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जीएसटी लगने के बाद घटे खाद्य सामग्रियों के दाम
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jun 2018 11:46 PM IST
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जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) लागू होने से बड़े व्यापारियों का भले ही नुकसान हो रहा है, मगर आम ग्राहकों के लिए रोजमर्रा की चीजों के दाम घटे हैं। खानपान की सामग्रियों के दामों में गिरावट आई हैं। जीएसटी लागू होने के बाद बडे़ व्यापारियों का भी व्यवसाय बढ़ा है, मगर जिस अनुपात में व्यवसाय बढ़ा है उसके मुताबिक कमाई नहीं हो रही है। चीनी को छोड़ दिया जाए तो देशी घी, तेल, रिफाइंड और डालडा के दाम भी स्थिर हुए हैं। जीएसटी बड़े कारोबारियों के लिए मुसीबत बना है, लेकिन छोटे कारोबारियों पर इसका कोई असर नहीं है।
जीएसटी के एक साल पूरा होने पर बड़े व्यापारी भले ही ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनी परेशानी मान रहे हैं, मगर आम ग्राहक और छोटे कारोबारियों के लिए काफी फायदेमंद है। दाल, चावल, आटा, सूजी, चायपत्ती, टूथपेस्ट, धनिया, मिर्चा, गरम मसाला, नमकीन, बिस्किट और चाकलेट के दामों में कमी आई है। थोक कारोबारी अनुराग ट्रेेडर्स की माने तो फुटकर खरीद में इन वस्तुओं पर एक से दस रुपये तक की कमी आई है। देशी घी, तेल, रिफाइंड और वनस्पति घी के थोक विक्रेता राजेंद्र कुमार अग्रवाल बताते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद खाद्य तेलों के दाम स्थिर हो गए हैं। जीएसटी के पूर्व खाद्य पदार्थों के दामों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हो रही थी। उन्होंने बताया कि जीएसटी के बाद व्यवसाय में बढ़ोतरी हुई है, मगर आमदनी का प्रतिशत कम हो गया है। आमदनी कम होने का कारण आनलाइन खरीदारी और बिक्री है।
15 दिन में चीनी के दाम आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल बढ़े
जिले के पान मसाला, गुटखा, सिगरेट के शौकीनों ने अब तक का रिकार्ड तोड़ दिया है। जीएसटी लागू होने के बाद 28 प्रतिशत टैक्स लगने से महंगाई बढ़ी है, मगर शौकीनों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। दुकानदारों की माने तो जीएसटी लागू होने के बाद मांग डेढ़ गुना बढ़ गई है। हालांकि धूम्रपान पर टैक्स की चोरी में रोक लगाने में जीएसटी पूरी तरह सफल नहीं है।
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एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद अगर किसी व्यवसाय में वृद्धि हुई है, तो वह धूम्रपान से जुड़ा व्यवसाय है। 28 प्रतिशत टैक्स लगने के बाद धूम्रपान के चीजें महंगी हुई हैं, मगर इसके बाद भी मांग बढ़ी है। इससे यह प्रतीत होता है कि धूम्रपान करने वाले शौकीनों ने अपना मिजाज नहीं बदला है। यही वजह है कि पान मसाला, बीडी, सिगरेट और गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। धूम्रपान करने वालों की संख्या में इजाफा होने का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि अधिकांश नशे की सामग्री काफी सस्ती आती है, जो शहर से गांव तक आसानी से मिल जाती है। धूम्रपान से जुड़ी सामग्री पान की दुकान, किराना की दुकान, जनरल स्टोर की दुकानों से बिक्री हो रही है। धूम्रपान के थोक विक्रेता अनुराग कुमार की माने तो अन्य उत्पादों की अपेक्षा धूम्रपान सामग्री की बिक्री में डेढ़ गुने का इजाफा हुआ है। हालांकि इसमें चोरी-छिपे भी बिक्री हो रही है। जो सीधे फुटकर दुकानदारों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच रहा है। फिलहाल इस पर रोक लगाने के लिए पहल करना होगा।
