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अवैध खनन के आगे प्रशासन ने घुटने टेके

Tue, 09 Feb 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Tue, 09 Feb 2016 11:33 PM IST
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जिला प्रशासन ने मिट्टी के अवैध खनन वालों के आगे घुटने टेक दिए हैं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल में अवैध खनन के जरिए जेसीबी व ट्रैक्टर से मुंहमांगी कीमत वसूली जा रही है। मिट्टी का प्रयोग निर्माणाधीन मकान और इंटरलॉकिंग के  काम में खुलेआम हो रहा है।
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 ग्रामीण अंचल में तो पुलिस व तहसीलकर्मी मामला सेट होने के बाद खुलेआम किसानों के खेत की उर्वरा मिट्टी की खुदाई के लिए राजी हो जाते हैं। ईंट भट्ठा संचालक एक दो स्थानों का परमीशन लेने के बाद अवैध मिट्टी की खोदाई कराते हैं। पूछने पर दूसरे स्थान का लिया गया परमीशान दिखाने लगते हैं। यह तो ग्रामीण अंचलों का हाल है। जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी सदर की नाक के नीचे मिट्टी की अवैध खनन का कार्य बेरोकटोक जारी है। शहर के चिलबिला, पूरे ईश्वरनाथ, जेल रोड क्रासिंग, नया माल गोदाम रोड क्रासिंग पर सुबह से लेकर रात भर ऐसे ट्रैक्टर मिट्टी लादकर शहर में बेचने के लिए फर्राटा भरते रहते हैं।
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 सई नदी के किनारे की मिट्टी भरकर ट्रैक्टर ट्राली से बेची जा रही है। ट्रैक्टरों की आवाजाही से नया माल गोदाम रोड से लेकर खजुरनी मार्ग भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होता जा रहा है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदारी अधिकारी ध्यान नहीं देते। इससे पुलिसकर्मियों व तहसील प्रशासन से मिलकर अवैध खनन का कार्य ट्रैक्टर ट्राली से दिन रात जारी है। मामला संज्ञान में आने के बाद केवल अधिकारी कार्रवाई की बात कहते हैं, लेकिन बाद में मौन धारण कर लेते हैं।
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शहर से सटे चकबनतोड़, पूरे ईश्वरनाथ, कादीपुर, भंगवा, खजुरनी, बराछा, रंजीतपुर चिलबिला के अलावा दूसरे गांवों में भी अवैध खनन का कार्य बेखौफ जारी है। यहां के किसानों की मानें तो लालच में आकर पड़ोसी किसान अपने जमीन की मिट्टी बेच देते हैं। जिससे उनका खेत नीचे हो जाता है। उन्हें मजबूर होकर अपने जमीन की मिट्टी बेचनी पड़ती है। सिंचाई के दौरान उर्वरा मिट्टी नीचे खेत में पानी के साथ बहकर चली जाती है। ऐसे में मजबूर होकर उन लोगों को भी अपना खेत बेचना पड़ता है।


बलुही और दोमट मिट्टी का अलग-अलग रेट हैं। जेसीबी से लोगों को राहत मिलती है, लेकिन वे अधिकारियों के कार्रवाई के भय से शहर से दूर अवैध खनन के कार्य में लगीं रहती हैं।  बलुही मिट्टी पांच सौ रुपये में बिक रही है। जबकि दोमट मिट्टी के लिए ट्रैक्टर व ट्राली वाले सात सौ रुपये वसूल रहे हैं। 
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