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प्रतापगढ़ के लालगंज कोतवाली में सिपाही ने खुद को गोली से उड़ाया, मचा हड़कंप

Sat, 26 Sep 2020 01:15 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Sep 2020 01:15 PM IST
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Pratapgarh News: Lalganj Police Station, the canstable shot himself, stirred up
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
लालगंज कोतवाली में तैनात सिपाही आशुतोष यादव (24) ने शुक्रवार शाम बैरक की तीसरी मंजिल पर खुद को गोली से उड़ा दिया। सात घंटे बाद पुलिस को घटना की जानकारी हो सकी। बैरक की तीसरी मंजिल की सीढ़ी पर उसका रक्तरंजित शव मिलने पर हड़कंप मच गया। मृतक सिपाही गाजीपुर जिले का रहने वाला था। सूचना पर पुलिस अधीक्षक भी फोरेंसिक टीम के साथ पहुंचे और घटना का जायजा लिया।  
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गाजीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के खरौना निवासी आशुतोष यादव पुत्र अखिलेश यादव लालगंज कोतवाली में सिपाही था। शुक्रवार को प्रभारी निरीक्षक राकेश भारती के साथ उसकी हमराही में ड्यूटी लगी थी। कार्यालय से एके-47 लेकर वह सुबह 11 बजे निकला। उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। उसका मोबाइल भी बंद था। शाम साढ़े छह बजे एक पुलिसकर्मी बैरक की छत पर गया तो उसका रक्तरंजित शव सीढ़ी पर पड़ा था। करीब सात घंटे बाद पुलिस को घटना की जानकारी हो सकी। बगल में ही उसकी एके-47 पड़ी मिली। बुलेट का एक खोखा भी बरामद हुआ।
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प्रभारी निरीक्षक ने सिपाही का शव मिलने की सूचना अफसरों को दी। इस पर सीओ जगमोहन व अपर पुलिस अधीक्षक दिनेश द्विवेदी मौके पर पहुंचे। करीब एक घंटे बाद पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य भी फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम के साथ पहुंचे और घटना का जायजा लिया। सिपाही के परिजनों को सूचना दे दी गई है। 
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  • सिपाही की मौत को लेकर छानबीन की जा रही है। पूछताछ में साथी सिपाहियों ने किसी कारण वश उसके परेशान रहने की जानकारी दी है। कुछ दिनों पहले ही वह छुट्टी से लौटकर ड्यूटी पर आया था। मौके से खोखा व बुलेट का टुकड़ा मिला है। दोपहर में गोली चलने की आवाज सुनाई दी थी। - अनुराग आर्य, पुलिस अधीक्षक


कुछ दिनों से तनाव में था, साथियों से बनाई दूरी

गाजीपुर जिले के खरौना निवासी आशुतोष यादव 2018 बैच का सिपाही था। लालगंज कोतवाली में 16 फरवरी 2019 को उसे पहली तैनाती मिली थी। नौकरी पाने के बाद वह बहुत खुश रहता था। अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी। इधर, कुछ दिनों से वह तनाव में था। साथियों ने उससे इस बारे में कई बार पूछा, लेकिन उसने कोई जानकारी नहीं दी। अभी 17 सितंबर को ही उसने छुट्टी से लौटने के बाद ड्यूटी ज्वाइन की थी। घर से लौटने के बाद वह अधिक शांत व एकांत में रहने लगा।

साथी पुलिसकर्मियों से उसने दूरी बना ली थी। हल्का नंबर चार में उसकी नियमित तैनाती थी, लेकिन शुक्रवार को उसकी ड्यूटी कोतवाल के साथ हमराह के रूप में लग गई। ड्यूटी लगने के बाद कार्यालय से जब वह एके-47 लेकर निकला तो किसी तो नहीं मालूम था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। कोतवाल लोगों की समस्याएं सुनने लगे तो वह परिसर के पीछे बिना किसी को कुछ बताए बैरक में चला गया। बताया जाता है कि बैरक की तीसरी मंजिल पर सीढ़ी पर बैठकर उसने एके-47 को गर्दन से कनपटी के बीच रखकर खुद को गोली मार ली।

उसे अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया था। पुलिसकर्मियों को दोपहर में गोली की आवाज सुनाई दी। इस पर उन्होंने कोतवाली के पीछे बने बैरक में जाकर देखा तो वहां कुछ नहीं मिला। जिसके बाद पुलिसकर्मी अपने काम में जुट गए। घटना के लगभग सात घंटे बाद उसका रक्तरंजित शव मिला। उसका शरीर अकड़ चुका था। सिपाही आशुतोष की मौत के बाद कोतवाली के पुलिसकर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई। 

पोस्टमार्टम की कराई जाएगी वीडियोग्राफी

सिपाही के  आत्महत्या करने की जानकारी पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने लगभग आधे घंटे तक छानबीन की। सिपाही की बैरक में रहने वाले साथी पुलिसकर्मियों से भी उन्होंने पूछताछ की। घटना की जांच के बाद एसपी ने बताया कि सिपाही के शव का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल में वीडियोग्राफी के बीच कराया जाएगा। इसके लिए चिकित्सकों का पैनल गठित करने के लिए सीएमओ से कहा जाएगा। परिजनों को सूचना दे दी गई है। 

मोबाइल खोल सकता है मौत का राज 
कोतवाली में सुबह कोतवाल के हमराही के रूप में ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद सिपाही ने अचानक खुदकुशी क्यों की, यह किसी की समझ में नही आ रहा है। सुबह उठने के बाद उसने नाश्ता किया और फिर बाद में खाना भी खाया। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि उसने बैरक में जाकर खुद को गोली से उड़ा लिया। कोतवाली में उसकी किसी से कोई बातचीत भी नहीं हुई। पुलिस भी इस बार में कुछ नहीं बता सकी। अब उसके मोबाइल फोन से मौत का रहस्य खुल सकेगा। पुलिस भी इस तरफ जांच कर रही है। 


गायब होने की बात छिपाए रहे कोतवाल
सिपाही आशुतोष एके-47 लेकर सुबह 11 बजे के आसपास ड्यूटी से नदारद हो गया। कोतवाल राकेश भारती को कहीं आने-जाने के दौरान हमराही के नहीं होने की जानकारी हो गई। लगभग सात घंटे बाद उसका शव बैरक की तीसरी मंजिल पर मिला। इस बीच एके-47 के साथ लापता हुए सिपाही की सूचना अफसरों को नहीं दी गई। जब उसकी मौत की जानकारी हुई तो कोतवाल के होश उड़ गए।
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