है। दरअसल, गांव की अनपढ़ महिलाएं जीविकोपार्जन के लिए मनरेगा में जॉबकार्ड बनवाकर मिट्टी ढोने का कार्य कर रही हैं। ऐसी कामकाजी महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अधिकाधिक समूहों का गठन किया जाएगा। 20 महिलाओं के गठित होने वाले समूह में शासन की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
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इससे महिलाओं को समूह में और व्यक्तिगत रूप से रोजगार स्थापित करने के लिए ऋण भी प्रदान किया जाएगा। महिला समूहों के माध्यम से महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं दिलाया जाएगा, बल्कि समाज में उनकी पहचान भी बनाई जाएगी। अगरबत्ती, मोमबत्ती, अचार-मुरब्बा, जैम, कढ़ाई-बुनाई से संबंधित प्रशिक्षण देकर उन्हें मनपसंद रोजगार करने की छूट मिलेगी।
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समूह बनाने की नहीं होगी सीमा
मानधाता और गौरा ब्लाकों में स्वयं सहायता समूह बनाने की कोई सीमा नहीं होगी। एक समूह में अधिकतम बीस महिलाएं शामिल होंगी। जिले और ब्लाक स्तर पर तैनात होने वाले अधिकारी इन समूहों की निगरानी करेंगे।
अनुदान पर बैंकों से मिलेगा ऋण
स्वयं सहायता समूहों को अनुदान पर बैंकों से ऋण प्रदान किया जाएगा। अनुदान की राशि से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। साथ ही सामुदायिक सहभागिता के कार्यक्रमों को बल मिलेगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की उन महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाएगा, जो मोटा काम करके
परिवार की जीविका चलाती हैं। ऐसी महिलाओं को स्वरोजगार से प्रेरित करके आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
अरविंद सिंह, परियोजना निदेशक