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‘प्रभु’! इस जंक्शन का करिए उद्धार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 13 Feb 2016 11:19 PM IST
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प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के कायाकल्प का वादा कर चुके रेलमंत्री सुरेश प्रभु से जिलेवासियों ने और उम्मीदें पाल रखी हैं। शहर से सटे चिलबिला जंक्शन की बदतर हालत पर अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। यह स्टेशन सिर्फ कहने के लिए जंक्शन है। शहर से एकदम सटे होने के बावजूद न तो महत्वपूर्ण गाड़ियों का ठहराव होता है और न यात्री सुविधा के नाम पर यहां कुछ है। रात के समय तो स्टेशन पर रुकने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कुछ ऐसी ही हालत भूपियामऊ और विश्वनाथ रेलवे स्टेशनों की भी है।
चिलबिला में बड़ी संख्या में व्यापारी रहते हैं। इन्हें आए दिन दिल्ली, मुंबई कानपुर, लखनऊ जैसे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है। मगर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों जैसे सरयू, पद्मावत, हावड़ा एक्सप्रेस जैसी गाड़ियाें का ठहराव यहां नहीं किया गया। इससे यात्रियों को प्रतापगढ़ आना पड़ता है। यही वजह है ट्रेन की अक्सर चेन पुलिंग कर दी जाती है। पद्मावत एक्सप्रेस में अक्सर इस तरह की घटना होती है। चिलबिला में आरक्षण की सुविधा न होने से व्यापारियों को प्रतापगढ़ और अमेठी का चक्कर लगाना पड़ता है। पेयजल के नाम पर केवल एक हैंडपंप है जो कि अक्सर खराब रहता है। प्लेटफार्म बने हैं मगर पहुंचने के लिए पुल की सुविधा नहीं हैं। अगर चिलबिला जंक्शन पर महत्वूर्ण ट्रेनों का ठहराव हो तो पट्टी, कोंहड़ौर के लोगों को भी ट्रेन पकड़ने के लिए प्रतापगढ़ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भुपियामऊ की बात की जाए तो इलाहाबाद-फैजाबाद रेल मार्ग के बीच स्थित इस स्टेशन की बदहाली किसी से छिपी नहीं हैं। हैंडपंप लगा है, मगर खराब है। यात्रियों के बैठने के लिए सीट नहीं है। प्लेटफार्म भी एक ही है। स्टापेज केवल सवारी गाड़ियों का ही है। भुपियामऊ व उसके आस-पास के इलाके के सैकड़ों लोग इसी स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं। मगर सरयू और साकेत जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों का लिखा-पढ़ी में ठहराव न होने से यात्रियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। यहां पर उतरने के लिए यात्रियों को चेन पुलिंग करनी पड़ती है। रेलवे अगर ट्रेनों का ठहराव कर दे तो यहां से रेलवे को काफी राजस्व की प्राप्ति हो सकती है।
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चिलबिला में बड़ी संख्या में व्यापारी रहते हैं। इन्हें आए दिन दिल्ली, मुंबई कानपुर, लखनऊ जैसे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है। मगर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों जैसे सरयू, पद्मावत, हावड़ा एक्सप्रेस जैसी गाड़ियाें का ठहराव यहां नहीं किया गया। इससे यात्रियों को प्रतापगढ़ आना पड़ता है। यही वजह है ट्रेन की अक्सर चेन पुलिंग कर दी जाती है। पद्मावत एक्सप्रेस में अक्सर इस तरह की घटना होती है। चिलबिला में आरक्षण की सुविधा न होने से व्यापारियों को प्रतापगढ़ और अमेठी का चक्कर लगाना पड़ता है। पेयजल के नाम पर केवल एक हैंडपंप है जो कि अक्सर खराब रहता है। प्लेटफार्म बने हैं मगर पहुंचने के लिए पुल की सुविधा नहीं हैं। अगर चिलबिला जंक्शन पर महत्वूर्ण ट्रेनों का ठहराव हो तो पट्टी, कोंहड़ौर के लोगों को भी ट्रेन पकड़ने के लिए प्रतापगढ़ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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भुपियामऊ की बात की जाए तो इलाहाबाद-फैजाबाद रेल मार्ग के बीच स्थित इस स्टेशन की बदहाली किसी से छिपी नहीं हैं। हैंडपंप लगा है, मगर खराब है। यात्रियों के बैठने के लिए सीट नहीं है। प्लेटफार्म भी एक ही है। स्टापेज केवल सवारी गाड़ियों का ही है। भुपियामऊ व उसके आस-पास के इलाके के सैकड़ों लोग इसी स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं। मगर सरयू और साकेत जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों का लिखा-पढ़ी में ठहराव न होने से यात्रियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। यहां पर उतरने के लिए यात्रियों को चेन पुलिंग करनी पड़ती है। रेलवे अगर ट्रेनों का ठहराव कर दे तो यहां से रेलवे को काफी राजस्व की प्राप्ति हो सकती है।
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