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करोड़ों खर्च, गरीब अब भी बेघर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 22 May 2016 11:35 PM IST
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कांशीराम शहरी आवास योजना के अंतर्गत पट्टी कस्बे में करोड़ों की लागत से बने भवन धूल फांक रहे हैं। करीब चार साल पहले बनकर तैयार गरीबों के आशियाने पर अराजकतत्वों ने कब्जा जमा रखा है। प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक गरीबों को आवास नहीं आवंटित किया गया है। जिम्मेदार इस मामले में चुप्पी साध रखी है।
कांशीराम शहरी आवासीय योजना के तहत बीबीपुर और रायपुर रोड के समीप लगभग 75-75 कमरों की दो इमारतें 2012 में बनकर तैयार हो गई। इसे लाटरी के माध्यम से गरीबों को आवंटित किया जाना था। बताया जाता है कि कुछ नामों की सूची बनकर तैयार भी हो गई थी। इसी बीच विधानसभा चुनाव के कारण इस प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया। चुनाव बाद भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
डूडा व नगर पंचायत के बीच आवास हैंडओवर करने को लेकर काफी समय तक ऊहापोह की स्थिति बनी रही आखिरकार आवास आवंटन की पूरी प्रक्रिया को ही बंद कर दिया गया। आवेदन करने वाले गरीबों ने कई बार अधिकारियों से लेकर नेताओं की चौखट पर फरियाद की, लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला। थक हारकर लोग चुप बैठ गए, जिसका परिणाम यह हुआ कि चार करोड़ 72 लाख की लागत से तैयार भवन आवारा पशु व अराजकतत्वों का अड्डा बन गया है। चर्चा यह भी है कि सेटिंग के द्वारा कु छ लोगों को आवास आवंटित कर दिया गया है।
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कांशीराम शहरी आवासीय योजना के तहत बीबीपुर और रायपुर रोड के समीप लगभग 75-75 कमरों की दो इमारतें 2012 में बनकर तैयार हो गई। इसे लाटरी के माध्यम से गरीबों को आवंटित किया जाना था। बताया जाता है कि कुछ नामों की सूची बनकर तैयार भी हो गई थी। इसी बीच विधानसभा चुनाव के कारण इस प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया। चुनाव बाद भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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डूडा व नगर पंचायत के बीच आवास हैंडओवर करने को लेकर काफी समय तक ऊहापोह की स्थिति बनी रही आखिरकार आवास आवंटन की पूरी प्रक्रिया को ही बंद कर दिया गया। आवेदन करने वाले गरीबों ने कई बार अधिकारियों से लेकर नेताओं की चौखट पर फरियाद की, लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला। थक हारकर लोग चुप बैठ गए, जिसका परिणाम यह हुआ कि चार करोड़ 72 लाख की लागत से तैयार भवन आवारा पशु व अराजकतत्वों का अड्डा बन गया है। चर्चा यह भी है कि सेटिंग के द्वारा कु छ लोगों को आवास आवंटित कर दिया गया है।
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