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बिना सफाई के रवाना हो रहीं ट्रेनें
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:38 PM IST
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प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन से खुलने वाली ट्रेनें बिना सफाई के रवाना कर दी जा रही हैं। पैसेंजर ट्रेनों के शौचालयों में पानी न होने से गंदगी फैल रही है। प्रतापगढ़ से पद्मावत एक्सप्रेस, कानपुर इंटरसिटी, लखनऊ और वाराणसी के लिए शटल चलती है। यात्रियों का कहना है कि इन दिनों ट्रेनों की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वीआईपी ट्रेनों में शुमार पद्मावत के कोच में जगह-जगह गंदगी रहती है। सीटों के नीचे कचरा फेंका रहता है। शौचालय और वाश बेसिन में गंदगी फैली रहती है। यात्री कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से कर चुके हैं। कानपुर जाने वाली इंटरसिटी का भी कमोवेश यही हाल है। सफाई के मामले में पैसेंजरों की हालत तो बद से बदतर है। दिनभर कूड़ा करकट बटोरे ट्रेनें रात को स्टेशन पहुंचती हैं और सफाई किये बगैर सुबह वैसे ही रवाना कर दी जाती हैं।
शौचालयों में पानी तक नहीं भरा जा रहा है। अगर यात्री शौच को जाता है पता चलता है कि उसमें पानी ही नहीं है। पद्मावत और इंटरसिटी के शौचालयों में अक्सर इस तरह की समस्या आती है। रात के वक्त जिन कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है वे काम पर ध्यान नहीं देते हैं। पता चला है कि रेलवे ने सफाई और धुलाई का काम ठेके पर दे दिया है। मगर अभी तक ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया है। इसलिये सफाई की समस्या आ रही है। रेलवे के पास उतने कर्मचारी नहीं है कि सभी ट्रेनों की सफाई हो सके। इस बारे में सीडीओ दिनेश यादव का कहना है कि ट्रेनों की सफाई का जिस नये ठेकेदार को दिया गया है। उसने अभी काम शुरू नहीं किया है। उनके पास जो संसाधन उपलब्ध है उनसे ट्रेनों की सफाई का काम लिया जा रहा है। वाशिंग लाइन के अभाव में ट्रेनों की धुलाई लाइन नंबर पांच में कराना मजबूरी है। इससे सारा कचरा ट्रैक पर गिरता है।
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शौचालयों में पानी तक नहीं भरा जा रहा है। अगर यात्री शौच को जाता है पता चलता है कि उसमें पानी ही नहीं है। पद्मावत और इंटरसिटी के शौचालयों में अक्सर इस तरह की समस्या आती है। रात के वक्त जिन कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है वे काम पर ध्यान नहीं देते हैं। पता चला है कि रेलवे ने सफाई और धुलाई का काम ठेके पर दे दिया है। मगर अभी तक ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया है। इसलिये सफाई की समस्या आ रही है। रेलवे के पास उतने कर्मचारी नहीं है कि सभी ट्रेनों की सफाई हो सके। इस बारे में सीडीओ दिनेश यादव का कहना है कि ट्रेनों की सफाई का जिस नये ठेकेदार को दिया गया है। उसने अभी काम शुरू नहीं किया है। उनके पास जो संसाधन उपलब्ध है उनसे ट्रेनों की सफाई का काम लिया जा रहा है। वाशिंग लाइन के अभाव में ट्रेनों की धुलाई लाइन नंबर पांच में कराना मजबूरी है। इससे सारा कचरा ट्रैक पर गिरता है।
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