थोक विक्रेताओं को ई-फाइलिंग से मिलनी चाहिए छूट
प्रतापगढ़। थोक विक्रेताओं के लिए ई-फाइलिंग करना सबसे बड़ी मुसीबत है। महीने की बीस तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती है, बड़े दुकानदारों की मुसीबत बढ़ने लगती है। फिलहाल इसका भरपूर लाभ छोटे दुकानदार उठा रहे हैं। उन्हें न तो जीएसटी का झंझट और न टैक्स जमा करने का चिंता रहती है।
थोक विक्रेताओं की सबसे बड़ी मुसीबत ऑनलाइन टैक्स की अदायगी करना होता है। कूलर, एसी, पंखा के व्यवसायी सरदार करन सिंह ने बताया कि जीएसटी में बड़े कारोबारियों को थोड़ी राहत देने की जरूरत है। अगर व्यापारियों को माह के अंत में ई-फाइलिंग का मौका दिया जाए, तो इससे उनका बोझ कुछ कम हो सकता है। घी, तेल, चीनी के थोक विक्रेता राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यवसाय बढ़ा है, खरीदारी में कोई कमी नहीं आई है। हां इतना अवश्य है कि वास्तविक टैक्स अदा करने के बाद थोक विक्रेताओं को वह लाभ नहीं मिल रहा है जो पहले मिलता था। शहर के व्यवसायी धनंजय पांडेय ने बताया कि छोटे दुकानदारों को 20,000 रुपये तक का सामान खरीदने पर जीएसटी का पंजीयन नहीं देना होता है। इससे छोटे दुकानदार बीस हजार रुपये से कम का सामान खरीदते हैं। इससे सही ढंग से वह लाभ कमा रहे हैं। व्यापारी ओमजी गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारी चिंता मुक्त हो गए हैं और ग्राहकों को भी विश्वास हो गया है कि जीएसटी के बाद दामों में इजाफा हुआ है। अमोल सिंह बताते हैं कि व्यापारियों को पहले अलग-अलग टैक्स अदा करना होता था, मगर अब एक साथ टैक्स का भुगतान करने से व्यापारी चिंतामुक्त रहते हैं।
कूलर, एसी और मोबाइल मंहगा, फिर भी गरम है बाजार
जीएसटी लागू होने के बाद एसी, कूलर, पंखा और मोबाइल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद भी खरीदने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। शादी-विवाह के सीजन के अलावा आम दिनों में भी इन उपकरणों की खरीद में कोई कमी नहीं आई है। हां इतना अवश्य हुआ है कि बिजली के उपकरणों की बिक्री कम हो गई है।
जीएसटी लागू होने के पूर्व फ्रिज, कूलर, पंखा, एसी, एलईडी, मोबाइल पर 14 प्रतिशत टैक्स लगता था। जीएसटी लागू होने के बाद इन उपकरणों पर टैक्स बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है। इससे इन उपकरणों के दाम 2,000 से 3,500 रुपये तक बढ़ गए हैं। फिर भी खरीदने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। प्रीतम सिंह एंड संस के संचालक करन सिंह की माने तो जीएसटी और डीजल के दामों में इजाफा होेने से फ्रिज, एससी, कूलर, पंखा के दामों में इजाफा हुआ है, मगर खरीदने वालों की संख्या में कोई नहीं आई है। ऐसा भी नहीं है कि लोग सस्ता सामान खोजते हैं, बल्कि ब्रांडेड सामान लेना अधिक पसंद करते हैं। इतना अवश्य है कि आमदनी का जो अंतर पहले था, वह अब कुछ कम हो गया है। मगर इससे ग्राहकों को सीधा फायदा हो रहा है। मोबाइल विक्रेता अमोल सिंह की माने तो 20,000 रुपये तक का मोबाइल खरीदने पर 18 प्रतिशत और उससे ऊपर खरीदने पर 22 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। मगर इसके बाद भी मोबाइल बिक्री में कोई गिरावट नहीं आई है। जीएसटी के बाद बिजली के उपकरण के बाजार में तेजी से गिरावट आई है। दरअसल, नोटबंदी के बाद से नए भवनों के निर्माण में आई कमी से बिजली के उपकरणों की बिक्री भी प्रभावित हुई है।
शादी-विवाह में गिफ्ट करना बना फैशन
