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अनदेखी से प्रसूताएं परेशान

Sun, 23 Apr 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Sun, 23 Apr 2017 12:22 AM IST
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चिकित्सकों और नर्सों की कमी से जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इमरजेंसी में भी एक बेड पर तीन-तीन प्रसव पीड़िताओं को लेटा दिया जाता है। वहीं पर्याप्त बेड न होने के कारण बगैर पंखा, कूलर और एसी के रैन बसेरा में बैठा दिया जाता है।
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स्वतंत्र प्रभार स्वास्थ्य चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह के गृह जनपद में प्रसव पीड़िताओं को जिला महिला अस्पताल में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे किसी तरह अस्पताल पहुंचती हैं। वहीं अस्पताल में उनको चिकित्सक भर्ती तो कर लेते हैं, मगर बेड न होने के कारण बगैर पंखा, कूलर और एसी के रैन बसेरा में बैठा देते हैं। इमरजेंसी में भी एक बेड पर तीन-तीन प्रसव पीड़िताओं को लेटा दिया जाता है। जिला महिला अस्पताल में दस बेड का इमरजेंसी वार्ड बना हुआ है। तीन बेड का लेबर रूम है। ऐसे में एक बेड पर दो से तीन प्रसव पीड़िताओं को भर्ती किया जाता है। शेष लोगों को समय लगने की बात कहकर डॉक्टर बाहर रैन बसेरा में बैठने को कह देती हैं।
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यहां न तो कूलर लगा हुआ है और न ही एसी। इतना ही नहीं सामने से रैन बसेरा भी खुला हुआ है। रैन बसेरा में ही प्रसव पीड़िताओं के साथ आने वाले उनके परिवार के लोग भी बैठते हैं। दर्द से वे कराहती रहती हैं, मगर चिकित्सक समय-समय पर उनकी जांच नहीं करते हैं। आरोप है कि समय पर लेबर रूम में नहीं बुलाते हैं। बार-बार उनके परिवार के लोग चिकित्सक से कहते हैं तो वे तत्काल ऑपरेशन कराने की बात करने लगती हैं। बताया जाता है कि डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी में आने वाली गर्भवती महिलाओं को भी परेशान होना पड़ता है। वहीं सीएमएस, जिला महिला अस्पताल संतोष त्रिपाठी का कहना है किलेबर रूम और ओटी में पंखा के साथ एसी भी लगा हुआ है। शेष वार्ड में कूलर लगाया जाना है। खराब पड़े कूलर की मरम्मत कराई जा रही है। चिकित्सकों की कमी के चलते प्रसव पीड़िताओं को दिक्कतें होती है। शासन से चिकित्सक के साथ स्टाफ नर्स की मांग की गई है।
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