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एक मजरे की बिजली से पूरा गांव रोशन!
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 31 Jan 2016 11:50 PM IST
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अगर किसी ग्रामसभा में पांच मजरे हैं। उसमें से पांच सौ या उससे अधिक आबादी वाला कोई एक मजरा भी लोहिया ग्रामीण विद्युतीकरण योजना से लाभान्वित होता है तो पूरा गांव ऊर्जावान माना जाएगा। सूबे के तत्कालीन प्रमुख सचिव जावेद उस्मानी के इस आदेश का पालन करने में बिजली अफसरों को ठंडी में पसीना आ रहा है। यही वजह है पिछले दो साल में करीब दो सौ मजरे अभी भी विद्युतीकरण से वंचित हैं। मानक का पालन करने के चक्कर में विभाग इन गांवों तक बिजली पहुंचाने का काम दूसरी योजनाओं में करने की तैयारी है।
राम मनोहर लोहिया ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का लाभ केवल उन्हीं मजरों (बसावटों) को मिलेगा जिनकी आबादी पांच सौ या उससे अधिक होगी। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तीन साल पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव जावेद उस्मानी ने आदेश दिया था कि ग्रामसभा के अगर एक मजरे का विद्युतीकरण कर दिया गया है तो उस गांव के बाकी मजरों को भी संतृप्त माना जाएगा। यानि अगर किसी गांव में एक से अधिक मजरें है तो उसमें से किसी एक को बिजली से रोशन कर दिए जाए तो बाकी अपने आप रोशन हो जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि शासनादेश की हकीकत धरातल से जुदा है। इससे विद्युतीकरण करने में काफी अड़चनें आ रही हैं। शायद यही वजह है कि लालगंज, पट्टी और कुंडा में वर्ष 14-15 और 15-16 में करीब दो सौ से अधिक मजरे मानक का पालन करने के चक्कर में लोहिया ग्रामीण विद्युतीकरण की योजना से वंचित हो गए हैं। इन गांवों में अभी भी अंधेरा छाया हुआ है। शासनादेश इन गांवों तक बिजली जाने का रास्ते रोके खड़ा हुआ है। अधिकारी भी तत्कालीन प्रमुख सचिव के आदेश का पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि शासनादेश तीन साल पहले मई 2012 में जारी हुआ था। तब से उस आदेश का पालन अभी तक किया जा रहा है। बीच में इसमें संशोधन भी नहीं हुआ।
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राम मनोहर लोहिया ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का लाभ केवल उन्हीं मजरों (बसावटों) को मिलेगा जिनकी आबादी पांच सौ या उससे अधिक होगी। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तीन साल पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव जावेद उस्मानी ने आदेश दिया था कि ग्रामसभा के अगर एक मजरे का विद्युतीकरण कर दिया गया है तो उस गांव के बाकी मजरों को भी संतृप्त माना जाएगा। यानि अगर किसी गांव में एक से अधिक मजरें है तो उसमें से किसी एक को बिजली से रोशन कर दिए जाए तो बाकी अपने आप रोशन हो जाएंगे।
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अधिकारियों का मानना है कि शासनादेश की हकीकत धरातल से जुदा है। इससे विद्युतीकरण करने में काफी अड़चनें आ रही हैं। शायद यही वजह है कि लालगंज, पट्टी और कुंडा में वर्ष 14-15 और 15-16 में करीब दो सौ से अधिक मजरे मानक का पालन करने के चक्कर में लोहिया ग्रामीण विद्युतीकरण की योजना से वंचित हो गए हैं। इन गांवों में अभी भी अंधेरा छाया हुआ है। शासनादेश इन गांवों तक बिजली जाने का रास्ते रोके खड़ा हुआ है। अधिकारी भी तत्कालीन प्रमुख सचिव के आदेश का पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि शासनादेश तीन साल पहले मई 2012 में जारी हुआ था। तब से उस आदेश का पालन अभी तक किया जा रहा है। बीच में इसमें संशोधन भी नहीं हुआ।
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