वाणिज्य कर विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने वाले जो व्यापारी अभी तक अपना टर्नओवर लाखों में दिखा रहे थे, ऑनलाइन बिलिंग होते ही वह अचानक करोड़पति बन गए हैं। दरअसल, ऑनलाइन बिलिंग होने से वह चोरी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में जिले में करोड़पति व्यापारियों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है।
वाणिज्य कर विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने वाला प्रत्येक व्यापारी जीएसटी में रजिस्टर्ड है। इससे वह प्रांत में या प्रांत के बाहर कही भी कोई सामान खरीदता है, या बेचता है, तो वह ऑनलाइन ही कर सकता है। इससे जहां टैक्स की चोरी नहीं होती है, वहीं उत्पाद के धरपकड़ और कोई भी कार्रवाई का भय नहीं रहता है। जीएसटी लागू होने के बाद जिले के 4,459 व्यापारियों ने नए सिरे से पंजीकरण कराया। हालांकि पूर्व में रजिस्टर्ड लगभग डेढ़ हजार संस्थाएं बाहर हो र्गइं। जीएसटी में रजिस्टर्ड अधिकांश व्यापारियों का टर्नओवर करोड़ों में पहुंच गया है। दरअसल, इसके पूर्व यही व्यापारी करोड़ों में व्यवसाय करते थे, मगर कर की चोरी करने के लिए टर्नओवर कम दिखाते थे।
बिल देने से कतराते हैं छोटे दुकानदार
जिले के थोक विक्रेता बिल देने में परहेज तो नहीं करते हैं, मगर छोटे दुकानदार जीएसटी बताकर ग्राहकों का शोषण करने से बाज नहीं आ रहे। मनमाने ढंग से सामान बेचने वाले दुकानदार कभी-कभी ग्राहकों की मजबूरी का भी फायदा उठाते हैं।
शहर के करनपुर निवासी विनोद कुमार श्रीवास्तव की माने तो बडे़ दुकानदारों के यहां कोई भी सामान लीजिए, वह तुरंत बिल पकड़ा देते हैं, मगर छोटे दुकानदारों से अधिक सामान खरीदने पर भी वह बिल देने से बचना चाहते हैं। दहिलामऊ निवासी अमर सिंह चौहान कहते हैं कि जीएसटी ने बड़े दुकानदारों पर नकेल कसी, मगर छोटे व्यापारियों पर अभी अंकुश नहीं लग पाया है। इससे वह मनमानी करते रहते हैं। शुकुलपुर निवासी शिवकुमार मिश्र की मानें तो दुकानदार टैक्स की चोरी कितना करता है, इस बात की जानकारी ग्राहक को नहीं होती है, वह सिर्फ अपनी आवश्यकता के अनुसार सामग्री खरीदता है।
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जीएसटी के एक साल पूरा होने पर बड़े व्यापारी भले ही ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनी परेशानी मान रहे हैं, मगर आम ग्राहक और छोटे कारोबारियों के लिए काफी फायदेमंद है। दाल, चावल, आटा, सूजी, चायपत्ती, टूथपेस्ट, धनिया, मिर्चा, गरम मसाला, नमकीन, बिस्किट और चाकलेट के दामों में कमी आई है। थोक कारोबारी अनुराग ट्रेेडर्स की माने तो फुटकर खरीद में इन वस्तुओं पर एक से दस रुपये तक की कमी आई है। देशी घी, तेल, रिफाइंड और वनस्पति घी के थोक विक्रेता राजेंद्र कुमार अग्रवाल बताते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद खाद्य तेलों के दाम स्थिर हो गए हैं। जीएसटी के पूर्व खाद्य पदार्थों के दामों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हो रही थी। उन्होंने बताया कि जीएसटी के बाद व्यवसाय में बढ़ोतरी हुई है, मगर आमदनी का प्रतिशत कम हो गया है। आमदनी कम होने का कारण आनलाइन खरीदारी और बिक्री है।
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15 दिन में चीनी के दाम आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल बढ़े
