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प्रतापगढ़: गांव की खेल प्रतिभाओं को तराशेगी क्रीड़ा भारती
Sat, 09 Mar 2019 12:27 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 09 Mar 2019 12:27 AM IST
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खेलकूद
- फोटो : RajivGupta/AmarUjala
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गांवों की खेल प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में अब दम नहीं तोड़ेंगी। खेल मंत्रालय द्वारा इन प्रतिभाओं को तराशने की पहल शुरू की गई है। आरएसएस की खेल इकाई क्रीड़ा भारती द्वारा परंपरागत खेल मसलन कबड्डी, अखाड़ा, लंबी कूद एवं कुश्ती को लोकप्रिय बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके तहत गांव की खेल प्रतिभाओं को चिह्नित कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आधुनिकता की आपाधापी में परंपरागत खेल अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रहे हैं। गांवों में भी परंपरागत खेलों को लोग भूलते जा रहे हैं। गांव की खेल प्रतिभाएं संसाधनों व विभागीय अनदेखी के चलते दम तोड़ रही हैं। यही वजह है कि प्रतिभा व काबिलियत के बाद भी खिलाड़ी महज गांव तक ही सिमटकर रह जाते हैं।
उन्हें बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता है। जिले में भी कुश्ती,अखाड़ा, लंबी कूद व ऊंची कूद सहित परंपरागत खेलों का बुरा हाल है। संसाधन व प्रशिक्षण के अभाव में प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। मगर, अब जल्द ही जिले में परंपरागत खेलों एवं खिलाड़ियों के दिन बहुरने वाले हैं। खिलाड़ियों को भी संसाधन व कुशल प्रशिक्षण मिलेगा।
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परंपरागत खेल को संजोने के लए प्रदेश के खेल मंत्रालय ने क्रीड़ा भारती इकाई के रूप में कदम बढ़ाया है। क्रीड़ा इकाई ब्लाकवार पदाधिकारी नियुक्त करेगी, जो गांव-गांव खेल प्रतिभाओं को चिह्नित करेंगे। इसके बाद उनकी प्रतिभा के अनुरूप उन्हें प्रशिक्षण देंगे। जिले के 17 ब्लाकों में इस इकाई का गठन होगा। जिनके द्वारा समय-समय पर खेल आयोजन किए जाएंगे।
इसके जरिए गांव के प्रतिभावान खिलाड़ियों का चयन कर जिलास्तरीय, राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा। इस बारे में जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह, जिला संयोजक रवि प्रकाश ने बताया कि क्रीड़ा भारती इकाई का विस्तार शुरू हो गया है। जल्द ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे जिले की खेल प्रतिभाओं को आगे जाने का मौका मिलेगा।
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आधुनिकता की आपाधापी में परंपरागत खेल अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रहे हैं। गांवों में भी परंपरागत खेलों को लोग भूलते जा रहे हैं। गांव की खेल प्रतिभाएं संसाधनों व विभागीय अनदेखी के चलते दम तोड़ रही हैं। यही वजह है कि प्रतिभा व काबिलियत के बाद भी खिलाड़ी महज गांव तक ही सिमटकर रह जाते हैं।
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उन्हें बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता है। जिले में भी कुश्ती,अखाड़ा, लंबी कूद व ऊंची कूद सहित परंपरागत खेलों का बुरा हाल है। संसाधन व प्रशिक्षण के अभाव में प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। मगर, अब जल्द ही जिले में परंपरागत खेलों एवं खिलाड़ियों के दिन बहुरने वाले हैं। खिलाड़ियों को भी संसाधन व कुशल प्रशिक्षण मिलेगा।
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परंपरागत खेल को संजोने के लए प्रदेश के खेल मंत्रालय ने क्रीड़ा भारती इकाई के रूप में कदम बढ़ाया है। क्रीड़ा इकाई ब्लाकवार पदाधिकारी नियुक्त करेगी, जो गांव-गांव खेल प्रतिभाओं को चिह्नित करेंगे। इसके बाद उनकी प्रतिभा के अनुरूप उन्हें प्रशिक्षण देंगे। जिले के 17 ब्लाकों में इस इकाई का गठन होगा। जिनके द्वारा समय-समय पर खेल आयोजन किए जाएंगे।
इसके जरिए गांव के प्रतिभावान खिलाड़ियों का चयन कर जिलास्तरीय, राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा। इस बारे में जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह, जिला संयोजक रवि प्रकाश ने बताया कि क्रीड़ा भारती इकाई का विस्तार शुरू हो गया है। जल्द ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे जिले की खेल प्रतिभाओं को आगे जाने का मौका मिलेगा।