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विद्यालय रसूलहा के नाम से, चल रहा दो किमी दूर मोलनापुर में
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:16 AM IST
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शुक्रवार को इलाहाबाद में जेडी की मंडलीय समीक्षा बैठक के दौरान छह अध्यापकों की तैनाती के बाद भी मात्र सात बच्चों के नामांकन को लेकर चर्चा में आए उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रसूलहा के बारे में एक और खुलासा हुआ है। यह विद्यालय अभिलेखों में रसूलहा के नाम से स्वीकृत है और संचालन इस गांव से दो किलोमीटर दूर मोलनापुर में हो रहा है। इतना ही नहीं स्कूल की हालत बेहद खराब है। प्रिंसिपल के अलावा कुल छह अध्यापिकाएं तैनात हैं। शनिवार को सिर्फ दो छात्राएं स्कूल आईं। दोनों क्लास में बैठी हुई थीं। उन्हें कोई पढ़ाने वाला नहीं था। चार शिक्षिकाएं एक साथ बाहर बैठकर गप्पे मार रही थीं।
शासन ने बेलखरनाथ विकास खंड के रसूलहा गांव में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्वीकृत किया था। तीस मार्च 2011 को गांव के तत्कालीन प्रधान ने विद्यालय के निर्माण के लिए भूमि प्रबंध समिति की बैठक कर करीब दो बीघा जमीन उपलब्ध कराई। बाद में इस जमीन को लेकर विवाद हो गया और मामला कोर्ट पहुंच गया।
नतीजतन, यहां भवन का निर्माण नहीं हो सका। बाद में रसूलहा से करीब दो किमी दूर मोलनापुर में आनन-फानन में भवन का निर्माण कराकर विद्यालय का संचालन शुरू कर दिया गया। अभी तक भवन कार्यदायी संस्था द्वारा इसे हैंडओवर नहीं किया गया है। विद्यालय के भवन के निर्माण को अभी पांच साल भी पूरे नहीं हुए हैं और छत टपकने लगी है। पूरा भवन जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गया है। बिजली-पानी तक की व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में यहां प्रिंसिपल रामअवध के अलावा छह अध्यापिकाएं रिचा ऋतंभरा, वर्षा गुप्ता, कमल यादव, कल्पना शर्मा, नीरज देवी और वंदना की तैनाती है। शनिवार को मात्र दो छात्राएं कक्षा नौ की रिया दूबे और कक्षा दस की काजल गौड़ ही स्कूल आई थीं। दोनों एक कमरे में चुपचाप बैठी थीं। जबकि चार शिक्षिकाएं बाहर कुर्सी पर बैठकर बात करने में मशगूल थीं। प्रिंसिपल रामअवध भी मौजूद नहीं थे। फोन पर हुई बातचीत में बताया कि वह डीआईओएस के यहां हैं।
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उन्होंने बताया कि शिक्षिका वंदना बिना सूचना के गायब हैं, जबकि नीरज देवी तबीयत खराब होने के चलते विद्यालय नहीं आईं। उन्होंने फोन पर इसकी जानकारी दी थी। प्रिंसिपल ने बताया कि उनके पास इस विद्यालय के अलावा शिवगढ़ के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इमलीडांड़ का भी चार्ज है। ऐसे में वह पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। विद्यालय में इतने कम बच्चों के नामांकन को लेकर कहा कि बगल में ही प्राइवेट इंटर कॉलेज है। वहां के प्रबंधक का इतना प्रभाव कि लोग अपने बच्चों को वहीं भेजते हैं। मैं घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करूंगा और बच्चों को विद्यालय भेजने की अपील करूंगा। उधर, मोलनापुर गांव के जगदीश तिवारी, विनोद मिश्रा, दयाशंकर मिश्रा आदि ने बताया कि विद्यालय में तैनात शिक्षिकाएं बगल के प्राथमिक विद्यालय में बैठकर समय काटती हैं।
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शासन ने बेलखरनाथ विकास खंड के रसूलहा गांव में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्वीकृत किया था। तीस मार्च 2011 को गांव के तत्कालीन प्रधान ने विद्यालय के निर्माण के लिए भूमि प्रबंध समिति की बैठक कर करीब दो बीघा जमीन उपलब्ध कराई। बाद में इस जमीन को लेकर विवाद हो गया और मामला कोर्ट पहुंच गया।
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नतीजतन, यहां भवन का निर्माण नहीं हो सका। बाद में रसूलहा से करीब दो किमी दूर मोलनापुर में आनन-फानन में भवन का निर्माण कराकर विद्यालय का संचालन शुरू कर दिया गया। अभी तक भवन कार्यदायी संस्था द्वारा इसे हैंडओवर नहीं किया गया है। विद्यालय के भवन के निर्माण को अभी पांच साल भी पूरे नहीं हुए हैं और छत टपकने लगी है। पूरा भवन जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गया है। बिजली-पानी तक की व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में यहां प्रिंसिपल रामअवध के अलावा छह अध्यापिकाएं रिचा ऋतंभरा, वर्षा गुप्ता, कमल यादव, कल्पना शर्मा, नीरज देवी और वंदना की तैनाती है। शनिवार को मात्र दो छात्राएं कक्षा नौ की रिया दूबे और कक्षा दस की काजल गौड़ ही स्कूल आई थीं। दोनों एक कमरे में चुपचाप बैठी थीं। जबकि चार शिक्षिकाएं बाहर कुर्सी पर बैठकर बात करने में मशगूल थीं। प्रिंसिपल रामअवध भी मौजूद नहीं थे। फोन पर हुई बातचीत में बताया कि वह डीआईओएस के यहां हैं।
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उन्होंने बताया कि शिक्षिका वंदना बिना सूचना के गायब हैं, जबकि नीरज देवी तबीयत खराब होने के चलते विद्यालय नहीं आईं। उन्होंने फोन पर इसकी जानकारी दी थी। प्रिंसिपल ने बताया कि उनके पास इस विद्यालय के अलावा शिवगढ़ के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इमलीडांड़ का भी चार्ज है। ऐसे में वह पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। विद्यालय में इतने कम बच्चों के नामांकन को लेकर कहा कि बगल में ही प्राइवेट इंटर कॉलेज है। वहां के प्रबंधक का इतना प्रभाव कि लोग अपने बच्चों को वहीं भेजते हैं। मैं घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करूंगा और बच्चों को विद्यालय भेजने की अपील करूंगा। उधर, मोलनापुर गांव के जगदीश तिवारी, विनोद मिश्रा, दयाशंकर मिश्रा आदि ने बताया कि विद्यालय में तैनात शिक्षिकाएं बगल के प्राथमिक विद्यालय में बैठकर समय काटती हैं।