जिले के पान मसाला, गुटखा, सिगरेट के शौकीनों ने अब तक का रिकार्ड तोड़ दिया है। जीएसटी लागू होने के बाद 28 प्रतिशत टैक्स लगने से महंगाई बढ़ी है, मगर शौकीनों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। दुकानदारों की माने तो जीएसटी लागू होने के बाद मांग डेढ़ गुना बढ़ गई है। हालांकि धूम्रपान पर टैक्स की चोरी में रोक लगाने में जीएसटी पूरी तरह सफल नहीं है।
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एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद अगर किसी व्यवसाय में वृद्धि हुई है, तो वह धूम्रपान से जुड़ा व्यवसाय है। 28 प्रतिशत टैक्स लगने के बाद धूम्रपान के चीजें महंगी हुई हैं, मगर इसके बाद भी मांग बढ़ी है। इससे यह प्रतीत होता है कि धूम्रपान करने वाले शौकीनों ने अपना मिजाज नहीं बदला है। यही वजह है कि पान मसाला, बीडी, सिगरेट और गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। धूम्रपान करने वालों की संख्या में इजाफा होने का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि अधिकांश नशे की सामग्री काफी सस्ती आती है, जो शहर से गांव तक आसानी से मिल जाती है। धूम्रपान से जुड़ी सामग्री पान की दुकान, किराना की दुकान, जनरल स्टोर की दुकानों से बिक्री हो रही है। धूम्रपान के थोक विक्रेता अनुराग कुमार की माने तो अन्य उत्पादों की अपेक्षा धूम्रपान सामग्री की बिक्री में डेढ़ गुने का इजाफा हुआ है। हालांकि इसमें चोरी-छिपे भी बिक्री हो रही है। जो सीधे फुटकर दुकानदारों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच रहा है। फिलहाल इस पर रोक लगाने के लिए पहल करना होगा।
थोक विक्रेताओं को ई-फाइलिंग से मिलनी चाहिए छूट
प्रतापगढ़। थोक विक्रेताओं के लिए ई-फाइलिंग करना सबसे बड़ी मुसीबत है। महीने की बीस तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती है, बड़े दुकानदारों की मुसीबत बढ़ने लगती है। फिलहाल इसका भरपूर लाभ छोटे दुकानदार उठा रहे हैं। उन्हें न तो जीएसटी का झंझट और न टैक्स जमा करने का चिंता रहती है।
थोक विक्रेताओं की सबसे बड़ी मुसीबत ऑनलाइन टैक्स की अदायगी करना होता है। कूलर, एसी, पंखा के व्यवसायी सरदार करन सिंह ने बताया कि जीएसटी में बड़े कारोबारियों को थोड़ी राहत देने की जरूरत है। अगर व्यापारियों को माह के अंत में ई-फाइलिंग का मौका दिया जाए, तो इससे उनका बोझ कुछ कम हो सकता है। घी, तेल, चीनी के थोक विक्रेता राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यवसाय बढ़ा है, खरीदारी में कोई कमी नहीं आई है। हां इतना अवश्य है कि वास्तविक टैक्स अदा करने के बाद थोक विक्रेताओं को वह लाभ नहीं मिल रहा है जो पहले मिलता था। शहर के व्यवसायी धनंजय पांडेय ने बताया कि छोटे दुकानदारों को 20,000 रुपये तक का सामान खरीदने पर जीएसटी का पंजीयन नहीं देना होता है। इससे छोटे दुकानदार बीस हजार रुपये से कम का सामान खरीदते हैं। इससे सही ढंग से वह लाभ कमा रहे हैं। व्यापारी ओमजी गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारी चिंता मुक्त हो गए हैं और ग्राहकों को भी विश्वास हो गया है कि जीएसटी के बाद दामों में इजाफा हुआ है। अमोल सिंह बताते हैं कि व्यापारियों को पहले अलग-अलग टैक्स अदा करना होता था, मगर अब एक साथ टैक्स का भुगतान करने से व्यापारी चिंतामुक्त रहते हैं।
कूलर, एसी और मोबाइल मंहगा, फिर भी गरम है बाजार
जीएसटी लागू होने के बाद एसी, कूलर, पंखा और मोबाइल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद भी खरीदने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। शादी-विवाह के सीजन के अलावा आम दिनों में भी इन उपकरणों की खरीद में कोई कमी नहीं आई है। हां इतना अवश्य हुआ है कि बिजली के उपकरणों की बिक्री कम हो गई है।
जीएसटी लागू होने के पूर्व फ्रिज, कूलर, पंखा, एसी, एलईडी, मोबाइल पर 14 प्रतिशत टैक्स लगता था। जीएसटी लागू होने के बाद इन उपकरणों पर टैक्स बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है। इससे इन उपकरणों के दाम 2,000 से 3,500 रुपये तक बढ़ गए हैं। फिर भी खरीदने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। प्रीतम सिंह एंड संस के संचालक करन सिंह की माने तो जीएसटी और डीजल के दामों में इजाफा होेने से फ्रिज, एससी, कूलर, पंखा के दामों में इजाफा हुआ है, मगर खरीदने वालों की संख्या में कोई नहीं आई है। ऐसा भी नहीं है कि लोग सस्ता सामान खोजते हैं, बल्कि ब्रांडेड सामान लेना अधिक पसंद करते हैं। इतना अवश्य है कि आमदनी का जो अंतर पहले था, वह अब कुछ कम हो गया है। मगर इससे ग्राहकों को सीधा फायदा हो रहा है। मोबाइल विक्रेता अमोल सिंह की माने तो 20,000 रुपये तक का मोबाइल खरीदने पर 18 प्रतिशत और उससे ऊपर खरीदने पर 22 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। मगर इसके बाद भी मोबाइल बिक्री में कोई गिरावट नहीं आई है। जीएसटी के बाद बिजली के उपकरण के बाजार में तेजी से गिरावट आई है। दरअसल, नोटबंदी के बाद से नए भवनों के निर्माण में आई कमी से बिजली के उपकरणों की बिक्री भी प्रभावित हुई है।
शादी-विवाह में गिफ्ट करना बना फैशन
वाणिज्य कर विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने वाले जो व्यापारी अभी तक अपना टर्नओवर लाखों में दिखा रहे थे, ऑनलाइन बिलिंग होते ही वह अचानक करोड़पति बन गए हैं। दरअसल, ऑनलाइन बिलिंग होने से वह चोरी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में जिले में करोड़पति व्यापारियों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है।
वाणिज्य कर विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने वाला प्रत्येक व्यापारी जीएसटी में रजिस्टर्ड है। इससे वह प्रांत में या प्रांत के बाहर कही भी कोई सामान खरीदता है, या बेचता है, तो वह ऑनलाइन ही कर सकता है। इससे जहां टैक्स की चोरी नहीं होती है, वहीं उत्पाद के धरपकड़ और कोई भी कार्रवाई का भय नहीं रहता है। जीएसटी लागू होने के बाद जिले के 4,459 व्यापारियों ने नए सिरे से पंजीकरण कराया। हालांकि पूर्व में रजिस्टर्ड लगभग डेढ़ हजार संस्थाएं बाहर हो र्गइं। जीएसटी में रजिस्टर्ड अधिकांश व्यापारियों का टर्नओवर करोड़ों में पहुंच गया है। दरअसल, इसके पूर्व यही व्यापारी करोड़ों में व्यवसाय करते थे, मगर कर की चोरी करने के लिए टर्नओवर कम दिखाते थे।
बिल देने से कतराते हैं छोटे दुकानदार
जिले के थोक विक्रेता बिल देने में परहेज तो नहीं करते हैं, मगर छोटे दुकानदार जीएसटी बताकर ग्राहकों का शोषण करने से बाज नहीं आ रहे। मनमाने ढंग से सामान बेचने वाले दुकानदार कभी-कभी ग्राहकों की मजबूरी का भी फायदा उठाते हैं।
शहर के करनपुर निवासी विनोद कुमार श्रीवास्तव की माने तो बडे़ दुकानदारों के यहां कोई भी सामान लीजिए, वह तुरंत बिल पकड़ा देते हैं, मगर छोटे दुकानदारों से अधिक सामान खरीदने पर भी वह बिल देने से बचना चाहते हैं। दहिलामऊ निवासी अमर सिंह चौहान कहते हैं कि जीएसटी ने बड़े दुकानदारों पर नकेल कसी, मगर छोटे व्यापारियों पर अभी अंकुश नहीं लग पाया है। इससे वह मनमानी करते रहते हैं। शुकुलपुर निवासी शिवकुमार मिश्र की मानें तो दुकानदार टैक्स की चोरी कितना करता है, इस बात की जानकारी ग्राहक को नहीं होती है, वह सिर्फ अपनी आवश्यकता के अनुसार सामग्री खरीदता है।